भारत के Operational Military Commands विदेशी राजनयिकों के लिए पर्यटन स्थल हैं क्या?
अमेरिकी राजदूत #सर्जियो_गोर को #Western_Command में प्रवेश की अनुमति देना हमारी #Strategic_Autonomy के साथ एक हैरान कर देने वाला और भारत की संप्रभुता से बेहद खतरनाक समझौता
है.
जहां बेहद गोपनीय तरीके से राष्ट्रीय सुरक्षा की योजना बनती है वहां एक विदेशी राजनयिक को अभूतपूर्व तरीके से भारत सरकार आदर सहित पहुंचा रही है. क्यों? क्या दबाव है? क्या साजिश है? किस बात का प्रलोभन है?
यह बात बेहद चिंताजनक इसलिए भी है कि भारत में अमेरिका के राजदूत #Sergio_Gor के पास न केवल भारत,बल्कि #पाकिस्तान और पूरे दक्षिण और मध्य एशिया की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है.
पाकिस्तान के लिए उत्तरी कमान भारतीय सेना की वह "फौलादी दीवार" है जो उसके कश्मीर एजेंडे को सफल नहीं होने देती है.
#Sergio_Gor के पास पाकिस्तान के अलावा अफगानिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और मध्य एशियाई देशों के साथ अमेरिका के संबंधों की देखरेख और समन्वय करते हैं. ऐसे व्यक्ति को देश के सबसे अहम और सबसे गोपनीय रक्षा कमांड की सैर कराना, महज मनोरंजन और आतिथ्य तो हो नहीं सकता?
भारतीय सेना की उधमपुर स्थित #Northern_Command पाकिस्तान के साथ भारत के सुरक्षा समीकरणों में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. यह कमान न केवल रक्षा करती है, बल्कि रणनीतिक रूप से पाकिस्तान की हर चाल का जवाब देने वाला मुख्य केंद्र है.
उत्तरी कमान के पास लगभग 740 किलोमीटर लंबी #LoC की सुरक्षा की जिम्मेदारी है. यह वह क्षेत्र है जहाँ #पाकिस्तान के साथ सबसे अधिक संघर्ष होता है.
आतंकवादियों की सीमा पार से घुसपैठ को रोकना,पाकिस्तान द्वारा किए जाने वाले किसी भी युद्धविराम उल्लंघन का मुंहतोड़ जवाब उत्तरी कमान की ही जिम्मेदारी है.
रणनीतिक रूप से #उत्तरी_कमान ही #Siachen को नियंत्रित करती है, जो पाकिस्तान और चीन के बीच एक "दीवार" की तरह काम करता है.
यदि भारत यहां से हटता है या जरा सी भी चूक होती है तो पाकिस्तान और #चीन की सेनाएं Point NJ9842 के पार सीधे जुड़ सकती हैं. जो #लद्दाख और #कश्मीर के लिए बहुत बड़ा खतरा हो सकता है.
पाकिस्तान की सीमाओं के भीतर किए गए बड़े ऑपरेशन्स इसी कमान के तहत नियोजित हुए थे:
2016 का #Surgical_Strike.
#उरी हमले के बाद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर #PoK में आतंकी लॉन्च पैड्स को नष्ट करना.
#बालाकोट_एयरस्ट्राइक के समय वायुसेना के ऑपरेशन के दौरान जमीनी स्तर पर सुरक्षा और तैयारी को बनाए रखने का काम भी इसी Northern Command ने किया था.
पाकिस्तान के #Proxy_War को विफल करने में इसी कमान की राष्ट्रीय राइफल्स #RR की सबसे बड़ी भूमिका थी.
सोचिए कि एक ऐसी जगह जो भारत की सुरक्षा, संप्रभुता, अखंडता और एकता को बनाए रखने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है, वहां उस अमेरिकी देश के राजनयिक को तफरीह करने भेज दिया जाता है, जिसका राष्ट्रपति व्यापार के नाम पर भारत को ब्लैकमेल करता है. जो भारत के दुश्मन देश पाकिस्तान को अपने पाले में लिए घूमता है और भारत में ऐसे व्यक्ति को राजदूत बनाता है जिसको पाकिस्तान की भी जिम्मेदारी दिए हुए होता है...
