Ruby Arun

Wednesday, 23 September 2026

ईरान की सत्ता से इस्लामिक रिपब्लिक को पूरी तरह उखाड़ फेंकने से ही आएगी मध्य पूर्व में शांति–#RezaPahlavi

ईरान के अंतिम शाह के बेटे और निर्वासित क्राउन प्रिंस Reza Pahlavi ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख का समर्थन करते हुए यह बयान दिया है कि —

मध्य पूर्व में स्थायी शांति तब तक संभव नहीं है जब तक ईरान की सत्ता से इस्लामिक रिपब्लिक को पूरी तरह उखाड़


नहीं फेंका जाता.

पहलवी ने अमेरिका से कहा है कि वर्तमान ईरानी शासन के साथ बातचीत करने से शांति नहीं आएगी, क्योंकि यह शासन केवल ताकत की भाषा समझता है.

रज़ा पहलवी, Pahlavi Dynasty के वंशज हैं और दशकों से विदेश से Islamic Republic का विरोध कर रहे हैं.

वह खुद को ईरानी विपक्ष का एक प्रमुख चेहरा और विकल्प के रूप में पेश करना चाहते हैं.

1979 की क्रांति में उनके परिवार को ईरान छोड़ना पड़ा था. पहलवी का मुख्य उद्देश्य ईरान में इस्लामिक शासन को खत्म करके अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को फिर से स्थापित करना है. भले ही वे सीधे राजा न बनें, लेकिन वे ईरान के भविष्य को तय करने वाले मुख्य नेता बनना चाहते हैं.

रज़ा पहलवी के पिता मोहम्मद रज़ा शाह पहलवी के शासनकाल में जनता के बीच भारी असंतोष फैल गया था.

1953 में अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA ने ईरान की चुनी हुई सरकार को गिराकर शाह को पूर्ण शक्तियां दिलाई थीं. इस वजह से जनता में यह संदेश गया कि शाह स्वतंत्र राजा नहीं, बल्कि अमेरिकी हितों के लिए काम करने वाले 'कठपुतली' हैं.

हालांकि शाह ने ईरान को आधुनिक बनाने के लिए White Revolution शुरू किया था. उन्होंने महिलाओं को अधिकार दिए और पश्चिमी जीवन शैली को बढ़ावा दिया.

लेक8न राजनीतिक आजादी पूरी तरह खत्म कर दी गई थी.

रज़ा पहलवी के पिता मोहम्मद रज़ा शाह के पास SAVAK नाम की एक खूंखार Secret Police थी, जो सरकार का विरोध करने वाले नेताओं, छात्रों और नागरिकों को गिरफ्तार करती थी, प्रताड़ित करती थी और मार देती थी.

तेल की बिक्री से देश में बहुत पैसा आया, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा शाह के करीबियों, शाही परिवार और अमीर वर्ग तक ही सीमित रहा.

इस दरम्यान धार्मिक नेता अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी ने विदेशों में निर्वासन में रहते हुए भी ऑडियो कैसेटों और बयानों के जरिए शाह के खिलाफ जनता को लामबंद करते रहे.

1978 तक पूरे ईरान में करोड़ों लोग सड़कों पर उतर आए, हड़तालें हुईं और सरकार का नियंत्रण खत्म होने लगा.

हिंसक प्रदर्शनों को देखते हुए शाह मोहम्मद रज़ा शाह पहलवी अपने परिवार –जिसमें उनके बेटे रज़ा पहलवी भी शामिल थे– के साथ ईरान छोड़कर हमेशा के लिए चले गए.

1 फरवरी 1979 को अयातुल्ला खुमैनी फ्रांस से वापस ईरान लौटे.

1 अप्रैल 1979 को ईरान को आधिकारिक तौर पर एक धार्मिक गणतंत्र घोषित कर दिया गया और राजशाही हमेशा के लिए खत्म हो गई.


