Ruby Arun

Friday, 18 September 2026

समुद्रों पर नियंत्रण और संसाधनों पर अधिकार जमाने की पूरी दुनिया में होड़

 China Coast Guard के  जहाज ने  Philippine के एक सरकारी जहाज को टक्कर मार दी.

यह कोई सामान्य घटना नहीं है.

समुद्रों पर नियंत्रण और संसाधनों पर अधिकार जमाने की होड़ पूरी दुनिया में तेज़ी से बढ़ रही है


.

विशेषज्ञ इसे "Blue Rush" यानी समुद्री संसाधनों पर कब्जा करने वाली जियोपॉलिटिकल औरा कहते हैं.

 

फिलीपींस तटरक्षक बल के अनुसार चीनी जहाज ने उनके शांत और तय मार्ग पर चल रहे नागरिक पोत को जानबूझकर और खतरनाक तरीके से टक्कर मारी.

टक्कर से फिलीपींस के जहाज के starboard side की रेलिंग टूट गई और डेक पर लगे उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए.

फिलीपींस ने इसे अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों का सीधा उल्लंघन बताया है. 


चीनी तटरक्षक बल और विदेश मंत्रालय ने फिलीपींस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि फिलीपींस का जहाज बार-बार चेतावनी देने के बावजूद अचानक अपनी दिशा बदलकर उनके पोत के सामने आ गया, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई.

चीन ने इसके लिए फिलीपींस को जिम्मेदार ठहराया. 

दरअसल West Philippine Sea ka यह इलाका फिलीपींस के विशेष आर्थिक क्षेत्र  के अंतर्गत आता है, लेकिन चीन पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा पेश करता है, जिसके कारण दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से तनाव लगातार बढ़ रहा है. 

बदलता ईरान–IRAN के Tehran में महिलाओं की 10 किलोमीटर

 IRAN के Tehran के विलायत पार्क में महिलाओं की 10 किलोमीटर


की रेस आयोजित हुई 'तेहरान वूमेन रन 10K Race' के नाम से. 

तमाम महिलाएं टी-शर्ट में और बिना हिजाब पहने दौड़ती नजर आईं.

ईरान में महिलाओं के उत्पीड़न के दावों के बीच यह नजारा, अलग था. हिजाब नियमों के बीच भी यह, महिलाओं की सार्वजनिक भागीदारी और नए अवसरों का प्रमाण पेश करता दृश्य था.

इसके बाद अब यह चर्चा होने लगी है कि क्या महसा अमिनी की मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद का ये नतीजा है?


Mahsa Amini, 22 साल की एक ईरानी-कुर्द महिला थीं, जिनकी मृत्यु सितंबर 2022 में ईरान में 'मोरालिटी पुलिस' की हिरासत के दौरान हो गई थी.

13 सितंबर 2022 को महसा अमिनी अपने परिवार के साथ तेहरान आई हुई थीं। वहां ईरान की 'मोरालिटी पुलिस' गश्त-ए-इरशाद ने उन्हें " हिजाब के नियमानुसार बाल न ढकने के आरोप में हिरासत में ले लिया था.

पुलिस की गाड़ी में उनके साथ मारपीट की गई, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गईं और कोमा में चली गईं.

16 सितंबर 2022 को अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई.हालांकि पुलिस ने दावा किया था कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था.

उनकी मौत के बाद ईरान सहित दुनिया भर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे.


महसा अमिनी की मौत ईरान में महिलाओं के अधिकारों, हिजाब की अनिवार्यता और सरकारी उत्पीड़न के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चिंगारी बन गई थी.इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य नारा "Woman, Life, Freedom" था.

ईरानी महिलाओं ने सार्वजनिक स्थानों पर अपने हिजाब जलाकर और बाल काटकर अपना विरोध दर्ज कराया था.


Mahsa Amini की मौत के चार साल के बाद ईरान की फिजां में वहां की महिलाओं का यह "Woman, Life, Freedom" का नज़ारा देखने को मिला.

ईरानी महिलाओं के लिए,यक़ीनन यह एक तारीख़ी और खुशनुमा हासिल है.


