#Europe से लेकर यूक्रेन तक हड़कंप मचा देने वाली एक ऐसी रियल-लाइफ थ्रिलर कहानी सामने आई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। पूरी क्रोनोलॉजी समझिए:–
#Monaco की एक आलीशान बिल्डिंग के एंट्रेंस पर एक बैग में छिपाकर रखा गया रिमोट-कंट्रोल बम फटा. इस धमाके का निशाना यूक्रेन के अरबपति कारोबारी #Vadym_Yermolaiev थे, जिन पर यूक्रेन ने पहले #Russia के साथ कथित व्यापारिक संबंधों को लेकर प्रतिबंध लगाए थे.
यह घटना इसी साल 29 जून को हुई थी.
इस हमले में वादिम येरमोलाएव और उनका 13 साल का बेटा बाल-बाल बच गए, लेकिन उनकी पार्टनर को बेहद गंभीर चोटें आईं और डॉक्टरों को उनके दोनों पैर काटने पड़े.
यूक्रेन की सुरक्षा एजेंसी #SSU ने उस खुफिया कैमरे से डिलीट किया गया वीडियो फुटेज बरामद कर लिया है, जिसे हमलावरों ने खुद लगाया था.
यह वीडियो सबूत के तौर पर रिकॉर्ड किया गया था ताकि वे अपने आकाओं को दिखा सकें कि "काम पूरा हो गया है"....
जांच में सामने आया कि बम रखने वाली मुख्य संदिग्ध #Anastasiia_Berezovska नाम की एक 39 वर्षीय यूक्रेनी महिला थी, जिसने पुरुष के कपड़े पहनकर भेष बदला हुआ था.
इंटरपोल ने उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया, लेकिन 7 जुलाई को #Kyiv के पास उसका शव मिला, जिसके सिर में गोली मारी गई थी.
इस केस में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब बेरेज़ोव्स्का की हत्या के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया. इनमें से एक यूक्रेन की मिलिट्री इंटेलिजेंस #DIU का अधिकारी है और दूसरा यूक्रेन की सुरक्षा सेवा SSU का पूर्व अधिकारी है.
इन दोनों ने ही बेरेज़ोव्स्का को क्रिप्टो और बैंक अकाउंट्स के ज़रिए पैसे ट्रांसफर किए थे, जिससे यह शक गहरा गया है कि मोनाको ब्लास्ट के पीछे भी यही मास्टरमाइंड थे.
खुद पीड़ित वादिम येरमोलाएव ने सार्वजनिक रूप से यूक्रेन की मिलिट्री इंटेलिजेंस DIU के अधिकारियों पर इस हत्या के प्रयास की साजिश रचने का सीधा आरोप लगाया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा की मांग की है.
यह मामला अब केवल एक बिजनेसमैन पर हमले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने यूरोपीय धरती पर यूक्रेन की खुफिया एजेंसियों की भूमिका और उनके आपस के टकराव को लेकर एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय विवाद खड़ा कर दिया है.
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