Ruby Arun

Sunday, 15 March 2026

कैडर और पदोन्नति के मसले पर मोदी सरकार की लापरवाही और तानाशाही तौर तरीकों की वजह से #CRPF #BSF #ITBP #CISF #SSB कैडर के अधिकारियों और जवानों में जबरदस्त और असंतोष

 

भारत के #Central_Armed_Police_Forces के अधिकारी और जवान #मोदी_सरकार की वर्षों की मनमानी के खिलाफ सड़क पर उतर आए हैं. कैडर और पदोन्नति के मसले पर


मोदी सरकार की लापरवाही और तानाशाही तौर तरीकों की वजह से #CRPF #BSF #ITBP #CISF #SSB कैडर के अधिकारियों और जवानों में जबरदस्त और असंतोष है.
#West_Bengal और #Assam के विधानसभा चुनावों पर इसका गहरा नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा.
#CAPF देश की सुरक्षा की पहली दीवार हैं. इनका सरकारी अनियमितता का खुल कर विरोध. देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के लिए ये एक बहुत बड़ी चुनौती बन सकता है.
कानून-व्यवस्था का संकट पैदा हो सकता है. दंगों या चुनाव के दौरान इन बलों की तैनाती भरोसे का प्रतीक होती है. इनके मनोबल में कमी आती है, तो नागरिक प्रशासन के लिए स्थिति संभालना बेहद ही मुश्किल हो जाएगा.
#CAPF के अपने कैडर अधिकारियों और सरकार के बीच सबसे बड़ा टकराव #IPS लॉबी को लेकर है.
वर्तमान में CAPF जैसे #BSF या #CRPF  के शीर्ष पदों #IG #ADG #DG पर अक्सर IPS अधिकारियों को तैनात किया जाता है.
CAPF अधिकारियों का तर्क है कि इससे उनके अपने करियर की ग्रोथ रुक जाती है.
#SupremeCourt ने भी सुझाव दिया था कि इन बलों में IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को "धीरे-धीरे कम" किया जाए, लेकिन सरकार इसे पूरी तरह खत्म करने के पक्ष में नहीं दिख रही है.
सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में CAPF को #OGAS का दर्जा दिया था.
नियम के अनुसार, किसी भी 'Organized Service' जैसे Indian Revenue Service या Indian Audit & Accounts Service के शीर्ष पदों पर केवल उसी सेवा के अधिकारी होने चाहिए.
CAPF अधिकारियों का कहना है कि OGAS का दर्जा मिलने के बाद अब IPS अधिकारियों का "डेपुटेशन" कानूनी रूप से गलत है और इसे खत्म किया जाना चाहिए ताकि कैडर के अपने अधिकारियों को पदोन्नति मिल सके.
#CAPF के अधिकारियों की मुख्य मांग नॉन-फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन यानी #NFFU की रही है. छठा वेतन आयोग लागू होने के बाद, 2006 से IAS और अन्य 'Organized Group A Services' को यह लाभ दिया गया, लेकिन अर्धसैनिक बलों को इससे बाहर रखा गया था.

2025 में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए CAPF अधिकारियों को 'Organized Group A Service' (OGAS) का दर्जा देने का आदेश दिया था. इसका मतलब है कि उन्हें समयबद्ध पदोन्नति और बेहतर भत्ते मिलने चाहिए.
CAPF अधिकारियों का आरोप है कि सरकार इस आदेश को पूरी तरह लागू करने में देरी कर रही है. इससे कई अधिकारी 15-20 सालों तक एक ही पद जैसे असिस्टेंट कमांडेंट पर अटके रह जाते हैं.
एक CAPF अधिकारी 20-25 साल की कठिन सेवा के बाद भी उस शीर्ष पद पर नहीं पहुँच पाता, जिसका वह हकदार है, क्योंकि वहां बाहर से आए IPS अधिकारी बैठ जाते हैं। इससे कैडर में भारी निराशा और "प्रमोशन ब्लॉक" पैदा होता है.

कई CAPF अधिकारियों ने सरकार के खिलाफ़ #Contempt_Petition भी दायर की है, क्योंकि कोर्ट के आदेश के बावजूद पदोन्नति के नियम स्पष्ट नहीं किए गए.

निराश, हताश, क्षोभ और नाराज़गी से भरे #CAPF के अधिकारी अब सरकार से "आर पार" " का संघर्ष करने पर उतारू हैं.

@Ranbir_Crpf

The Crisis of Foreign Policy and Global Trade Routes Due to a failed foreign policy,

 



#Indians and the Indian economy are in deep trouble today. #Challenges such as food security, currency depreciation, fiscal deficits, and the burden of subsidies are looming large over the country.

