Ruby Arun

Tuesday, 20 January 2026

फ्रांस ने नहीं दिया भाव, तो बौखलाए ट्रंप ने फ्रेंच शैंपेन और वाइन पर 200% टैरिफ लगाने की धमकी

 एक तरफ अपने वाले हैं जिन्होंने #Iran के #ChabaharPort में भारत के 4000 करोड़ से ज्यादा का निवेश करने के बाद भी अमेरिकी धमकी पर चुप्पी साध रखी है.

दूसरी तरफ #France के राष्ट्रपति #Emmanuel_Macron हैं, जिन्होंने #DonaldTrump को ठेंगा दिखा रखा है..

#Emmanuel_Macron ने ट्रंप के प्रस्तावित #Board_of_Peace में शामिल होने के निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया है. इसलिए बौखलाए ट्रंप ने फ्रांसीसी वाइन और शैंपेन पर 200 फीसदी #Tariff लगाने की धमकी दे दी है.


Emmanuel Macron इसलिए बोर्ड ऑफ पीस में शामिल नहीं हो रहे क्योंकि वे #European_Union और #European_Autonomy के बड़े पक्षधर हैं और वे नहीं चाहते कि #Europe पूरी तरह से अमेरिका की विदेश नीति के पीछे चले.

मैक्रों का मानना है कि गाजा और मध्य पूर्व में शांति के लिए कोई भी नया ढांचा #United_Nation और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में होना चाहिए. जबकि ट्रंप पूर्वार्ध संयुक्त राष्ट्र की अनदेखी कर रहे हैं.

इसके अलावा, फ्रांस में एक बड़ी मुस्लिम और यहूदी आबादी है. फ्रांस के कई अरब देशों के साथ गहरे कूटनीतिक और आर्थिक संबंध हैं.

मध्य पूर्व के मुद्दे पर कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले मैक्रों को अपने देश के आंतरिक सामाजिक संतुलन और राजनीतिक प्रतिक्रिया का भी ध्यान रखना पड़ता है.


अपने वाले को,अपने देश के आंतरिक सामाजिक संतुलन से कोई मतलब नहीं..

बल्कि ये तो जितना बिगड़े, उतना ही इनका फायदा....

Monday, 12 January 2026

Jungle Raj Of Donald Trump,Trump has declared himself the #Acting_President of #Venezuela.

 One is our very own "self-proclaimed God," and the other is this #America...

#DonaldTrump has declared himself the #Acting_President of #Venezuela.



This is the "Jungle Raj" (Law of the Jungle) of America.
In #Geopolitics, I consider this an "invitation to anarchy."
This is #Gunboat_Diplomacy.
It has the potential to destabilize the global order and make it extremely uncertain.
If any other country had done this, America would have called it a "terrorist act."
Trump's move is a violation of the #Right_to_Self_determination of the people of #Venezuela.
It gives other countries like #China and #Russia a "moral license" to take similar actions against their neighbors.
Until now, international politics operated on the rule that every country would respect the sovereignty (#Sovereignty) of another.
This "unconventional" method of #DonaldTrump is shattering decades-old principles of international diplomacy.
Technically and legally, this claim by Donald Trump is a serious crime.
According to international law and Venezuela's own constitution, the President of another country cannot become the #Acting_President of that nation.
If the world's most powerful country bypasses the rules, then smaller countries of the world will never feel safe again.
Russia and China have called this America's "bullying" (Dadagiri), but India has maintained silence on this matter for now.

Friday, 9 January 2026

ट्रेड डील के मुद्दे पर अमेरिका ने भारत से कहा कि "अब तो ट्रेन छूट गई"

 अपने देश में तो यही माहौल बनाया जाता रहा कि #Trade_Deal के मुद्दे पर मोदी जी #America के सामने नहीं झुके!

पर मोदी जी समय पर निर्णय ही नहीं ले पाए, ऐसा ये #American Commerce Secretary #Howard_Lutnick कह रहा है.

