Ruby Arun

Friday, 17 July 2026

राष्ट्रभक्ति का 'कानूनी' सर्टिफिकेट बनाम सुलगते बुनियादी सवाल.... डायवर्जन कूटनीति' की क्रोनोलॉजी...

राष्ट्रभक्ति का 'कानूनी' सर्टिफिकेट बनाम सुलगते बुनियादी सवाल....

डायवर्जन कूटनीति' की क्रोनोलॉजी...


संसद के मानसून सत्र में मोदी सरकार 'वंदे मातरम' को कानूनी संरक्षण देने के लिए 'द प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर अमेंडमेंट बिल, 2026' लाने की तैयारी में है. दलील दी जा रही है कि राष्ट्रगीत का अपमान करने वालों को कड़ी सजा दी जाएगी.
लेकिन क्या वाकई 'वंदे मातरम' जैसी महान और रूहानी अवधारणा को किसी सरकारी मुहर या कानूनी डंडे की जरूरत है?
वंदे मातरम' केवल शब्दों का समूह नहीं है. यह आज़ादी की लड़ाई से लेकर आज तक हर भारतीय के खून, समर्पण और देश के प्रति अगाध प्रेम का प्रतीक है.
जिस गीत को देशवासी अपनी आत्मा से गाते हैं, जो हमारी रग रग में बसा है, उसे जबरन डंडे के दम पर गवाने की कोशिश असल में उस भावना का अनादर है. देशभक्ति दिलों से उपजती है, संसद के किसी कानून की मोहताज नहीं होती.....
मुझे तो डर है कि अगर यह कानून पास होता है, तो सबसे ज्यादा डर इस बात का है कि इसकी जद में सत्ताधारी दल के नेता ही न आ जाएं.
आए दिन ऐसे वीडियो सामने आते हैं जहां राष्ट्रवाद का ढोल पीटने वाले बड़े-बड़े नेताओं को वंदे मातरम की दो लाइनें तक याद नहीं होतीं, और अगर याद भी हों तो वे उसका शुद्ध और स्पष्ट उच्चारण नहीं कर पाते...
झंडा फहराने या राष्ट्रगीत बजने के दौरान अक्सर नेता कैमरे के सामने अपनी जगह पर हिलते-डुलते, बातचीत करते या आधे वंदे मातरम के बीच में ही वीआईपी गेट से बाहर निकलते हुए कैमरे में कैद होते हैं.
क्या नया कानून ऐसे सत्ताधारी नेताओं पर भी उतनी ही कड़ाई से लागू होगा?

जब-जब देश में युवा, छात्र और आम जनता बुनियादी मुद्दों पर सरकार को घेरती है, तब-तब राष्ट्रवाद का कोई नया शिगूफा मेज पर रख दिया जाता है.
इस समय देश जिन वास्तविक संकटों से जूझ रहा है, यह बिल सीधे तौर पर उनसे ध्यान भटकाने की कोशिश नजर आता है.
––देश का युवा सड़कों पर है। पेपर लीक और घोटालों के कारण लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है, लेकिन चर्चा रोजगार पर नहीं, राष्ट्रभक्ति की कानूनी परिभाषा पर हो रही है.
––डीजल-पेट्रोल की बेतहाशा बढ़ती कीमतें और उसमें होने वाली मिलावट से आम आदमी की कमर टूट चुकी है. इन आर्थिक मुद्दों पर जवाबदेही तय करने के बजाय ध्यान राष्ट्रगीत के 'अपमान और सम्मान' के बहस रूपी जाल में उलझाया जा रहा है.
––क्या तीन साल की जेल का डर दिखाकर एक और ऐसा नैरेटिव खड़ा करने की कोशिश है, जिसमें सरकार के सामने बुनियादी सवाल उठाने वाले हर नागरिक को 'राष्ट्रविरोधी' साबित करना और आसान हो जाए?

–– मोदी जी,सच्ची देशभक्ति युवाओं को रोजगार देने, भ्रष्टाचार खत्म करने और नागरिकों को सुरक्षित जीवन देने में है, न कि देशभक्ति को अदालती मुकदमों का विषय बनाने में...

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