अब रज़ा पहलवी भी,अयातुल्ला खुमैनी की लीक पर ही आगे बढ़ना चाहते हैं.

ईरान में महंगाई, मानवाधिकार उल्लंघन और कड़े धार्मिक नियमों के खिलाफ आम जनता में जो गुस्सा है, पहलवी उसे अपने पक्ष में मोड़ना चाहते हैं। खुद को जनता के Liberator की तरह पेश करके वे ईरान के भीतर अपने समर्थकों का आधार बढ़ाना चाहते हैं.

ट्रंप और अमेरिकी प्रशासन का खुलकर समर्थन करके पहलवी पश्चिमी देशों को यह संदेश देना चाहते हैं कि वर्तमान शासन के गिरने के बाद ईरान का नेतृत्व करने के लिए वे ही सबसे मजबूत और भरोसेमंद विकल्प हैं.

वे पश्चिमी देशों को यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि वे ईरान में Pro-Western Secular सरकार बना सकते हैं, जिससे मध्य पूर्व में अमेरिका और उसके सहयोगियों जैसे इज़राइल वगैरह के हित सुरक्षित रहेंगे.

Tuesday, 22 September 2026

अरबपति बिजनेसमैन ने Male Genitalia Enlargement के लिए कराई Cosmetic Surgery – मिली मौत!

 अरबपति बिजनेसमैन ने Male Genitalia Enlargement के लिए कराई Cosmetic Surgery – मिली मौत!

सोने के ताबूत में दफनाए गए...


यह दुखद और सबक देने वाली कहानी है–अरबपति ब्रिटिश-नाइजीरियन बिजनेसमैन और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर

43 वर्षीय Igho "Tiny" Ubiribo की. 

इनकी पिछले दिनों ही मृत्यु हुई है. 


इगो उबीरिबो अपनी आलीशान और लग्जरी लाइफस्टाइल, महंगे ट्रेवल, और सेलिब्रिटीज वगैरह के साथ संबंधों के लिए सोशल जाने जाते थे.

साल 2022 में उन्होंने जिम्बाब्वे में फैशन डिजाइनर और सोशलाइट डेनिएल सिम्बा एलन से एक बेहद भव्य शादी की थी.

उनके पास लॉस एंजिल्स और लंदन जैसे शहरों में कई कीमती प्रॉपर्टीज थीं.


मार्च 2026 में उबीरिबो अपनी पत्नी के साथ थाईलैंड के बैंकॉक की छुट्टियों पर गए हुए थे.वहाँ उन्होंने एक प्राइवेट क्लिनिक में अपने Phallus का आकार बढ़ाने के लिए एक कॉस्मेटिक प्रोसीजर करवाया, जिसमें उनके अंग में लगभग 40 मिलीलीटर Hyaluronic Acid और लिडोकेन Lidocaine के इंजेक्शन लगाए गए.


प्रोसीजर के कुछ ही देर बाद, जब वे अपने होटल में मसाज ले रहे थे, तो उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द हुआ और वे बेहोश हो गए. उन्हें तुरंत Bangkok के Sukhumvit Hospital ले जाया गया.


अस्पताल में डॉक्टरों ने 100 मिनट से अधिक समय तक उन्हें बचाने की कोशिश की , लेकिन 6 मार्च की सुबह उनकी मौत हो गई. 


लंदन में हुई पोस्टमार्टम जाँच में यह सामने आया कि जो हायलुरोनिक एसिड उनके पेनिस में इंजेक्ट किया गया था, उसका कुछ हिस्सा उनकी रक्त वाहिकाओं के जरिए फेफड़ों तक पहुँच गया. 

इससे फेफड़ों में खून के थक्के जम गए.

कोर्ट की कोरोनर जीन हार्किन ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की कि उनकी मौत इसी कॉस्मेटिक प्रोसीजर के कारण हुए Pulmonary E


mbolism से हुई थी. 