To make matters worse, amidst reports of the Strait of Hormuz already being closed, Houthi rebels in Yemen have now threatened to block the Bab-el-Mandeb Strait. 

The "blood" flowing through the veins of the global economy—oil and trade—passes through these two narrow maritime gateways. If both routes are affected simultaneously, it will not just be a regional conflict but a "global economic catastrophe."

For India, this situation poses a massive challenge because a significant portion of our economy relies on maritime trade and oil imported from Gulf nations.

The Economic Impact on India

When oil prices surge from $70 to over $110, the government's budget collapses.

Funds are diverted away from developmental work—such as roads, schools, and hospitals—just to settle the oil import bills.

#Iran holds geographical control here. Approximately 20–30% of the global oil supply passes through this strait, and the threat to close it has been Iran’s biggest bargaining chip.

This connects the Red Sea to the #Gulf_of_Aden. Trade between #Europe and #Asia via the #Suez_Canal depends entirely on this route. Houthi targets here mean a complete standstill for global container shipping.

A Recipe for Global Inflation

If both routes are obstructed at once, the consequences could be terrifying. 

#Crude oil prices could cross $100 per barrel overnight, triggering a new wave of global inflation. While energy security crises will emerge for countries like India, #China, and #Japan, #Europe will face a shortage of essential goods.

Lessons from History

If routes like Bab-el-Mandeb are closed, the movement of grain stops, potentially leading to famine-like conditions in poor nations.

The 2022 #Russia-#Ukraine war disrupted energy and grain routes, the worst effects of which were seen in economies like #SriLanka and #Pakistan, which pushed them to the brink of bankruptcy.

1973 #OilCrisis: When #Arab nations halted oil supplies, it triggered a worldwide recession, and the GDP growth of #African and #Asian countries remained stalled for years.

#History proves that whenever energy routes are in crisis, developing economies hit the hardest.

The ongoing war between Iran and the #US-#Israel alliance has reached a tipping point where the entire global economy is at stake. 

For us in #India, this disaster has already manifested in the form of a severe shortage of #LPG gas cylinders.

नाकाम विदेशनीति की वजह से आज भारतीय और भारत की अर्थव्यवस्था मुसीबत में


 


खाद्य सुरक्षा,मुद्रा का अवमूल्यन,राजकोषीय घाटा और सब्सिडी का बोझ आदि चुनौतियां देश के सामने खड़ी हो गई हैं.

ऊपर से एक अलग आफत ये कि #StraitOfHormuz के पहले से ही बंद होने की खबरों के बीच,अब #Yeman के #Huti विद्रोहियों ने #BabAlMandab Strait को भी ब्लॉक करने की धमकी दी है.
दुनिया की अर्थव्यवस्था की रगों में दौड़ने वाला 'खून' यानी तेल और व्यापार, इन्हीं दो संकरे समुद्री रास्तों से होकर गुजरता है.अगर ये दोनों रास्ते एक साथ प्रभावित होते हैं,तो यह केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं, बल्कि एक "वैश्विक आर्थिक आपदा" का रूप ले सकता है.
#भारत के लिए यह स्थिति बहुत बड़ी चुनौती होगी क्योंकि हमारी #अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा समुद्री व्यापार और खाड़ी देशों से आने वाले तेल पर टिका है.

जब तेल की कीमतें $70 से बढ़कर $110 के पार जाती हैं, तो सरकार का बजट बिगड़ जाता है.पैसा विकास कार्यों जैसे सड़क, स्कूल, अस्पताल से हटकर तेल का बिल चुकाने में चला जाता है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर #ईरान का भौगोलिक नियंत्रण है.वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20-30% यहीं से गुजरता है.और इसे बंद करने की धमकी उसकी सबसे बड़ी #Bargaining_chip रही है.

बाब अल-मंडेब,लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है. स्वेज नहर के माध्यम से यूरोप और एशिया के बीच होने वाला व्यापार इसी रास्ते पर निर्भर है.
हूतियों द्वारा इसे निशाना बनाने का मतलब है वैश्विक कंटेनर शिपिंग का ठप हो जाना.
ये दोनों रास्ते एक साथ बाधित होते हैं, तो इसके परिणाम भयावह हो सकते हैं.
कच्चे तेल की कीमतें रातों-रात $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, जिससे पूरी दुनिया में #Inflation का नया दौर शुरू हो जाएगा.
भारत #चीन और #जापान जैसे देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा का संकट पैदा हो जाएगा, जबकि यूरोप के लिए जरूरी सामानों की किल्लत हो जाएगी.

