"जब डॉ मनमोहन सिंह थे तो #भारत, अमेरिका को लूटता था. जब नरेंद्र मोदी हैं तो #अमेरिका, भारत को लूट रहा है."
ये जो #Trump कह रहे हैं न कि #भारत हमें "लूट" रहा था. ये स्वर्गीय प्रधानमंत्री #मनमोहन_सिंह की बात कर रहा है. जब भारत, डॉ मनमोहन सिंह के 2004 से 2014 के कार्यकाल में #America को 3 फीसदी से भी कम यानि महज 2.93% ही #Tarrif देता था.
वो #टैरिफ आज मोदी जी की मेहरबानी से 18% और स्टील और एल्युमीनियम में 15% से 25% या उससे भी अधिक हो गए हैं…
डॉ मनमोहन सिंह द्वारा किए गए रणनीतिक सुधारों,बेहतर कूटनीतिक संबंधों और वैश्विक व्यापार नियमों के तहत ये #मुमकिन हुआ था.
और सबसे मजे की बात ये कि मनमोहन सिंह सरकार और अमेरिका के बीच कोई ऐसा औपचारिक व्यापार समझौता #FTA नहीं हुआ था जिसमें मोदी सरकार की तरह #टैरिफ की कोई "लिखित" शर्त हो.
यह 2.93% का आंकड़ा अमेरिका द्वारा 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' #MFN के तहत दी जाने वाली सामान्य दरों का परिणाम था.
भारत में #UPA वन और UPA टू मनमोहन सिंह की सरकार में विशेषकर 2008 की ऐतिहासिक भारत-अमेरिका सिविल न्यूक्लियर डील के बाद भारत अमेरिका के #GSP यानी Generalized System of Preferences कार्यक्रम का भी लाभार्थी था,जिससे कई भारतीय उत्पादों पर शून्य या बहुत कम ड्यूटी लगती थी.
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