#Lutnick ने बताया कि 

"मोदी जी ने पहले तो फोन नहीं किया #Trump को. पर डील की #Deadline बीत जाने के 3 हफ्ते बाद मोदी जी ने फोन किया और कहा कि हम तैयार हैं.


तब अमेरिका ने कहा :–

तैयार किस बात के लिए? 

वह ट्रेन तो तीन हफ्ते पहले ही स्टेशन छोड़ चुकी है."


लुटनिक के मुताबिक कि ट्रंप "Staircase" की तरह डील करते हैं. जो देश सबसे पहले आता है,उसे सबसे अच्छी डील मिलती है. भारत के फैसला करने में देरी करने की वजह से वह अब इस लाइन में पीछे छूट गया है और उसे अब वैसी अनुकूल शर्तें नहीं मिलेंगी जो पहले मिल सकती थीं.

अमेरिका ने इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम जैसे देशों के साथ पहले समझौते कर लिए हैं.

मतलब ये कि अगर मोदी सरकार वक्त पर सही फैसला ले लेती तो अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 फीसदी के #Tarrif और रूस से तेल खरीदने के कारण लगाए गए 25 फीसदी के जुर्माने में भारत को राहत मिल सकती थी.

आसमान में दिखा अमेरिकी #Doomsday_Plane यानी #कयामत_का_विमान

#LosAngeles के आसमान में अमेरिका के सबसे रहस्यमयी और शक्तिशाली विमान #E_4B_Nightwatch जिसे 'Doomsday Plane' कहते हैं,को उड़ान भरते हुए देखा गया.

चूंकि वैश्विक अस्थिरता का दौर है, इसलिए इस विमान के दिखने के बाद हड़कंप मचा हुआ है की क्या कोई बड़ा खतरा मंडरा रहा है?

ऐसे विमानों को सक्रिय करना यह दिखाने का एक तरीका है कि अमेरिका किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष के लिए पूरी तरह तैयार है.

#Trump अपने विरोधियों को #Iran और #Venezuela में पैदा हुई स्थितियों के बाद शायद #Strategic_Signaling देना चाहते हों कि "सभी विकल्प खुले हैं".


चर्चा के मुताबिक,अमेरिकी रक्षा मंत्री #Pete_Hegseth इस उड़ते हुए कमांड सेंटर में सवार थे. विमान को जॉइंट बेस एंड्रयूज से कैलिफोर्निया की ओर जाते ट्रैक किया गया है.

पिछले कुछ दिनों में यह विमान दूसरी बार दिखा है. इससे पहले 6 जनवरी को भी एक E-4B को ओमाहा से उड़ान भरते देखा गया था.

फिलहाल पेंटागन ने इस विशेष उड़ान के उद्देश्य पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.

डूम्सडे प्लेन का दिखना हमेशा युद्ध का संकेत नहीं होता, लेकिन अंतरराष्ट्रीय तनाव के समय यह निश्चित रूप से दुनिया का ध्यान खींचता है.

यह विमान कोई सामान्य पैसेंजर प्लेन नहीं है,बल्कि संकट के समय अमेरिका का सर्वोच्च सैन्य मुख्यालय बन जाता है.

यह परमाणु विस्फोट से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स #EMP से पूरी तरह सुरक्षित है.

यह विमान बिना लैंड किए कई दिनों तक आसमान में रह सकता है और आसमान में ही इसकी रिफ्यूलिंग हो सकती है.

इसमें 60 से ज्यादा एंटीना लगे हैं, जो समुद्र की गहराई में मौजूद परमाणु पनडुब्बियों से भी संपर्क साध सकते हैं.

आधुनिक विमानों के विपरीत, इसमें पुराने एनालॉग उपकरणों का उपयोग किया जाता है ताकि यह हैकिंग या डिजिटल हमलों से सुरक्षित रहे.


हालांकि सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यह उड़ान #Routine_Training का हिस्सा हो सकती है.

