Ruby Arun

Tuesday, 3 February 2026

ये "फादर ऑफ ऑल डील्स" नहीं बल्कि #Father Of #Kneel है ...

 ये "फादर ऑफ ऑल डील्स" नहीं बल्कि #Father Of #Kneel है ...

यह भारत के #किसानों पर प्रहार है.

हमारी सरकार ने #Donald_Trump के आगे घुटने टेक दिए हैं. 

आखिर कौन से ऐसे दबाव या ब्लैकमेलिंग का इस्तेमाल ट्रंप ने किया कि देश का नुकसान करके भी जश्न मनाया जा रहा है. मोदी जी को जीत की फूल मालाएं पहनाई जा रही हैं . 

प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका से $500 अरब के ऊर्जा, तकनीक और रक्षा उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है.

इतनी बड़ी मात्रा में आयात करने से भारत का व्यापार संतुलन #Balance_of_Trade अमेरिका के पक्ष में झुक जाएगा. देश का व्यापार घाटा बढ़ जाएगा. 

इस डील से हमारे किसानों,भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र में बड़े नुकसान होंगे.

अमेरिका ने अपने कृषि उत्पादों जैसे बादाम, फल और डेयरी उत्पाद के लिए भारत के बाजार तक #जीरो_टैरिफ या बहुत कम टैरिफ पर पहुंच मांगी है. जबकि भारत पर 18 फीसदी टैरिफ लगेगा.

इससे क्या होगा कि अमेरिकी सब्सिडी वाले सस्ते कृषि उत्पाद भारतीय बाजारों में भर जायेंगे. ऐसे में स्थानीय किसानों और दूध उत्पादकों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा.

भारत का डेयरी मॉडल #Co_operatives पर आधारित है, भारत का डेयरी क्षेत्र लाखों छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका का आधार है, जबकि अमेरिकी डेयरी उद्योग 'इंडस्ट्रियल फार्मिंग' यानी #Mega_Farm पर आधारित है.

अमेरिका से सस्ते मिल्क पाउडर, चीज और अन्य डेयरी उत्पादों के आयात से 'अमूल' जैसे सहकारी मॉडल्स,ग्रामीण पशुपालकों और ग्रामीण रोजगार पर बहुत बुरा असर होगा .

 

अमेरिका दुनिया के उन देशों में से है जो अपने किसानों को सबसे अधिक सब्सिडी लगभग $1.5 ट्रिलियन देता है.

सब्सिडी के कारण अमेरिकी कृषि उत्पाद जैसे मक्का, सोयाबीन और फल बहुत सस्ते होते हैं.

यदि भारत इन पर टैरिफ को 'जीरो' करता है, तो भारतीय बाजार इन सस्ते उत्पादों से भर जाएगा, जिससे भारतीय किसानों की फसल या तो पड़ी पड़ी सड़ जाएगी या उन्हें अपनी फसल की सही कीमत नहीं मिल पाएगी.

हिमाचल के सेब उत्पादकों से लेकर महाराष्ट्र के दाल उत्पादकों तक का बाजार प्रभावित होगा.


अमेरिकी ऊर्जा जैसे LNG, कोयला और अमेरिकी तकनीक पर भारत की अत्यधिक निर्भरता भविष्य में भारत के लिए जोखिम भरी हो जाएगी.

"चीन के विकल्प" के रूप में अमेरिका के लिए भारत के पेश होने के परिणामस्वरूप भारत-चीन सीमा और व्यापारिक रिश्तों में कड़वाहट बढ़ेगी. 


अमेरिका के दबाव में रूस से व्यापार बंद करने से रूस के साथ कूटनीतिक संबंधों में भी नकारात्मक बदलाव होगा.

रूस से सस्ता तेल मिलना बंद होने से भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ेगा.

भारत के लिए रूस से पूरी तरह नाता तोड़ना और टैरिफ को शून्य करना चुनौतीपूर्ण होगा, इसलिए आने वाले हफ्तों में इस डील की बारीकि


याँ और स्पष्ट होंगी.


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