एक तरफ अपने वाले हैं जिन्होंने #Iran के #ChabaharPort में भारत के 4000 करोड़ से ज्यादा का निवेश करने के बाद भी अमेरिकी धमकी पर चुप्पी साध रखी है.
दूसरी तरफ #France के राष्ट्रपति #Emmanuel_Macron हैं, जिन्होंने #DonaldTrump को ठेंगा दिखा रखा है..
#Emmanuel_Macron ने ट्रंप के प्रस्तावित #Board_of_Peace में शामिल होने के निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया है. इसलिए बौखलाए ट्रंप ने फ्रांसीसी वाइन और शैंपेन पर 200 फीसदी #Tariff लगाने की धमकी दे दी है.
Emmanuel Macron इसलिए बोर्ड ऑफ पीस में शामिल नहीं हो रहे क्योंकि वे #European_Union और #European_Autonomy के बड़े पक्षधर हैं और वे नहीं चाहते कि #Europe पूरी तरह से अमेरिका की विदेश नीति के पीछे चले.
मैक्रों का मानना है कि गाजा और मध्य पूर्व में शांति के लिए कोई भी नया ढांचा #United_Nation और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में होना चाहिए. जबकि ट्रंप पूर्वार्ध संयुक्त राष्ट्र की अनदेखी कर रहे हैं.
इसके अलावा, फ्रांस में एक बड़ी मुस्लिम और यहूदी आबादी है. फ्रांस के कई अरब देशों के साथ गहरे कूटनीतिक और आर्थिक संबंध हैं.
मध्य पूर्व के मुद्दे पर कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले मैक्रों को अपने देश के आंतरिक सामाजिक संतुलन और राजनीतिक प्रतिक्रिया का भी ध्यान रखना पड़ता है.
अपने वाले को,अपने देश के आंतरिक सामाजिक संतुलन से कोई मतलब नहीं..
बल्कि ये तो जितना बिगड़े, उतना ही इनका फायदा....
No comments:
Post a Comment