Ruby Arun

Thursday, 5 February 2026

#EpsteinFiles:- क्या #Digital_India की आड़ में दुनिया के क्रूरतम सेक्स अपराधी को मिल रही थी भारत में वीआईपी एक्सेस?

 

#EpsteinFiles:- क्या #Digital_India की आड़ में दुनिया के क्रूरतम सेक्स अपराधी को मिल रही थी भारत में वीआईपी एक्सेस?






केंद्रीय मंत्री #HardeepSinghPuri की इसमें क्या भूमिका थी?
हाल ही में सामने आए #EpsteinFiles के दस्तावेज बताते हैं कि किस तरह एक सजायाफ्ता अंतरराष्ट्रीय अपराधी को भारतीय कूटनीतिक तंत्र तक का रास्ता दिया गया.
24 अक्टूबर 2014 को #Jeffry_Epstein –जिसे 2008 में ही नाबालिगों की सेक्स ट्रैफिकिंग का दोषी ठहराया जा चुका था—उसने तत्कालीन भाजपा सदस्य और पूर्व राजनयिक हरदीप पुरी को ईमेल किया– "मेरी असिस्टेंट को भारत के लिए तुरंत वीजा चाहिए"
एक रिटायर हो चुके अधिकारी और तत्कालीन भाजपा नेता ने अपनी पूरी राजनीतिक और कूटनीतिक ताकत झोंक दी. #हरदीप_सिंह_पूरी ने रिटायर्ड राजदूत प्रमोद कुमार बजाज और न्यूयॉर्क के संपर्कों को ईमेल कर निर्देश दिए कि एपस्टीन का काम "प्रायोरिटी" पर हो.
2013 में हरदीप पुरी IFS से रिटायर होते हैं,जनवरी 2014 में वह #BJP में शामिल होते हैं और अक्टूबर 2014 में एक सजायाफ्ता अपराधी के लिए 'वीजा सर्विस' का जरिया बनते हैं.
2008 में ही एपस्टीन के 'पीडोफाइल' और 'यौन तस्कर' होने की खबर पूरी दुनिया को थी. क्या हरदीप पुरी जैसे अनुभवी पूर्व राजनयिक और भाजपा नेता के तौर पर वे नहीं जानते थे कि एपस्टीन कौन है?
राजनीति में कुछ भी मुफ्त नहीं होता. हरदीप पुरी ने एपस्टीन के लिए अपनी सारी हदें पार कीं, तो सवाल उठता है कि इसके बदले में उन्हें क्या हासिल हुआ? एपस्टीन का ऐसा कौन सा 'एहसान' था जिसे चुकाने की उन्हें इतनी बेताबी थी?
हरदीप सिंह पुरी ने बाद में सफाई दी थी कि Epstein से उनकी बातचीत 'डिजिटल इंडिया' को लेकर थी.
सवाल यह है कि एक यौन अपराधी भारत के इतने महत्वपूर्ण मिशन में किस हैसियत से सलाह दे रहा था? क्या डिजिटल इंडिया को एक अपराधी के इनपुट की जरूरत थी?
13 नवंबर 2014 को भेजे गए ईमेल में हरदीप सिंह पुरी ने #जेफरी_एपस्टीन और #Reed_Hoffman को भारत में इंटरनेट आधारित आर्थिक गतिविधियों, 'डिजिटल इंडिया' और सॉफ्टबैंक जैसे बड़े निवेशों के बारे में विस्तार से बताया था.
3 अक्टूबर 2014 को उनकी रीड हॉफमैन के साथ सिलिकॉन वैली में बातचीत हुई थी, जिसके बारे में उन्होंने एपस्टीन को जानकारी दी थी.

एक केंद्रीय मंत्री का नाम अंतरराष्ट्रीय सेक्स स्कैंडल से जुड़े व्यक्ति के साथ जुड़ना केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि का मामला है या नहीं.फिर भी मोदी सरकार ने इस पर मुंह में दही जमा रखा है? भारत के मान,सम्मान,स्वाभिमान की प्रधानमंत्री को कोई परवाह ही नहीं?

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