Ruby Arun

Sunday, 15 March 2026

नाकाम विदेशनीति की वजह से आज भारतीय और भारत की अर्थव्यवस्था मुसीबत में


 


खाद्य सुरक्षा,मुद्रा का अवमूल्यन,राजकोषीय घाटा और सब्सिडी का बोझ आदि चुनौतियां देश के सामने खड़ी हो गई हैं.

ऊपर से एक अलग आफत ये कि #StraitOfHormuz के पहले से ही बंद होने की खबरों के बीच,अब #Yeman के #Huti विद्रोहियों ने #BabAlMandab Strait को भी ब्लॉक करने की धमकी दी है.
दुनिया की अर्थव्यवस्था की रगों में दौड़ने वाला 'खून' यानी तेल और व्यापार, इन्हीं दो संकरे समुद्री रास्तों से होकर गुजरता है.अगर ये दोनों रास्ते एक साथ प्रभावित होते हैं,तो यह केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं, बल्कि एक "वैश्विक आर्थिक आपदा" का रूप ले सकता है.
#भारत के लिए यह स्थिति बहुत बड़ी चुनौती होगी क्योंकि हमारी #अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा समुद्री व्यापार और खाड़ी देशों से आने वाले तेल पर टिका है.

जब तेल की कीमतें $70 से बढ़कर $110 के पार जाती हैं, तो सरकार का बजट बिगड़ जाता है.पैसा विकास कार्यों जैसे सड़क, स्कूल, अस्पताल से हटकर तेल का बिल चुकाने में चला जाता है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर #ईरान का भौगोलिक नियंत्रण है.वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20-30% यहीं से गुजरता है.और इसे बंद करने की धमकी उसकी सबसे बड़ी #Bargaining_chip रही है.

बाब अल-मंडेब,लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है. स्वेज नहर के माध्यम से यूरोप और एशिया के बीच होने वाला व्यापार इसी रास्ते पर निर्भर है.
हूतियों द्वारा इसे निशाना बनाने का मतलब है वैश्विक कंटेनर शिपिंग का ठप हो जाना.
ये दोनों रास्ते एक साथ बाधित होते हैं, तो इसके परिणाम भयावह हो सकते हैं.
कच्चे तेल की कीमतें रातों-रात $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, जिससे पूरी दुनिया में #Inflation का नया दौर शुरू हो जाएगा.
भारत #चीन और #जापान जैसे देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा का संकट पैदा हो जाएगा, जबकि यूरोप के लिए जरूरी सामानों की किल्लत हो जाएगी.

अगर बाब अल-मंडेब जैसा रास्ता बंद हो, तो अनाज की आवाजाही रुक जाती है, जिससे गरीब देशों में भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हो सकती है.
जैसा कि 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध में हुआ था. इस युद्ध ने ऊर्जा और अनाज के मार्ग बाधित किए, जिसका सबसे बुरा असर श्रीलंका और पाकिस्तान जैसी अर्थव्यवस्थाओं पर दिखा, जो दिवालिया होने की कगार पर पहुँच गईं.
1973 में जब अरब देशों ने तेल की आपूर्ति रोकी, तो दुनिया भर में मंदी आई. लेकिन अफ्रीकी और एशियाई देशों की जीडीपी ग्रोथ सालों तक रुकी रही.

इतिहास गवाह है कि जब भी ऊर्जा मार्गों पर संकट आया है,सबसे ज्यादा मार विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ती है.
जाहिर तौर पर #IRAN और #America#Israel के बीच जारी युद्ध अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है,जहां पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था दांव पर लग चुकी है.
और हम भारत के लोगों के लिए यह आपदा ऑलरेडी #LPGGasCylinder की भयंकर कमी के तौर पर आ चुकी है.

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