Ruby Arun

Wednesday, 19 August 2026

एक शार्क, जो 99 दिनों के भीतर 11,100 किलोमीटर तैरकर दक्षिण अफ्रीका से ऑस्ट्रेलिया के तट पर पहुँच गई थी.


 यह एक बेहद मशहूर और ऐतिहासिक Marine Biology Discovery से जुड़ी खबर है. 

एक शार्क, जिसका नाम निकोल रखा गया था, वह 99 दिनों के भीतर 11,100 किलोमीटर तैरकर दक्षिण अफ्रीका से ऑस्ट्रेलिया के तट पर पहुँच गई थी.

इतिहास में पहली बार Great White Shark के इतने लंबे और तेज़ Transoceanic सफर का ट्रैक रिकॉर्ड दर्ज किया गया था.

यह घटना साल 11 दिसंबर 2003 से 28 फरवरी 2004 की है.

7 नवंबर 2003 को वैज्ञानिकों जैसे Dr. Ramón Bonfil ने दक्षिण अफ्रीका के पास निकोल की पीठ पर एक इलेक्ट्रॉनिक 'पॉप-अप' सैटेलाइट टैग लगाया था.

चौंकाने वाली बात यह थी कि ऑस्ट्रेलिया में टैग अलग होने के कुछ महीनों बाद अगस्त 2004 में, वैज्ञानिकों ने उसकी फिन के निशानों से उसे वापस दक्षिण अफ्रीका के तट पर पहचाना.

निकोल ने कुल मिलाकर 9 महीने से कम समय में 20,000+ किलोमीटर की यात्रा पूरी की—जो कि किसी भी समुद्री जीव द्वारा दर्ज की गई सबसे तेज़ Return Migration का वर्ल्ड रिकॉर्ड है.

यात्रा के दौरान निकोल अधिकांश समय समुद्र की सतह के पास तैर रही थी, जिससे वैज्ञानिकों का मानना है कि उसने दिशा तय करने के लिए Celestial Navigation यानी तारों या चांद का सहारा लिया होगा. 

इस खोज ने साबित किया कि अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया की शार्क आबादी आपस में जुड़ी हुई है और शार्क खुले महासागरों में बहुत दूर तक सफर कर सकती हैं.

Mount Everest की चोटियों से शवों के निकलने का सिलसिला जारी


 Global Warming और बर्फ पिघलने के कारण Mount Everest पर दशकों पुराने शव और अवशेष लगातार सतह पर आ रहे हैं.

बेस कैंप और खुंबू आइसफॉल के पास लगभग 5,300 मीटर की ऊंचाई पर दशकों पुराने मानव अवशेष और हड्डियां सतह पर उभर रही हैं.

नेपाल सेना हर साल Mountain Cleanup Campaign चलाती है.इस अभियान के तहत सेना की विशेष टीमें और अनुभवी शेरपा न सिर्फ पहाड़ों से टन-बाय-टन कचरा नीचे लाते हैं, बल्कि बर्फ पिघलने से बाहर आए पर्वतारोहियों के शवों और कंकालों को भी सुरक्षित नीचे लाते हैं. हाल के अभियानों में एवरेस्ट और आसपास की चोटियों से कई शवों को निकालकर डीएनए/फॉरेंसिक जांच के लिए काठमांडू भेजा गया है.

माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की शुरुआत से लेकर अब तक 300 से अधिक पर्वतारोहियों की जान जा चुकी है.

इनमें से 200 से ज्यादा शव अभी भी पहाड़ पर ही जमे हुए हैं.

-30°C से नीचे और सूखी हवा के कारण ये शव खराब नहीं होते, बल्कि Mummified स्थिति में बिल्कुल सुरक्षित रहते हैं.

जमे हुए शरीर का वजन बर्फ जमा होने के कारण 100-120 किलो तक हो जाता है. एक शव को नीचे लाने में 8 से 10 शेरपाओं की जान जोखिम में पड़ती है और लाखों रुपये का खर्च आता है.

पहाड़ पर उच्च ऊंचाई डेथ ज़ोन डेथ ज़ोन जो 8,000 मीटर की ऊंचाई पर है, वहां ऑक्सीजन बहुत कम होता है.

वहां से किसी शव को खींच कर जानलेवा हो सकता है. इसलिए कुछ शव Green Boots दशकों से वहीं जमे हुए हैं.

Donald Trump tried to have oral s*x with a microphone on the campaign trail! —Jennifer Welch


"Donald Trump tried to have oral s*x with a microphone on the campaign trail!"

—Jennifer Welch

This clip from CNN's show "NewsNight with Abby Phillip" during the US presidential election campaign in November 2024 is going viral again.

The reason is the ongoing debate in the US regarding Donald Trump's age, behavior, and mental health...

Democratic Party leaders, sections of the media, and some medical experts claim that he is not mentally fit to hold office.

Democrats and critics say that Trump engages in long, rambling speeches, mispronounces words, and exhibits strange behavior and gestures on stage. They argue he is not fully mentally fit to assume the office of the President of the United States.

