#मोदी-ट्रंप मीटिंग से पहले #अमेरिका ने भारत को झटका दे दिया है.अमेरिका ने सैन्य कमांड से 'भारत' को बाहर कर दिया है.
#America के रक्षा विभाग ने घोषणा की है कि उसके सबसे बड़े सैन्य कमांड #Indo_Pacific_Command से वह #Indo शब्द हटा रहा है. उसने अपना पुराना नाम #US पैसिफिक कमांड' फिर से अपनाने का फैसला किया है और इसमें से #हिंदमहासागर' का जिक्र हटा दिया गया है.
#DonaldTrump के पहले कार्यकाल के दौरान 'पैसिफिक कमांड' को 'इंडो-पैसिफिक' नाम दिया गया था और ऐसा #China को रोकने के लिए #भारत के रणनीतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए किया गया था.
तो क्या अब अमेरिका की नजर में भारत के पास कोई रणनीतिक भूमिका नहीं बची है? क्या #Asia-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका के लिए भारत का कोई भू-राजनीतिक महत्व नहीं रह गया है?
अमेरिका ने ये फैसला तब किया जब आज फ्रांस में प्रधानमंत्री #नरेन्द्र_मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति #डोनाल्ड_ट्रंप की मुलाकात होने वाली है.
अमेरिका के इस कदम के बाद भारत के तथाकथित 'बैकयार्ड' दक्षिण एशिया में अब चीन और #Pakistan का भू-राजनीतिक, भू-आर्थिक और सैन्य दबदबा होगा.
अमेरिका का यह सैन्य कमांड अमेरिका के पश्चिमी तट के पास के पानी से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला हुआ है.
तो सवाल ये है कि ट्रंप की #चीन और #पाकिस्तान को लेकर क्या रणनीति है?
क्योंकि #हिंद_महासागर में चीन की घेराबंदी के लिए भारत के बिना अमेरिका की कोई भी रणनीति अधूरी है. फिर भी अमेरिका ने ये फैसला किया है?
यहां याद रखने वाली बात ये है कि अमेरिका ने पाकिस्तान को #IRAN से संबंधित अपने सबसे बेहद जरूरी मसलों में भी साझीदार बनाये रखा है.
जब भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कोई बड़ा Symbolism बदलता है, तो उसके पीछे गहरे कूटनीतिक संदेश छिपे होते हैं. 'इंडो-पैसिफिक' से दोबारा 'पैसिफिक' कमांड पर लौटना निश्चित रूप से एक बड़ा नीतिगत बदलाव संकेत करता है.
तो क्या इसका मतलब यह है कि अमेरिका की नजर में भारत का महत्व खत्म हो गया है?
ये संशय और सवाल इसलिए क्योंकि जियो पॉलिटिक्स सिर्फ उतना नहीं होता जितना दिखाई देता है. यहां नेताओं के मुंह से निकले एक एक शब्द के कई मायने होते हैं.
इसीलिए 'इंडो-पैसिफिक कमांड' से 'इंडो' शब्द हटाने के भी कई मतलब हैं.
तो क्या भारत ये उम्मीद करे अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की जब वो आज ट्रंप से मिलेंगे तो यह स्पष्ट करेंगे ट्रंप के साथ कि यदि अमेरिका 'इंडो-पैसिफिक' के विचार से पीछे हटता है, तो भारत भी अमेरिकी प्राथमिकताओं जैसे दक्षिण चीन सागर में अपनी दिलचस्पी कम कर सकता है??
क्योंकि यह ट्रंप का यह कदम 'अमेरिका फर्स्ट' और सौदेबाजी वाली विदेश नीति का हिस्सा है, जहां वह हर रिश्ते की री-पैकेजिंग करना चाहते हैं. तो क्या मोदी जी भी भारत की अखंडता और संप्रभुता की ध्यान में रख कर अमेरिका के साथ अपने "निजी" रिश्तों की री पैकेजिंग करने की दृढ़ता दिखा पाएंगे ?

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