Trump's Warning and Incentive to Iran: Stop War on US Terms


 At the UN General Assembly, US President Donald Trump delivered a extremely sharp statement regarding Iran.  

Donald Trump's statement is not merely a political speech, but a prime example of his 'Madman Theory' and 'Maximum Pressure' foreign policy.

By presenting two extreme options in a single statement, Trump has attempted to put immense pressure on Iran.

On one hand, he speaks of reaching an agreement on US terms, dangling the carrot of economic prosperity and the potential to become a major regional power—while on the other hand, he warns of complete destruction to instill fear in the Iranian leadership.

Trump stated:  

"I have a big decision to make. Will a deal be made with Iran that lets them rebuild and create a far greater country than it ever was before — maybe one of the greatest in the Middle East or even the world? Or do I annihilate the Islamic Republic, and do it quickly, never giving them a chance to kill and destroy again? Do I drive them into hell with no chance of survival and no hope of future greatness?"

  This statement is a blend of strategy, warning, and diplomacy, aimed primarily at forcing Iran to the negotiating table.

Friday, 18 September 2026

समुद्रों पर नियंत्रण और संसाधनों पर अधिकार जमाने की पूरी दुनिया में होड़

 China Coast Guard के  जहाज ने  Philippine के एक सरकारी जहाज को टक्कर मार दी.

यह कोई सामान्य घटना नहीं है.

समुद्रों पर नियंत्रण और संसाधनों पर अधिकार जमाने की होड़ पूरी दुनिया में तेज़ी से बढ़ रही है


.

विशेषज्ञ इसे "Blue Rush" यानी समुद्री संसाधनों पर कब्जा करने वाली जियोपॉलिटिकल औरा कहते हैं.

 

फिलीपींस तटरक्षक बल के अनुसार चीनी जहाज ने उनके शांत और तय मार्ग पर चल रहे नागरिक पोत को जानबूझकर और खतरनाक तरीके से टक्कर मारी.

टक्कर से फिलीपींस के जहाज के starboard side की रेलिंग टूट गई और डेक पर लगे उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए.

फिलीपींस ने इसे अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों का सीधा उल्लंघन बताया है. 


चीनी तटरक्षक बल और विदेश मंत्रालय ने फिलीपींस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि फिलीपींस का जहाज बार-बार चेतावनी देने के बावजूद अचानक अपनी दिशा बदलकर उनके पोत के सामने आ गया, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई.

चीन ने इसके लिए फिलीपींस को जिम्मेदार ठहराया. 

दरअसल West Philippine Sea ka यह इलाका फिलीपींस के विशेष आर्थिक क्षेत्र  के अंतर्गत आता है, लेकिन चीन पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा पेश करता है, जिसके कारण दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से तनाव लगातार बढ़ रहा है. 

बदलता ईरान–IRAN के Tehran में महिलाओं की 10 किलोमीटर

 IRAN के Tehran के विलायत पार्क में महिलाओं की 10 किलोमीटर


की रेस आयोजित हुई 'तेहरान वूमेन रन 10K Race' के नाम से. 

तमाम महिलाएं टी-शर्ट में और बिना हिजाब पहने दौड़ती नजर आईं.

ईरान में महिलाओं के उत्पीड़न के दावों के बीच यह नजारा, अलग था. हिजाब नियमों के बीच भी यह, महिलाओं की सार्वजनिक भागीदारी और नए अवसरों का प्रमाण पेश करता दृश्य था.

इसके बाद अब यह चर्चा होने लगी है कि क्या महसा अमिनी की मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद का ये नतीजा है?


Mahsa Amini, 22 साल की एक ईरानी-कुर्द महिला थीं, जिनकी मृत्यु सितंबर 2022 में ईरान में 'मोरालिटी पुलिस' की हिरासत के दौरान हो गई थी.