This conversation between Scott Jennings and Jennifer Welch centered around Trump's speech in Milwaukee on November 1, 2024, where he made unnatural gestures on stage when the microphone stand malfunctioned.

It was over this incident that the debate took place on the panel between progressive political podcaster Jennifer Welch and Republican strategist Scott Jennings.

At that time, Jennifer Welch had stated that "Donald Trump is mentally unfit."

Sunday, 16 August 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपनी रक्षा नीति में बड़ा बदलाव करने का ऐलान किया है.


डोनाल्ड ट्रंप ने अपने रक्षा मंत्री Pete Hegseth को आदेश दिया है कि साउथ कोरिया के साथ होने वाले आगामी संयुक्त सैन्य अभ्यासों को तुरंत और काफी हद तक कम किया जाए.

ट्रंप ने कहा कि उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ उनके संबंध बहुत अच्छे हैं. उनका मानना है कि इस तरह के बड़े सैन्य अभ्यास न केवल बहुत महंगे हैं, बल्कि उत्तर कोरिया के लिए एक अनावश्यक और hostile संदेश भेजते हैं.


दरअसल,रूस और उत्तर कोरिया का मजबूत होता गठबंधन डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ी रणनीतिक और कूटनीतिक सिरदर्दी बन चुका है.

उत्तर कोरिया और रूस के करीब आने और चीन के बैकअप से पूर्वी एशिया में एक नया विरोधी मोर्चा बन गया है. इससे अमेरिका की स्थिति ,एशिया में कमजोर पड़ रही है.


ट्रंप दक्षिण कोरिया के साथ तनाव दिखाकर और किम जोंग उन को सार्वजनिक तारीफ भेजकर इस समीकरण बदलने का प्रयास कर रहे हैं.लेकिन वास्तविकता यह है कि रूस के समर्थन के कारण उत्तर कोरिया पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक और बातचीत के मामले में सख्त हो चुका है.

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ट्रंप के पहले कार्यकाल का मुख्य लक्ष्य उत्तर कोरिया को अपने परमाणु हथियार छोड़ने पर सहमत करना था.लेकिन अब जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, उत्तर कोरिया को आर्थिक मदद, तेल, और उन्नत सैन्य तकनीक मुहैया करा रहा है, तो किम जोंग उन को अमेरिका से पाबंदियां हटाने की गुहार लगाने या बातचीत की मेज पर झुकने की कोई जरूरत नहीं बची है.

ट्रंप अक्सर दावा करते हैं कि वे व्यक्तिगत संबंधों के दम पर किम के साथ सौदा कर सकते हैं.लेकिन रूस के साथ हुए Comprehensive Strategic Partnership के बाद उत्तर कोरिया की स्थिति काफी मजबूत हो चुकी है. किम अब ट्रंप को कोई आसान कूटनीतिक जीत नहीं देना चाहते.

ट्रंप को लगता है कि अगर अमेरिका दक्षिण कोरिया में अपनी आक्रामक सैन्य उपस्थिति को थोड़ा कम करता है, तो उत्तर कोरिया को रूस के पाले में पूरी तरह जाने से रोका जा सकता है या किम को वापस अमेरिका अपने टेबल पर ला सकता है.


लेकिन ट्रंप का यह "नरम दांव" या सैन्य दबाव कम करने का निर्णय किम जोंग उन को रूस के पाले से वापस नहीं खींच पाएगा. यह अमेरिका की कमजोरी के रूप में देखा जा सकता है, जिससे उत्तर कोरिया आने वाले समय में कूटनीतिक जीत हासिल करने के लिए और ज्यादा आक्रामक शर्तें रखेगा.

क्योंकि किम के लिए अब व्लादिमीर पुतिन एक बहुत बेहतर साझेदार बन चुके हैं.

Monday, 10 August 2026

North Korea के तानाशाह किम जोंग उन की ‘ग़ुलाम ब्रिगेड’:–रूस की फ़ैक्टरियों में उत्तर कोरियाई महिलाओं का ख़ौफ़नाक सौदा...


रूस में यूक्रेन युद्ध और प्रतिबंधों के कारण पैदा हुई मजदूरों की किल्लत को पूरा करने के लिए रूस की असेंबली लाइनों, कपड़ा फ़ैक्टरियों,खेतों, कारखानों,निर्माण स्थलों और किचनों में इन दिनों उत्तर कोरियाई महिलाओं की ब्रिगेड चुपचाप तैनात की जा रही है.उत्तर कोरिया से हजारों महिलाओं और पुरुषों को रूस के गारमेंट  में काम करने भेजा जा रहा है.

रूस पहुंचते ही उत्तर कोरियाई अधिकारी इन श्रमिकों के पासपोर्ट और दस्तावेज जब्त कर लेते हैं, ताकि वे भाग न सकें.

उत्तर कोरियाई महिलाओं को प्रति घंटे महज 480 रूबल मतलब भारतीय रुपए के हिसाब 550 रुपए ही दिये जाते हैं. और 24 घंटे इनकी निगरानी की जाति है. इनसे 12 से 16 घंटे मजदूरी कराई जाती है. काम के बाद इन्हें बंद कमरों में कड़े पहरे के बीच रखा जाता है.