मोदी जी ये आपका वाला #संयोग नहीं है #DonaldTrump का अपने देश के खिलाफ #प्रयोग है....
#अमेरिका सिर्फ #भारत के बाजार और आर्थिक मोर्चे पर ही नहीं बल्कि भारत की ऊर्जा और रक्षा पर भी शिकंजा कस रहा है ...
पहले तो #America ने #TradeDeal में कुछ रियायतों के बदले भारत पर #रूसी तेल की खरीद कम करने का दबाव बनाया.
अब अमेरिका, भारतीय सेना और हथियारों पर अपना प्रभुत्व दिखाने की कोशिश करते हुए भारत को रूस से दूर करने की कोशिश कर रहा है. अमेरिका ने अनऑफिशियली भारत सरकार को निर्देश दे दिया है कि भारत #Russia से हथियार ना खरीद कर अमेरिका के साथ हथियारों का सौदा करे.
भारत में अमेरिका के नए राजदूत #SergioGor का #चंडीगढ़ स्थित भारतीय थलसेना के #Western_Command मुख्यालय पहुंचना और AH-64E #Apache लड़ाकू हेलीकॉप्टर केंद्र का दौरा करना, अमेरिका द्वारा भारत पर नए हथियार सौदों के लिए दबाव बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है.
अमेरिका चाहता है कि भारत की सैन्य शक्ति का 60-70% हिस्सा जो रूस पर निर्भर है,अमेरिका, फ्रांस, इजरायल की ओर शिफ्ट हो जाए.
भारत,समुद्री और सीमा सुरक्षा के नाम पर अमेरिका से 31 'हंटर-किलर' ड्रोन MQ-9B प्रीडेटर, खरीदने की प्रक्रिया में है. जिसका फायदा अंततः अमेरिका की ही होगा क्योंकि #Indo_Pacific क्षेत्र से अमरीका #China की निगरानी करना चाहता है. यह अमेरिका की 2026 की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति के डिफेंस ऑथोराइजेशन एक्ट का हिस्सा है.
अमेरिका ने भारत को MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन, जेट इंजन की तकनीक, और यहाँ तक कि F-35 जैसे एडवांस विमानों की खरीद करने की लिस्ट पकड़ा दी है.
अमेरिका की तिलमिलाहट, भारत और रूस के बीच S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली का सौदे से भी है.
जब तुर्की ने #रूस से S-400 खरीदा था तो अमेरिका ने उस पर प्रतिबंध लगा दिए और उसे F-35 कार्यक्रम से बाहर कर दिया. क्योंकि अमेरिका के पास #CAATSA यानी Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act नाम का एक कानून है. इसके तहत जो भी देश रूस से बड़े हथियार जैसे S-400 मिसाइल सिस्टम खरीदता है, उस पर अमेरिका प्रतिबंध लगा सकता है.
रूसी हथियार वर्षों से और आज भी भारतीय सेना की रीढ़ हैं. भारतीय सेना 70 फीसदी रशियन हथियारों पर ही निर्भर है. चाहे वो #AK-203 असॉल्ट राइफलें हों.#S_400_Triumf मिसाइल सिस्टम हो, भारतीय नौसेना का #Talwar_class_Frigates #IN_Tushil #INS_Tamal हो,
#Sukhoi_Su_30_MKI हो, #BrahMos हो या की ड्रोन और जेट इंजन, टैंक, राइफल,एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल हों या फिर #DRDO.
सभी दशकों से रूस के सहयोग से ही पनपे हैं और ये रक्षा संबंध समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं.
लेकिन कोई बड़ी बात नहीं कि जिस तरह से रूसी तेल के मसले पर #ट्रेड_डील में अमेरिका ने भारत पर पहले भारी भरकम #Tarrif लगा कर ब्लैकमेल किया, वैसा ही #CAATSA की आड़ में हथियारों के सौदे में भी,ना कर बैठे.
अगर ऐसा हुआ तो यह भारत की सुरक्षा और भारतीय सेना की मजबूती के साथ बहुत ही बड़ा खिलवाड़ होगा.
पर बात वही है ना कि
#Surrender है तो #मुमकिन है..


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