#CAPF एडमिनिस्ट्रेटिव बिल के खिलाफ #CAPFs अधिकारियों के पत्नी बच्चे #जंतर_मंतर पर..
गृह मंत्री @AmitShah आज राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल विधेयक पेश करेंगे, जिसमें #IG स्तर पर #IPS अधिकारियों की नियुक्ति के नियम तय होंगे. बिल में #आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति पर 50 प्रतिशत सीमा रखी गई है, जबकि #SupremeCourt ने आदेश दिया था कि #अर्धसैनिक_बलों में डेप्युटेशन के जरिए IPS नियुक्ति 2 वर्षों में कम किया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा #ParaMilitry कैडर अधिकारियों को बलों में उच्च पदों तक प्रमोशन मिले.
जबकि #मोदी_सरकार के द्वारा पेश किए जाने वाले विधेयक में कहा गया है कि केंद्र सरकार के पास इस मामले में कोर्ट के आदेशों से हटकर नए नियम बनाने का अधिकार होगा.
बिल में प्रावधान किया गया है कि इन बलों का मुखिया यानि #DG, आईपीएस अधिकारी ही बनेगा.
#ADG के पद पर कम से कम 67 फीसदी नियुक्ति आईपीएस अधिकारियों की होगी.
#आईजी स्तर के पदों पर 50 फीसदी नियुक्ति आईपीएस अधिकारियों में से की जाएगी.
वर्तमान व्यवस्था में भी DG के पद पर आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति होती है.
एडीजी स्तर पर 67 % और आईजी स्तर पर 50% अधिकारियों की नियुक्ति आईपीएस से की जाती है.
CAPF बनाम IPS विवाद की सबसे बड़ी वजह यही है.
#पैरामिलिट्री फोर्सेज के अधिकारी और IPS दोनों का ही चयन #UPSC के ही माध्यम से होता है. फिर भी एक IPS अधिकारी आमतौर पर 13-14 साल की सेवा में DIG रैंक तक पहुच जाता है. वहीं, CAPF के कैडर अधिकारी को उसी DIG रैंक तक पहुंचने में 25 से 30 साल लग जाते हैं.
एक CAPF में एक असिस्टेंट कमांडेंट को 13–14 सालों तक भी कोई प्रमोशन नहीं मिलता जबकि इतने ही वक्त में एक IPS अधिकारी को 2 बार प्रोन्नति मिल चुकी होती है.
प्रोन्नति की इस विसंगति की वजह से अर्धसैनिक बलो में बेहद क्षोभ और असंतोष का माहौल है.
पिछले 3 सालों में इस वजह से CAPF के 20 हजार से ज्यादा जवानों और अधिकारियों ने #VRS ले लिया है या इस्तीफा दे दिया है.
#NFFU #OGAS
#CRPF #BSF #CISF #ASSAMRIFLES #CoBRA #SSB #ITBP
#संसद_पैरामिलिट्री_बचाओ
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