Ruby Arun

Friday, 17 July 2026

क्या मोदी सरकार, बुलेट ट्रेन के नाम पर केवल एक महंगी 'मेट्रो' खड़ी कर रही है जिसका आधा ढांचा जापानी और आधा घरेलू होगा?

 क्या मोदी सरकार, बुलेट ट्रेन के नाम पर केवल एक महंगी 'मेट्रो' खड़ी कर रही है जिसका आधा ढांचा #जापानी और आधा घरेलू होगा?



#Japan� की प्रधानमंत्री को मोदी जी ने भले ही अपनी "बहन" बना लिया हो, फिर भी जापान के साथ रिश्ते कड़वाहट भरे हो चुके हैं. वजह है भारतीय शिनकानसेन यानी #बुलेट_ट्रेन . जो मुंबई–अहमदाबाद रूट पर चलने वाली थी.

जापान का कहना है कि भारत, बुलेट ट्रेन के नाम पर अपने यात्रियों की सुरक्षा से समझौता कर रहा है. 

#जापान के प्रतिष्ठित बिजनेस पब्लिकेशन #Toyo_Keizai_Online ने इस पर एक रिपोर्ट छापी है जिसमें भारत पर वादाखिलाफी और बेईमानी का आरोप लगाया है. लिखता है " प्रधानमंत्री ताकाइची की यात्रा के बाद भी कोई परिणाम नहीं: 'भारतीय शिनकानसेन की विफलता. 

जापान को सुरक्षा के सिग्नलिंग सिस्टम से भारत ने बाहर किया"...

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद, जापान के पूर्व राज्य मंत्री Hideki Makihara - @hmakihara ने भी ट्वीट कर अपना गुस्सा जाहिर किया है. ये लिखते हैं कि– सन 2017 में वे भारत-जापान के बीच बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की शुरुआती वार्ताओं और बैठकों में जापानी प्रतिनिधिमंडल के तौर पर व्यक्तिगत रूप से शामिल थे. भारतीय पक्ष का रवैया बेहद "लापरवाह" था और भारत वादे करके तुरंत उनसे पलट जाता था. उन्होंने सीधे तौर पर तत्कालीन भारतीय रेल मंत्री पीयूष गोयल के व्यवहार और बातचीत के तरीके को "Awful" बताया.

हिदेकी माकिहारा जापान की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी #LDP के कद्दावर नेता और पूर्व राज्य मंत्री आर्थिक, व्यापार और उद्योग विभाग–रह चुके हैं.

जापान की इस नाराजगी के पीछे मुख्य रूप से व्यावसायिक और तकनीकी मतभेद हैं.

मूल योजना के अनुसार, बुलेट ट्रेन में जापान का प्रसिद्ध DS-ATC सिग्नलिंग सिस्टम और जापानी कोच E5 शिनकानसेन लगने थे. जो दुनिया में अपनी 100% शून्य-दुर्घटना सुरक्षा के लिए जानी जाती है.

लेकिन भारत ने लागत बचाने के लिए यूरोपीय मानकों की तरफ रुख किया.

जापान का सवाल है कि क्या भारत दुनिया की सबसे परिष्कृत तकनीक खरीद रहा है, या उसमें अपनी शर्तों पर ऐसी मिलावट कर रहे हैं जिससे उसकी सुरक्षा ही खतरे में पड़ जाए?

जबकि इस प्रोजेक्ट के लिए भारत ने 80% से अधिक की फंडिंग जापान के बेहद सस्ते कर्ज 0.1% ब्याज पर से ले रहा है, तो फिर सुरक्षित तकनीकी ट्रांसफर के मामलों में धोखा क्यों कर रहा है? 

भारत,अपने ही देश के लोगों की सुरक्षा से खिलवाड़ क्यों कर रहा है?

यही वजह है कि जिस प्रोजेक्ट को 2022 में पूरा होना था, वह 2026 के अंत तक भी केवल ट्रायल रन के लिए संघर्ष कर रहा है. राजनीतिक रैलियों में बुलेट ट्रेन के चुनावी वादे बेचना तो बहुत आसान है मोदी जी के लिए. पर यात्रियों की सुरक्षा जरूरी नहीं है.

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