#अमेरिका के साथ जो #TradeDeal हुई है, उसका खाका दरअसल 2023 जून– जुलाई में ही तैयार हो चुका था.
तब से अब तक बस "घुड़की" देने का खेल चल रहा था.और भारत के प्रधानमंत्री ने अपनी ज़बान सिल रखी थी/रखी है.…
#DonaldTrump ने यहां हमारे देश को #मोहरा बनाया.
वे भारत के जरिए #Russia के तेल व्यापार को झटका देना चाहते थे और "भारत" को ही #प्यादा बना कर भारत की सरकार पर अपनी "गिरफ्त" का दम खम #Putin को दिखाना चाहते थे.
इस 2023 के इस वीडियो में U.S. State Department में Assistant Secretary #S_Paul_Kapur का दावा सुनिए....
#भारत वही कर रहा है,जो हम चाहते थे..
और उन्होंने ये दावा यूएस हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी की एक सुनवाई में अमेरिकन राजनीतिज्ञ Keith Self के सवाल "भारत ने कथित तौर पर रूसी तेल के आयात को बंद करने का वादा किया है, लेकिन अमेरिका इसे कैसे enforce करेगा?" के जवाब में ये बात कही थी.
S. Paul Kapur बता रहे हैं कि किस तरह भारत, रूसी तेल की अपनी खरीद को धीरे धीरे कम करेगा और अमेरिकी ऊर्जा अधिक खरीदेगा...
#Chronology पर गौर कीजिए..
की कैसे भारत ने पहले #रूस से तेल आयात का अनुबंध किया. फिर अमेरिका के सामने "सरेंडर" कर के अमेरिकी शर्तों पर ही #ट्रेड_डील कर लिया और रूस से तेल मंगाने की प्रक्रिया बिल्कुल ही धीमी कर दी...
अब भारत, अमेरिका की मर्जी पर निर्भर है. रूस से सम्बन्धों में कड़वाहट आ चुकी है.
#China को रूस से तेल ग्लोबल मार्केट रेट से काफी कम कीमत पर मिल रहा है. इससे चीन का "इम्पोर्ट बिल" कम हो रहा है और उसकी अर्थव्यवस्था को राहत मिल रही है. रूस और चीन के बीच तेल का ज्यादातर व्यापार अब युआन #Yuan और #Ruble में हो रहा है.
इससे चीन को अमेरिकी $ की जरूरत कम पड़ रही है.यह चीन की करेंसी 'युआन' को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने में मदद कर रहा है.
चीन सिर्फ #Crude_Oil ही नहीं खरीद रहा बल्कि उसे रिफाइन करके दूसरे देशों को ऊंचे दामों पर बेचकर मुनाफा भी कमा रहा है.
रूस से तेल खरीदकर चीन एक तरह से रूस की अर्थव्यवस्था को भी सहारा दे रहा है.इससे दोनों देशों के बीच दोस्ती और मजबूत हुई है.
अमेरिका और पश्चिमी देशों के खिलाफ चीन को एक मजबूत और परमाणु संपन्न साथी का साथ मिल रहा है.
पहली बात तो ये कि
भारत के लिए यह बेहद चिंता का विषय है क्योंकि चीन हमारा प्रतिद्वंदी है.
रूस का पूरी तरह चीन के खेमे में जाना भारत के पुराने और भरोसेमंद रक्षा संबंधों के लिए बिल्कुल ही अच्छा नहीं है.
दूसरी बात
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% तेल आयात करता है. अगर भारत रूसी तेल का कम आयात करेगा तो भारत को फिर से #Middle_East या अमेरिका पर निर्भर होना पड़ेगा. दूसरे देशों से तेल खरीदना रूसी तेल के मुकाबले ज्यादा महंगा है. इस वजह से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें और महंगाई बढ़ेगी.
पर मोदी जी को इससे क्या ही फर्क पड़ना है. महंगाई बढ़ेगी तो आपकी हमारी जेब कटेगी. मोदी जो को तो बाद अमेरिका को खुश रखने जरूरत है, वरना जाने कौन सी फाइल खुल जाएगी...
इसलिये
#जनहित से बेहतर #स्वहित 🤐
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