अगर बाब अल-मंडेब जैसा रास्ता बंद हो, तो अनाज की आवाजाही रुक जाती है, जिससे गरीब देशों में भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हो सकती है.
जैसा कि 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध में हुआ था. इस युद्ध ने ऊर्जा और अनाज के मार्ग बाधित किए, जिसका सबसे बुरा असर श्रीलंका और पाकिस्तान जैसी अर्थव्यवस्थाओं पर दिखा, जो दिवालिया होने की कगार पर पहुँच गईं.
1973 में जब अरब देशों ने तेल की आपूर्ति रोकी, तो दुनिया भर में मंदी आई. लेकिन अफ्रीकी और एशियाई देशों की जीडीपी ग्रोथ सालों तक रुकी रही.

इतिहास गवाह है कि जब भी ऊर्जा मार्गों पर संकट आया है,सबसे ज्यादा मार विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ती है.
जाहिर तौर पर #IRAN और #America#Israel के बीच जारी युद्ध अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है,जहां पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था दांव पर लग चुकी है.
और हम भारत के लोगों के लिए यह आपदा ऑलरेडी #LPGGasCylinder की भयंकर कमी के तौर पर आ चुकी है.

Monday, 9 March 2026

भारत को श्रीलंका से सीखने की जरूरत है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में 'संप्रभुता' 'मानवीय मूल्यों' और नैतिक स्पष्टता दिखाने के बीच का संतुलन क्या होता है.




 56" का सीना और लाल आँखें तो #SriLanka की सरकार ने दिखाया है #America को..

दरअसल #EpsteinFiles में वहां के नेताओं के कुकर्म जो शामिल नहीं हैं.


श्रीलंका के Public Security and Parliamentary Affairs मंत्री #Ananda_Wijepala ने घोषणा की है कि #IRAN के नाविकों को #श्रीलंका सरकार एक महीने का फ़्री वीज़ा देगी. 

यह सुविधा मुख्य रूप से उन 32 जीवित बचे चालक दल के सदस्यों के लिए है जिनका जहाज़ #IRIS_Dena पिछले बुधवार को एक अमेरिकी पनडुब्बी के हमले में डूब गया था.

इसके अलावा #IRIS_Bushehr जहाज़ पर सवार लगभग 200 अन्य ईरानी कर्मियों को भी मानवीय सुरक्षा के तहत श्रीलंका में रहने की अनुमति दी जाएगी.


बचाए गए नाविकों में से कुछ का इलाज वर्तमान में #Galle के करापिटिया अस्पताल में चल रहा है. 

श्रीलंकाई सरकार उन्हें आवास और सुरक्षा भी प्रदान कर रही है.

विदेश मंत्री #VijithaHerath ने भी इस बात की पुष्टि की है कि श्रीलंका अपनी तटस्थता बनाए रखते हुए अंतर्राष्ट्रीय संधियों के तहत अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा कर रहा है.


हमारा 147 करोड़ भारतीयों का देश है और श्रीलंका की आबादी महज 2 करोड़ 33 लाख है.…

सोचिए मानवीय मूल्यों के लिहाज से ज्यादा ताकतवर और फैसले लेने के लिए स्वतंत्र कौन है?

जहाँ एक छोटा देश अपने भौगोलिक और कूटनीतिक हितों को ध्यान में रखकर स्वतंत्र निर्णय ले रहा है और यहां हम क्या कर रहे हैं?

श्रीलंका से सीखने की जरूरत है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में 'संप्रभुता' 'मानवीय मूल्यों' और नैतिक स्पष्टता दिखाने के बीच का संतुलन क्या होता है.


@HMVijithaHerath

Saturday, 7 March 2026

क्या भारत सरकार #America की कठपुतली बन चुकी है?

 



क्या हम #अमेरिकी इशारे पर "नाच" रहे हैं? क्या हम भारतीयों का आत्मसम्मान, हमारे भारत की संप्रभुता
#DonaldTrump के रहमो करम की मोहताज बन कर रह गई है. क्या हम अमेरिका के गुलाम हैं जो #अमेरिका का ये ट्रेजरी सचिव #Scott_Bessent "डंका" बजा कर दावा कर रहा है कि "इंडियंस #Good_Actors हैं.
Scott Bessent ने #Fox_Business के होस्ट #Larry_Kudlow से एक इंटरव्यू में कहा कि इस जाड़े में हमने #India को स्वीकृत रूसी तेल खरीदना बंद करने को कहा था और उन्होंने ऐसा किया भी. वे इसे अमेरिकी तेल से बदलने वाले थे, लेकिन दुनिया भर में तेल की अस्थायी कमी को कम करने के लिए, हमने उन्हें  30 दिनों तक रूसी तेल स्वीकार करने की अनुमति दी है..