13 सितंबर 2022 को महसा अमिनी अपने परिवार के साथ तेहरान आई हुई थीं। वहां ईरान की 'मोरालिटी पुलिस' गश्त-ए-इरशाद ने उन्हें " हिजाब के नियमानुसार बाल न ढकने के आरोप में हिरासत में ले लिया था.

पुलिस की गाड़ी में उनके साथ मारपीट की गई, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गईं और कोमा में चली गईं.

16 सितंबर 2022 को अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई.हालांकि पुलिस ने दावा किया था कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था.

उनकी मौत के बाद ईरान सहित दुनिया भर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे.


महसा अमिनी की मौत ईरान में महिलाओं के अधिकारों, हिजाब की अनिवार्यता और सरकारी उत्पीड़न के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चिंगारी बन गई थी.इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य नारा "Woman, Life, Freedom" था.

ईरानी महिलाओं ने सार्वजनिक स्थानों पर अपने हिजाब जलाकर और बाल काटकर अपना विरोध दर्ज कराया था.


Mahsa Amini की मौत के चार साल के बाद ईरान की फिजां में वहां की महिलाओं का यह "Woman, Life, Freedom" का नज़ारा देखने को मिला.

ईरानी महिलाओं के लिए,यक़ीनन यह एक तारीख़ी और खुशनुमा हासिल है.


#Tehran10K

#MahsaAmini

#TehranWomenRun

#WomanLifeFreedom

#IranWomen

Turkiye के प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन Dr. Ali Zırh द्वारा Parkinson’s के एक मरीज की,की गई डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी की दुनिया भर के चिकित्सा जगत में चर्चा है.

 Turkiye के प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन Dr. Ali Zırh द्वारा Parkinson’s के एक मरीज की,की गई डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी की दुनिया भर के चिकित्सा जगत में चर्चा है. 

DBS को ब्रेन पेसमेकर' भी कहते हैं और यह सर्जरी न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए एक वरदान है.

DBS दुनिया की पहली सर्जरी नहीं है। इसका इस्तेमाल दुनिया भर में 1990 के दशक से हो रहा है लेकिन जब लोग पहली बार किसी मरीज को ऑपरेशन टेबल पर होश में रहते हुए, सर्जरी के तुरंत बाद अपनी कांपती उंगलियों और हाथों पर पूर्ण नियंत्रण पाते देखते हैं, तो यह किसी चमत्कार जैसा लगता है.

पार्किंसंस बीमारी में मरीज के हाथ-पैर इस हद तक कांपते हैं कि वह एक चम्मच पानी भी खुद नहीं पी सकता. लेकिन इस सर्जरी के दौरान जैसे ही डॉक्टर मस्तिष्क के सटीक बिंदु पर इलेक्ट्रोड रखकर हल्का इलेक्ट्रिकल करंट चालू करते हैं, मरीज के हाथों का कंपकंपाना और जकड़न कुछ ही सेकंड में रुक जाती है.

यह बदलाव इतना तुरंत और हैरान कर देने वाला होता है कि देखने वाले के लिए यह किसी जादू जैसा लगता है.

सर्जरी टेबल पर मरीज का जगा रहना और डॉक्टर के सवालों का जवाब देना, कभी-कभी गाना गाना, मोबाइल चलाना या सेल्फी वीडियो बनाना–लोगों के लिए बहुत अनूठा दृश्य होता है.

मस्तिष्क में दर्द के रिसेप्टर्स नहीं होते, इसलिए सिर का बाहरी हिस्सा सुन्न करने के बाद मरीज को दर्द का अहसास नहीं होता.


डॉक्टर मरीज की खोपड़ी में सूक्ष्म छेद करके मस्तिष्क के उस विशेष हिस्से जैसे Subthalamic Nucleus में बेहद पतले इलेक्ट्रोड डालते हैं, जो शरीर के कंपन, अकड़न और संतुलन को नियंत्रित करता है.