लेकिन दुनिया भर में तनाव जिस कदर बढ़ा है, उसमें इस विमान का आसमान में नजर आना चिंता का विषय है.

Monday, 29 December 2025

भारत बनाम तुर्की–तानाशाही रातों-रात नहीं आती, बल्कि वह रेंगते हुए आती है.




कैसे एक #तानाशाह अपने #Modus_Operandi से एक देश की #लोकतांत्रिक प्रणाली को #तानाशाही व्यवस्था में तब्दील कर देता है.यह समझने के लिए यह किताब एक बेहतरीन जरिया है. 

#Turkey की मशहूर लेखिका और पत्रकार #Ece_Temelkuran ने अपनी किताब "How to Lose a Country: The 7 Steps from #Democracy to #Dictatorship" और #Turkey: The Insane and the Melancholy" में राष्ट्रपति #Recep_Tayyip_Erdoğan की राजनीति और उनके शासन के तरीकों की तीखी आलोचना की है.

उन्होंने #एर्दोआन की राजनीति के बारे में कुछ मुख्य बातें इस प्रकार लिखी हैं:

लोकतंत्र से तानाशाही का सफर 

#टेमल्कुरन ने अपनी किताब में बताया है कि कैसे एर्दोआन ने धीरे-धीरे लोकतंत्र को खत्म कर तानाशाही स्थापित की.उन्होंने इसके 7 मुख्य चरण बताए हैं:–

1:– 'आंदोलन' बनाना:–

खुद को जनता का मसीहा और पुरानी व्यवस्था का शिकार #Underdog बताना.

2:–भाषा का पतन:–

तर्कपूर्ण बहस के बजाय बचकानी और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना.

3:– सच का अंत :–

तथ्यों को झुठलाना और अपनी सुविधानुसार नई 'सच्चाई' पेश करना.

संस्थाओं को कमजोर करना:–

न्यायपालिका, मीडिया और शिक्षा संस्थानों पर कब्जा करना या उन्हें डराना.

4:– "असली जनता" का कार्ड खेलना

लेखिका के अनुसार, एर्दोआन ने तुर्की को दो हिस्सों में बांट दिया—"असली जनता" जो उनके #समर्थक हैं और "गद्दार" जो उनके #विरोधी या शिक्षित वर्ग हैं. 

वह अक्सर खुद को आम जनता के साथ जोड़ते हैं और विरोधियों को 'एलीट' या पश्चिमी देशों का एजेंट बताकर उनकी आवाज दबाते हैं.

5:– भय और शर्म का खात्मा

टेमल्कुरन लिखती हैं कि एर्दोआन के शासन में समाज से 'नैतिक शर्म' खत्म हो गई है. जब नेता खुलेआम #झूठ बोलता है या #क्रूरता करता है और समर्थक उसका जश्न मनाते हैं.

तो वह समाज को अंदर से खोखला कर देता है.उन्होंने इसे "बेशर्मी की राजनीति" कहा है.

6:–विरोधियों का दमन

उनकी किताब "Turkey: The Insane and the Melancholy" में जिक्र है कि कैसे 2013 के 'गेजी पार्क' प्रदर्शनों के बाद एर्दोआन ने अधिक #आक्रामक रुख अपनाया. उन्होंने #मीडिया को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया, जिसके कारण एसे टेमल्कुरन सहित कई पत्रकारों को अपनी नौकरियां गंवानी पड़ीं और देश छोड़ना पड़ा.

7:–धार्मिक ध्रुवीकरण

उन्होंने बताया कि कैसे एर्दोआन ने #धर्म (इस्लाम) का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक शक्ति बढ़ाने और तुर्की के #Secular ढांचे को बदलने के लिए किया है.

आप इस किताब में हमारी स्थितियों की 100 फीसदी झलक पाएंगे.


@RTErdogan

@ETemelkuran 

Thursday, 25 December 2025

असल #आतंकवादी ये "गुंडे" हैं,जो देश में रहकर,देश #तोड़ रहे हैं.