Thursday, 5 March 2026

How did this American anchor even dare to say this about the Prime Minister of India?

 #अमेरिकी ऐंकर #Ana_Kasparian  ने अपने शो #TheYoungTurks में #PMNarendraModi के संबंध में बेहद ही aggressive और  cynical टोन में controversial provocative metaphor का इस्तेमाल किया है.


"They suck the life out of this country... and now they’re looking to India."


"And looks like " Narendra Modi opening up his legs" to Israel. Congratulations."


#FatherLand #MotherLand 🤬


क्या अमेरिका, ईरान के साथ अपने जंग में भारत को भी घसीटना चाहता है!

 #अमेरिका का पिट्ठू बने रहने का घातक परिणाम देखिए कि #America अब मनमाने तरीके से भारत की सुरक्षा संवेदनशीलता को दरकिनार करके, अपनी जरूरत के हिसाब से भारत के समुद्री विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र का इस्तेमाल कर रहा है और भारत की संप्रभुता को चुनौती दे रहा है.

एक अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत #IRISDena को श्रीलंका के तट के पास जो भारतीय जलक्षेत्र के काफी करीब है, 1 मार्च को टारपीडो से हमला कर डुबो दिया.जबकि यह ईरानी जहाज भारत द्वारा ही विशाखापत्तनम में आयोजित नौसैनिक अभ्यास #MILAN 2026,जो 19 से 27 फरवरी तक चला था, के समापन के बाद वापस लौट रहा था.इस हमले में जहाज पूरी तरह डूब गया और कथित तौर पर 87 ईरानी नौसैनिकों की जान चली गई.

यह जहाज श्रीलंका के तट के पास, #Galle से लगभग 40 समुद्री मील की दूरी पर था. यह घटना भारतीय तटों और सुरक्षा घेरे के इतने करीब हुई कि इसने भारत की #Net_Security_Provider की छवि पर सवालिया निशान लगा दिया है.

ईरान का यह जहाज भारत का आधिकारिक मेहमान था. अभ्यास खत्म होने के तुरंत बाद उसे मार गिराना भारत के कूटनीतिक सम्मान को गहरा ठेस पहुँचाने जैसा है.

भारत ने इस घटना पर क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर अपनी गहरी चिंता तो व्यक्त की है और इसे "मेजबानी और कूटनीतिक प्रोटोकॉल" का उल्लंघन भी माना है.

लेकिन भारत सरकार ने अमेरिका को कोई औपचारिक 'चेतावनी' नहीं दी है.


अमेरिकी नौसेना,अपनी परमाणु पनडुब्बियों #usswestvirginia #LosAngelesclass #Virginiaclass आदि को हिंद महासागर और भारत के रणनीतिक जलक्षेत्र में भारत को जानकारी दिए बिना उसके विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र के आसपास या भीतर संचालित कर रही है.

यह समुद्री क्षेत्र भारत का #EEZ है जहां से भारत का अधिकांश तेल आयात और समुद्री व्यापार होता है.

#IRAN और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के दरम्यान यह स्थिति और भी विस्फोटक हो जाती है क्योंकि ऐसे में भारत दो देशों के युद्ध के बीच में फंस सकता है. 

हिंद महासागर के तटों पर सैन्य टकराव होने से भारत अनचाहे ही सही युद्ध में घसीटा जा सकता है. जिससे अरब सागर और बंगाल की खाड़ी का शांतिपूर्ण क्षेत्र भी युद्ध क्षेत्र में बदल सकता है. 

और यह कोई अपवाद जैसी बात नहीं है. 

याद कीजिए दिसंबर 2023 में, #MVKemPluto नाम का एक मालवाहक जहाज, जो कच्चा तेल लेकर भारत के मंगलौर आ रहा था, तब उस पर अरब सागर में ड्रोन हमला हुआ था.

यह हमला भारतीय तट वेरावल, गुजरात से मात्र 200 से 300 समुद्री मील की दूरी पर हुआ था.

अमेरिका ने दावा किया कि यह #Drone ईरान से लॉन्च किया गया था. हालांकि ईरान ने इससे इनकार कर दिया था. 

उस समय भी हिंद महासागर और भारत के रणनीतिक जलक्षेत्र के आसपास सक्रिय थीं.

लेकिन तब भी भारत सरकार ने "चुप्पी" साध रखी थी. अमेरिका की इस गैर रणनीतिक हरकत के खिलाफ सरकार ने अपनी नाराजगी भी नहीं जताई थी. 

#India_First की जगह #America_First को ही तरजीह दी गई थी.