इन तारों को त्वचा के नीचे से लाते हुए छाती के ऊपरी हिस्से में लगे एक छोटे उपकरण न्यूरोस्टिमुलेटर या बैटरी से जोड़ दिया जाता है.

यह बैटरी मस्तिष्क के असामान्य या गड़बड़ सिग्नल देने वाले हिस्सों को लगातार हल्के इलेक्ट्रिकल पल्स भेजती है. इससे मस्तिष्क के वे सिग्नल रुक जाते हैं जो कपकंपी और जकड़न पैदा करते हैं.

डॉक्टर दिमाग की हर उस Cell की विद्युत तरंगों को एक लाउडस्पीकर के जरिए सुनते हैं जो बीमारी फैला रही है. मरीज जब उंगलियां हिलाता है या बोलता है, तो डॉक्टर Subthalamic Nucleus की पहचान 80 माइक्रोन से भी कम मार्जिन के साथ सटीक रूप से कर पाते हैं.

DBS सर्जरी पार्किंसंस को जड़ से तो खत्म नहीं करती, लेकिन यह बीमारी के लक्षणों को 10 से 15 साल पीछे जरूर धकेल देती है जो मरीज व्हीलचेयर या दूसरों की मदद पर निर्भर हो चुके होते हैं, वे दोबारा आत्मनिर्भर होकर अपनी सामान्य जिंदगी जीने लगते हैं.

दवाओं की भारी खुराक और उनके साइड-इफेक्ट्स पर निर्भरता काफी कम हो


जाती है.






Monday, 14 September 2026

पर इस सरकार का रवैया तो शुरू से यही है– बोलो मत, सिर्फ सुनो. पूछो मत, चुप रहो...

 वो गाना है ना–हर सवाल का जवाब नहीं मिल सकता. प्यार (काम) का हिसाब नहीं मिल सकता..

और इस सरकार में एक भी सवाल का जवाब नहीं मिल सकता..!

उल्टे सवाल के बदले सवाल,लानत मलामत ही मिलता है. 


गृहमंत्री अमित शाह ने देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की उपस्थिति में 'सेवा संकल्प अभियान' की शुरुआत और घोषणा के सिलसिले में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी. गृहमंत्री से सवाल किये गए 

गृहमंत्री ने हर एक सवाल को "खारिज" कर दिया.


मसलन—

जब मोदी सरकार के 2014 से अब तक के प्रमुख फैसलों पर राय मांगी गई, तो सवाल का जवाब देने के बजाय उसे यह कहकर टाल दिया गया कि "सार्वजनिक रूप से ऐसे प्रश्न नहीं होते"...


–राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता के लिहाज से गलवान मुद्दे पर सेना और देश की जनता की चिंताओं पर चर्चा करने के बजाय इसे "संवेदनशील" बताकर पारदर्शी जवाब देने से पूरी तरह इनकार कर दिया गया.


–सुरक्षा व्यवस्था पर अस्पष्टता दिखाई गई.अवैध रूप से वापस लौटने वाले लोगों को लोकेट करने की नीतियों पर पूछे गए व्यावहारिक सवाल को हास्य और तंज में उड़ा दिया गया.


–जब स्टेट पुलिस द्वारा दी गई क्लीन चिट और ED के आरोपों के विरोधाभास पर सहकारिता मंत्रालय के रुख के बारे में पूछा गया, तो उत्तरदायित्व लेने के बजाय पल्ला झाड़ लिया गया..


जनता द्वारा चुनी गई सरकार से उम्मीद की जाती है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा,कानूनी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक नीतियों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे.


राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में गोपनीयता आवश्यक हो सकती है, लेकिन एक सीमा तक जनता को आश्वस्त करने वाली आधिकारिक जानकारी देना भी शासन का हिस्सा माना जाता है.


पर इस सरकार का रवैया तो शुरू से यही है–

बोलो मत, सिर्फ सुनो.

पूछो मत, चुप रहो...