इजरायल में ज्यूयिश-अरब राजनीतिक साझेदारी
को लेकर जनता और राजनीतिक दलों के बीच गहरा विभाजन देखा जा रहा है.
Knesset Election के बाद, Liberal Jews, Left-wing कार्यकर्ता, और इजरायल के अरब –फिलीस्तीनी मूल के– नागरिक मिलकर ज्यूयिश-अरब साझेदारी वाली सरकार बनाने का पुरजोर समर्थन कर रहे हैं.
तेल अवीव के मेसिला पार्क, यरुशलम के पेरिस स्क्वायर और हाइफा के यूनेस्को स्क्वायर जैसे प्रमुख स्थानों पर सैकड़ों नागरिक सड़कों पर उतर आए हैं.
ये मुख्य रूप से इजरायल के युवा, छात्र, मानवाधिकार कार्यकर्ता और शहरों में रहने वाले वो यहूदी व अरब नागरिक हैं जो लंबे समय से चल रहे युद्ध और आंतरिक सामाजिक टकराव से तंग आ चुके हैं.
इजरायल में हुए आम चुनावों के परिणाम में किसी भी मुख्य राजनीतिक ब्लॉक को सरकार बनाने के लिए स्पष्ट बहुमत –61 सीटें–नहीं मिली हैं. इस चुनाव में बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाला ब्लॉक और गादी ईसेनकोट वगैरह की विपक्षी पार्टियां दोनों ही बहुमत से पीछे रह गए हैं, जबकि Arab Palestinian-Israeli दलों ने चुनाव में उल्लेखनीय बढ़त हासिल की है और वे 'किंगमेकर' की स्थिति में हैं.
इजरायल की कुल आबादी का करीब 20% हिस्सा अरब –मुस्लिम और ईसाई– नागरिकों का है. इस चुनाव में इन लोगों ने रिकॉर्ड संख्या में मतदान किया है, जिससे उनकी प्रमुख पार्टियों - Ra'am और Joint List को बड़ी बढ़त मिली है.
Ra'am इजरायली व्यवस्था के भीतर रहकर नागरिक अधिकारों, विकास और अपराध को खत्म करने के लिए सरकार में शामिल होना चाहता है.
यूसुफ जबारेन की ज्वाइंट लिस्ट गुट के समर्थक चाहते हैं कि देश से 'नस्लवाद और बहिष्कार की राजनीति' खत्म हो और यहूदियों व अरबों के बीच एक वास्तविक और समान अधिकार वाली साझेदारी बने.
इस विचारधारा के समर्थक "नो मोर डिवाइड एंड रूल" और "केवल साझेदारी ही बदलाव लाएगी" जैसे बैनर लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.
इजरायल की राजनीति का यह मोड़ ऐतिहासिक हो सकता है, क्योंकि यदि यहूदी और अरब दल मिलकर सरकार बनाने में सफल होते हैं, तो यह इजरायल के इतिहास में एक बड़ा वैचारिक और राजनीतिक बदलाव होगा.
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