#Tehran10K

#MahsaAmini

#TehranWomenRun

#WomanLifeFreedom

#IranWomen

Turkiye के प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन Dr. Ali Zırh द्वारा Parkinson’s के एक मरीज की,की गई डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी की दुनिया भर के चिकित्सा जगत में चर्चा है.

 Turkiye के प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन Dr. Ali Zırh द्वारा Parkinson’s के एक मरीज की,की गई डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी की दुनिया भर के चिकित्सा जगत में चर्चा है. 

DBS को ब्रेन पेसमेकर' भी कहते हैं और यह सर्जरी न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए एक वरदान है.

DBS दुनिया की पहली सर्जरी नहीं है। इसका इस्तेमाल दुनिया भर में 1990 के दशक से हो रहा है लेकिन जब लोग पहली बार किसी मरीज को ऑपरेशन टेबल पर होश में रहते हुए, सर्जरी के तुरंत बाद अपनी कांपती उंगलियों और हाथों पर पूर्ण नियंत्रण पाते देखते हैं, तो यह किसी चमत्कार जैसा लगता है.

पार्किंसंस बीमारी में मरीज के हाथ-पैर इस हद तक कांपते हैं कि वह एक चम्मच पानी भी खुद नहीं पी सकता. लेकिन इस सर्जरी के दौरान जैसे ही डॉक्टर मस्तिष्क के सटीक बिंदु पर इलेक्ट्रोड रखकर हल्का इलेक्ट्रिकल करंट चालू करते हैं, मरीज के हाथों का कंपकंपाना और जकड़न कुछ ही सेकंड में रुक जाती है.

यह बदलाव इतना तुरंत और हैरान कर देने वाला होता है कि देखने वाले के लिए यह किसी जादू जैसा लगता है.

सर्जरी टेबल पर मरीज का जगा रहना और डॉक्टर के सवालों का जवाब देना, कभी-कभी गाना गाना, मोबाइल चलाना या सेल्फी वीडियो बनाना–लोगों के लिए बहुत अनूठा दृश्य होता है.

मस्तिष्क में दर्द के रिसेप्टर्स नहीं होते, इसलिए सिर का बाहरी हिस्सा सुन्न करने के बाद मरीज को दर्द का अहसास नहीं होता.


डॉक्टर मरीज की खोपड़ी में सूक्ष्म छेद करके मस्तिष्क के उस विशेष हिस्से जैसे Subthalamic Nucleus में बेहद पतले इलेक्ट्रोड डालते हैं, जो शरीर के कंपन, अकड़न और संतुलन को नियंत्रित करता है.

इन तारों को त्वचा के नीचे से लाते हुए छाती के ऊपरी हिस्से में लगे एक छोटे उपकरण न्यूरोस्टिमुलेटर या बैटरी से जोड़ दिया जाता है.

यह बैटरी मस्तिष्क के असामान्य या गड़बड़ सिग्नल देने वाले हिस्सों को लगातार हल्के इलेक्ट्रिकल पल्स भेजती है. इससे मस्तिष्क के वे सिग्नल रुक जाते हैं जो कपकंपी और जकड़न पैदा करते हैं.

डॉक्टर दिमाग की हर उस Cell की विद्युत तरंगों को एक लाउडस्पीकर के जरिए सुनते हैं जो बीमारी फैला रही है. मरीज जब उंगलियां हिलाता है या बोलता है, तो डॉक्टर Subthalamic Nucleus की पहचान 80 माइक्रोन से भी कम मार्जिन के साथ सटीक रूप से कर पाते हैं.

DBS सर्जरी पार्किंसंस को जड़ से तो खत्म नहीं करती, लेकिन यह बीमारी के लक्षणों को 10 से 15 साल पीछे जरूर धकेल देती है जो मरीज व्हीलचेयर या दूसरों की मदद पर निर्भर हो चुके होते हैं, वे दोबारा आत्मनिर्भर होकर अपनी सामान्य जिंदगी जीने लगते हैं.

दवाओं की भारी खुराक और उनके साइड-इफेक्ट्स पर निर्भरता काफी कम हो


जाती है.






Monday, 14 September 2026

पर इस सरकार का रवैया तो शुरू से यही है– बोलो मत, सिर्फ सुनो. पूछो मत, चुप रहो...

