मोदी जी देश को बताएं कि अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों के पीछे का सच क्या है?
देश की जनता को ये जानने का पूरा हक है कि देश की गाढ़ी कमाई और कॉर्पोरेट संसाधन किस दिशा में जा रहे हैं....
एक तरफ नरेंद्र मोदी देश के भीतर 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' का गा गा कर कसीदा पढ़ते रहते हैं. पूरी दुनिया घूम टहल कर विदेशी निवेशकों को भारत बुलाने की हवाई बातें करते हैं .
दूसरी तरफ,अमेरिकी राष्ट्रपति सरेआम मंच से कहते हैं कि "भारत के प्रधानमंत्री अमेरिका में बहुत पैसा खर्च कर रहे हैं और वहां नौकरियां पैदा कर रहे हैं.
यह इस सदी का सबसे बड़ा आर्थिक विरोधाभास है कि भारत का युवा आज दशकों की सबसे ऊंची बेरोज़गारी दर झेलने को मजबूर है,और मोदी राज में भारतीय कॉर्पोरेट्स को भारत के बजाय अमेरिका में निवेश करना और वहां रोजगार सृजित करना ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद लग रहा है.
आखिर जो सरकार खुद निवेश के लिए दुनिया का मुंह ताकती है, उसके राज में ऐसा क्या हो रहा है कि देश का पैसा बाहर जा रहा है?
क्या नरेंद्र मोदी को, देश के प्रधानमंत्री के तौर पर इतनी समझ भी नहीं है कि हेडलाइंस मैनेजमेंट और कूटनीतिक बयानों से देश का पेट नहीं भरता.
देश को प्रधानमंत्री के खोखले वादों की नहीं, बल्कि ठोस और पारदर्शी आर्थिक नीतियों की ज़रूरत है.
चूंकि यह मामला सीधे तौर पर देश के करोड़ों लोगों की रोजी रोटी, देश की आर्थिक नीतियों और वैश्विक छवि से जुड़ा है, इसलिए सरकार की तरफ से आधिकारिक डेटा या स्पष्टीकरण आना बेहद जरूरी है कि भारत का जो पैसा अमेरिका को समृद्ध और विकसित बनाने में जा रहा है तो
* क्या यह निवेश आम आदमी के टैक्स के पैसे यानी सरकारी खजाने से हो रहा है या निजी क्षेत्र द्वारा?
* इससे भारत के घरेलू उद्योगों और विदेशी मुद्रा भंडार पर क्या असर पड़ रहा है?
* भारतीय बाजारों से कितनी भारी मात्रा में पोर्टफोलियो निवेश बाहर गया है ?
और भारतीय शेयर बाजार से कितने विदेशी निवेशकों ने पैसा निकाला है कि जिससे रुपये पर दबाव बना है और रुपया बेहद कमजोर हुआ है?
* जिन बड़ी विदेशी कंपनियों के भारत आने की उम्मीद थी वो कंपनियां वियतनाम,थाईलैंड या बांग्लादेश क्यों चली गईं ?
* भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशों में किए जा रहे निवेश से भारत के नागरिकों को क्या हासिल हो रहा है?
* देश से बाहर जा रहे धन यानी #CapitalOutflow और घरेलू बेरोज़गारी के बीच के इस चक्रव्यूह को सरकार कैसे तोड़ेगी?
#FDI #EconomicCrisis #MakeInIndia #Unemployment #IndianEconomy #Transparency
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