 असल #आतंकवादी ये "गुंडे" हैं.

ये हैं #देश के असली #दुश्मन..

जो देश में रहकर,देश #तोड़ रहे हैं.


जो अपने ही देश के लोगों का जात–धर्म पूछ कर उनकी पिटाई कर रहे हैं. अपमानित और जलील कर रहे हैं.

क्या भारत में सिर्फ भारतीय नागरिक होना काफी नहीं है?

जिस 140 करोड़ जनता की संख्या का "डंका" विश्व में पीटा जाता है, उस 140 करोड़ में हिंदुओं के साथ भारतीय ईसाई मुसलमान,सिख नहीं आते क्या?


बताइए मोदी जी, 

बताइए ना अमित शाह जी

इन मवालियों को ये हक किसने दिया?

किसने इन्हें ठेकेदार बनाया ?

कौन इन्हें शह दे रहा है?

इतनी हिम्मत इनके अंदर कैसे आ जा रही है कि ये देश के नागरिकों को प्रताड़ित कर सकें?

क्यों नहीं इन्हें रोक जा रहा?

आखिर किसका फायदा हो रहा है ऐसी अराजक हरकतों से? 

इन आवारा शोहदों को सख्त सजा क्यों नहीं दी जा रही ताकि इनकी देखा देखी दूसरे लुच्चे लफंगे, ऐसे अपराध करने की सोच भी ना सकें.


ये #रायपुर का #मैग्नेटो_मॉल है.

जहां #बजरंग_दल के गुंडे लाठी और हॉकी स्टिक लिए दानवों की तरह उत्पात मचा रहे हैं.

घाना (Ghana) में भी भारत जैसा ही Mass Hysteria का दौर



 #Mass_Hysteria के ऐसे ही दौर से अपना देश भी गुजर रहा है जो अभी #Ghana में हो रहा है..😔

जब एक बड़ी #भीड़ किसी #मूर्ख तथाकथित धर्मगुरु या राजनेता की बेवकूफाना बातों पर विश्वास कर लेती है,तो डर संक्रामक हो जाता है. 

वैज्ञानिक रूप से "जुमले" कितने ही गलत क्यों न हों,लोग तर्क के बजाय भावनाओं में आकर जाहिलाना व्यवहार करने लगते हैं.

#घाना में एक तथाकथित #Prophet "Eboh Noah" ने दावा किया था कि आज 25 दिसंबर से दुनिया में 3 साल तक चलने वाली महाप्रलय वाली बाढ़ शुरू होगी. उसके हजारों हजार अनुयाई अपना घर बार सब छोड़कर जान बचाने के लिए Prophet Eboh Noah की नाव पर सवार होने के लिए भागे चले जा रहे हैं. 

Prophet Eboh Noah ने ऐलान किया था कि God ने उसे 8 बड़ी नावें बनाने का हुक्म दिया है जिसके जरिए वो लोगों को प्रलयकारी बाढ़ से बचा सकता है.

जबकि इस आपदा के बारे में किसी भी सरकारी एजेंसी, मौसम विभाग या वैज्ञानिक संस्था ने किसी भी तरह की #Global_Flood की चेतावनी जारी नहीं की है. पृथ्वी पर अचानक ऐसी किसी बाढ़ का कोई वैज्ञानिक आधार ही नहीं है.

अगर वास्तव में ऐसा कोई वैश्विक संकट होता,तो पूरी दुनिया की सरकारें अलर्ट जारी कर चुकी होतीं.

पिछले दिनों Ghana में एबोह नूह के ऐसे Misinformation और Sensation फैलाने वाले वीडियोज़ सोशल मीडिया पर इतने वायरल किए गए कि वहां के लोगों में #FOMO यानि Fear of Missing Out पैदा हो गया कि कहीं वे पीछे न छूट जाएं.

जिसका नतीजा इस भगदड़ के रूप में सामने आ



या है.