 वो गाना है ना–हर सवाल का जवाब नहीं मिल सकता. प्यार (काम) का हिसाब नहीं मिल सकता..

और इस सरकार में एक भी सवाल का जवाब नहीं मिल सकता..!

उल्टे सवाल के बदले सवाल,लानत मलामत ही मिलता है. 


गृहमंत्री अमित शाह ने देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की उपस्थिति में 'सेवा संकल्प अभियान' की शुरुआत और घोषणा के सिलसिले में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी. गृहमंत्री से सवाल किये गए 

गृहमंत्री ने हर एक सवाल को "खारिज" कर दिया.


मसलन—

जब मोदी सरकार के 2014 से अब तक के प्रमुख फैसलों पर राय मांगी गई, तो सवाल का जवाब देने के बजाय उसे यह कहकर टाल दिया गया कि "सार्वजनिक रूप से ऐसे प्रश्न नहीं होते"...


–राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता के लिहाज से गलवान मुद्दे पर सेना और देश की जनता की चिंताओं पर चर्चा करने के बजाय इसे "संवेदनशील" बताकर पारदर्शी जवाब देने से पूरी तरह इनकार कर दिया गया.


–सुरक्षा व्यवस्था पर अस्पष्टता दिखाई गई.अवैध रूप से वापस लौटने वाले लोगों को लोकेट करने की नीतियों पर पूछे गए व्यावहारिक सवाल को हास्य और तंज में उड़ा दिया गया.


–जब स्टेट पुलिस द्वारा दी गई क्लीन चिट और ED के आरोपों के विरोधाभास पर सहकारिता मंत्रालय के रुख के बारे में पूछा गया, तो उत्तरदायित्व लेने के बजाय पल्ला झाड़ लिया गया..


जनता द्वारा चुनी गई सरकार से उम्मीद की जाती है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा,कानूनी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक नीतियों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे.


राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में गोपनीयता आवश्यक हो सकती है, लेकिन एक सीमा तक जनता को आश्वस्त करने वाली आधिकारिक जानकारी देना भी शासन का हिस्सा माना जाता है.


पर इस सरकार का रवैया तो शुरू से यही है–

बोलो मत, सिर्फ सुनो.

पूछो मत, चुप रहो...


Friday, 11 September 2026

यमन में Houthi का शक्ति प्रदर्शन देखिए!

 Houthi का शक्ति प्रदर्शन देखिए! 


हजारों हुती लड़ाके,राइफलों और मशीनगनों के साथ मार्च करते हुए

अपनी सैन्य ताकत दिखा रहे हैं ताकि स्थानीय लोगों को लामबंद कर सकें और अमेरिका, इज़राइल तथा उनके सहयोगियों को अपनी मजबूत लड़ाकू उपस्थिति का संदेश दे सकें. 

Yemen में दशकों से चले आ रहे युद्ध और कमजोर शासन के कारण वहाँ आम नागरिकों और हुती लड़ाकों के पास भारी मात्रा में हथियार मौजूद हैं. 

यमन दशकों से दुनिया के सबसे बड़े अवैध हथियार बाजारों में से एक रहा है.देश में सरकार और कानून-व्यवस्था कमजोर होने के कारण AK-47, रॉकेट लॉन्चर RPG और मशीनगनें आम बाजारों में आसानी से खरीदी और बेची जाती हैं.


2014-2015 में जब हुती विद्रोहियों ने यमन की राजधानी सआना पर कब्जा किया, तो उन्होंने Yemeni Armed Forces के विशाल हथियार डिपो, टैंक, आर्टिलरी और वायु रक्षा प्रणालियों पर कब्जा कर लिया था. 

इसके अलावा, IRAN हुती गुट को उन्नत बैलिस्टिक मिसाइलें, एंटी-शिप क्रूज़ मिसाइलें, हमलावर ड्रोन UAVs और छोटे हथियार या तो सीधे या ओमान,लाल सागर के तटीय इलाकों से तस्करी के रास्ते पहुंचाता है.