उत्तर कोरिया पर सख्त अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हैं.इसलिए वह अपने नागरिकों को विदेश में काम पर भेजकर उनका अधिकांश वेतन लगभग 70% से 80% खुद रख लेता है, जिससे किम जोंग उन सरकार को विदेशी मुद्रा  मिलती है. इस तरह से नॉर्थ कोरियाई बंधुआ मज़दूरों को प्रति घंटे महज 120 रूपये से 144 रुपए ही मिल पाते हैं.

उत्तर कोरियाई सरकार 'लोयल्टी टैक्स' और सरकारी कोटे के नाम पर ये पैसे,प्योंगयांग का ख़जाना भरने के लिए, मजदूरों से ऐंठ लेती है.

इस ख़ौफ़नाक गठजोड़ को यूक्रेन युद्ध के कारण रूस में पैदा हुई मजदूरों की किल्लत और किम जोंग उन की विदेशी मुद्रा की भूख ने जन्म दिया है.

बंद कारखानों की दीवारों के पीछे हज़ारों जिंदगियां बिना पहचान और बिना आज़ादी के किम शासन के लिए अपना खून पसीना बहाने पर मजबूर हैं.

UN सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के तहत उत्तर कोरियाई श्रमिकों को विदेश में रोजगार देने पर प्रतिबंध है, लेकिन रूस और उत्तर कोरिया के बीच मजबूत होते सैन्य व आर्थिक संबंधों के तहत यह व्यवस्था चल रही है.

दो तानाशाही व्यवस्थाएं हज़ारों बेबस महिलाओं के श्रम को बेचकर अपना राजनीतिक और आर्थिक एजेंडा साध रही हैं.

Kim Jong Un’s ‘Slave Brigade’: The Chilling Trade of North Korean Women in Russian Factories

 


To cover the severe labor shortage caused by the Ukraine war and international sanctions, brigades of North Korean women are quietly being deployed across Russia’s assembly lines, garment factories, farms, construction sites, and kitchens. Thousands of men and women are being dispatched from North Korea to work in Russia’s manufacturing sector.

​Upon arrival in Russia, North Korean officials confiscate these workers' passports and documents to prevent them from fleeing.

​While these women are nominally promised a meager 480 rubles per hour (approx. ₹550 INR), they remain under 24-hour surveillance and are forced to labor for 12 to 16 hours a day. After work, they are confined to locked rooms under heavy guard.

​Faced with stringent international sanctions, North Korea uses overseas labor as a primary revenue stream. The regime siphons off roughly 70% to 80% of their earnings to secure foreign currency for the government. Consequently, these North Korean forced laborers are left with a mere 120 to 144 rubles per hour. The government extorts these funds under the guise of "Loyalty Taxes" and state quotas to fill Pyongyang's coffers.

​This horrific alliance was forged by Russia's war-driven labor shortage and Kim Jong Un's appetite for foreign currency. Behind the closed doors of these factories, thousands of lives are forced to shed blood and sweat for the Kim regime, stripped of both their identity and freedom.

​Although UN Security Council resolutions strictly ban the employment of North Korean workers abroad, this arrangement thrives under the growing military and economic ties between Russia and North Korea. Two autocratic regimes are advancing their political and economic agendas by trading the labor of thousands of defenseless women.

Thursday, 6 August 2026

सोनम वांगचुक और गीतांजलि वांगचुक–this husband-wife duo is the quintessential Trojan Horse."


 राहुल गांधी आपका अनशन क्यों तुड़वाएंगे जब आप मोदी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं?

सोनम वांगचुक एक बार फिर राहुल गांधी को निशाना बना रहे हैं कि उनकी पत्नी जंतर-मंतर पर विपक्ष के नेता के हाथों अनशन तुड़वाने की कोशिश कर रही थीं.


आम तौर पर जब आप किसी के खिलाफ अनशन करते हैं, तो आप उसी व्यक्ति से अनशन तुड़वाने की उम्मीद करते हैं। समझ नहीं आता कि आप किसी ऐसे व्यक्ति से अनशन तुड़वाने की उम्मीद क्यों कर रहे थे जो आपके ही मुद्दे के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहा था?

कांग्रेस और राहुल गांधी महीनों पहले से ही यह मुद्दा उठा रहे थे, और NSUI धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही थी. राहुल गांधी का "छात्रों की गूंज" कार्यक्रम तो बहुत पहले से ही शुरू हो चुका था. आपने,अपना अलग विरोध प्रदर्शन शुरू किया और फिर उम्मीद की कि राहुल गांधी आकर उन्हें पानी पिलाकर अनशन खत्म करवाएंगे?

क्या सरकार के इशारे पर ही आप ये चाहते थे कि राहुल गांधी आपका अनशन तुड़वाए और सरकार जंतर मंतर पर हुए छात्रों के आंदोलन और CJP को कांग्रेस का "भी" प्लान घोषित कर दे?


शर्मनाक है कि आप और आपकी पत्नी के पास,पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह के संसद में न आने पर और छात्रों पर चलाई गई पेलेट गन और गोलियों के बारे में कहने के लिए कुछ नहीं है.