Ruby Arun

Tuesday, 17 March 2026

CAPFs यानी अर्धसैनिक बलों का शीर्ष नेतृत्व, कैडर आधारित ही क्यों होना चाहिए

 #CAPFs का शीर्ष नेतृत्व, कैडर आधारित ही क्यों होना चाहिए


? इसका जवाब आपको इस खबर में मिल जाएगा. 


अपने कैरियर का आधे से ज्यादा वक्त, मीटिंग्स, फाइल्स और अपने वातानुकूलित कार्यालय में बिता देने वाले #IPS हुक्मरानों ने आदेश निकाला है कि 

#WestBengal और #Assam के चुनावों में #BSF के जवान #हथियार नहीं बल्कि #लाठी लेकर तैनात होंगे.

#बीएसएफ के उन इलाकों के #IG की रिपोर्ट है कि #पश्चिम_बंगाल और #असम के हालात ठीक नहीं. बावजूद इसके अपने आलीशान कक्ष में सुरक्षित बैठे #BSF के महामहिम #DG जवानों को लाठी देकर चुनावी मैदान में भेज रहे हैं.

 

मान लिजिए कि किसी बात पर लोग भड़क जाएं, भीड़ उन्मादी हो जाए. बेकाबू भीड़ इन जवानों पर पत्थर, गोली, बम से हमला कर दे (जैसा कि अक्सर होता है):– ऐसे में #Paramilitary के जवान लाठी के भरोसे क्या करेंगे. घायल होंगे या अपनी जान गंवाएंगे?

और तब अपने अपने ऑफिस में बैठे यही अधिकारी एक बयान जारी कर देंगे कि

"स्थितियां अचानक बिगड़ गई, नियंत्रण से बाहर हो गई.इतना कह कर इनके कर्तव्यों की "इतिश्री" कर लेंगे.. 

पर जो चले जायेंगे, उनकी जवाबदेही कौन लेगा? जवाबदेही ले भी ली तो गया हुआ, वापस आ जायेगा क्या?


दरअसल, ये अधिकारी सिर्फ नैरेटिव बनाना और उसे कंट्रोल करना ही जानते हैं. कैडर से ना होने की वजह से उन्हें ग्राउंड रियलिटी और ग्राउंड कंट्रोल का कुछ भी अता पता ही नहीं. दो चार सालों के लिए डेप्युटेशन पर ड्यूटी पूरी करने की औपचारिकता के लिए आते हैं, इसलिए इनका अर्धसैनिक बलों के प्रति समर्पण या भावनात्मक लगाव भी कम ही होता है.

फिर भी इन्हें सीआईपीएफ के माथे पर बिठा दिया जाता है ताकि अपना  पॉलिटिकल नैरेटिव और एजेंडा, ट्विस्ट और कंट्रोल किया जा सके.


याद कीजिए #पुलवामा_हमला.

#CRPF के जवानों और कैडर के अधिकारियों ने ऊपर बैठे लोगों से बार बार ये गुहार लगाई थी कि स्थिति ठीक नहीं हैं. सड़क मार्ग से यात्रा करना खतरनाक है. जवानों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए विमान की जरूरत है.

पर इन्हीं सियासी लालफीताशाही से लिपटे उच्च अधिकारियों ने उनकी मांग अनसुनी कर, 40 जवानों को मौत के मुंह में धकेल दिया.


#अर्धसैनिक_बलों का #DG या #IG कैडर का होता है तो उसे फील्ड की दुश्वारियों, मुश्किलों का पता होता है. क्योंकि उसने खुद ही अपना पूरा कैरियर, जंगलों, पहाड़ों, रेगिस्तान, बर्फीले इलाकों में ड्यूटी कर के बिताया होता है. गोलियों और बमों का सामना किया होता है.

कैडर का होने की वजह से उसका कॉर्डिनेशन अपने जवानों के साथ बेहतर होता है. उसकी रणनीतिक कार्यशैली में चूक नहीं होती क्योंकि वो अपने बलों का सिस्टम बेहतरीन तरीके से समझता है, इसलिए उसका नेटवर्क सटीक होता है. मुश्किल वक्त में वो हालात के मुताबिक तुरंत जरूरी फैसले ले सकता है. उसे किसी का मोहताज नहीं होना पड़ता ये सुनने के लिए कि #जो_उचित_समझो_वो_करो...


इसलिए अब #मोदी_सरकार को चाहिए कि वो अर्धसैनिक बलों के शीर्ष प्रोन्नति तक का रास्ता साफ करे. बलों में #IPS डेप्युटेशन बंद करे और इस फैसले का #MastwrStroke लगा कर  "पहली बार" ऐसा करने का #Credit अपने माथे सजा ले...

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