यमन पिछले एक दशक से Civil War से जूझ रहा है.वहाँ ऐसी कोई केंद्रीय पुलिस या कानून-व्यवस्था नहीं है जो उन्हें गिरफ्तार कर सके. हुती खुद ही उस इलाके में समानांतर सरकार चला रहे हैं.

हुती सिर्फ एक छोटा गिरोह नहीं, बल्कि एक सुसंगठित सैन्य संगठन बन चुके हैं.

सऊदी अरब और अमेरिकी गठबंधन ने हुती पर हजारों हवाई हमले किए हैं, लेकिन केवल हवाई हमलों से किसी को पकड़ा नहीं जा सकता.

जमीन पर उतरकर सेना भेजने का मतलब बहुत बड़ा सैन्य नुकसान और लंबा युद्ध है, जिससे सभी देश बचते हैं,.


वैसे भी इन्हें पकड़ना आसान नहीं है.

यमन के उत्तरी और तटीय इलाके बेहद पथरीले और ऊंचे पहाड़ों से घिरे हैं. हुती लड़ाके इन पहाड़ों में बनीं प्राकृतिक गुफाओं और भूमिगत सुरंगों में छिपकर गोरिल्ला युद्ध लड़ते हैं, जिससे सीधी सैन्य कार्रवाई या हवाई हमले से उन्हें पकड़ना बेहद मुश्किल हो जाता है.

Friday, 4 September 2026

नीदरलैंड ने अमेरिका में रखा अपना 86 टन सोना ब्रिटेन ट्रांसफर किया!

 Netherlands ने America के न्यूयॉर्क

और ओटावा में रखे अपने कुल सोने में से 

11 अरब डॉलर का 86 टन सोना निकाल कर

London में Relocate कर दिया है.

डच सेंट्रल बैंक के गवर्नर ओलाफ स्लीपेन के अनुसार, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अस्थिरता को देखते हुए यह कदम 'क्राइसिस रेडीनेस' के तहत उठाया गया है.


बैंक ऑफ इंग्लैंड को दुनिया का सबसे बड़ा और पारदर्शी फिजिकल गोल्ड ट्रेडिंग हब माना जाता है. संकट के समय न्यूयोर्क के मुकाबले लंदन में मौजूद सोने को बहुत तेजी से ट्रेड या नकदी में बदला जा सकता है.


ऐसा नहीं है नीदरलैंड्स की अर्थव्यवस्था, किसी मुश्किल में है. देश की अर्थव्यवस्था अत्यंत मजबूत, विकसित और स्थिर है.

 यह केवल Precautionary Measure है. ताकि अगर भविष्य में मध्य पूर्व तनाव की वजह से कोई बड़ा वैश्विक वित्तीय संकट पैदा होता है, तो लंदन के बाजार से उस सोने को मिनटों में Cash में बदला जा सकता है.


यह घटना अमेरिका के लिए एक Warning Signal है कि पश्चिमी देश अब वैश्विक संकट की स्थिति में अमेरिकी वित्तीय प्रणाली पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अपने विकल्प चुन रहे हैं.

86 टन सोना अमेरिकी अर्थव्यवस्था के आकार के मुकाबले छोटा आंकड़ा है.


लेकिन जब केंद्रीय बैंक अपने Assets का कंट्रोल अमेरिका से हटाकर फिजिकल गोल्ड या यूरोप केंद्रित संपत्तियों में बदलते हैं, तो इससे लंबे समय में अमेरिकी डॉलर की वैश्विक मांग पर दबाव बनता है.

यह De-dollarization की प्रक्रिया को बढ़ावा देता है.


सोना,जब न्यूयॉर्क के बजाय लंदन बुलियन मार्केट में ट्रेड होता है, तब ट्रेडिंग वॉल्यूम और लिक्विडिटी का फायदा अमेरिकी बाजारों के बजाय ब्रिटेन के बाजारों को मिलता है.

इसे डोमिनो इफेक्ट भी कहते हैं–जब एक बड़ा देश अपना सोना स्थानांतरित करता है, तो अन्य देश भी ऐसा करने के लिए प्रेरित होते हैं. इससे न्यूयॉर्क्स फेडरल रिजर्व की दुनिया की 'सेफ कस्टडी' वाली छवि कमजोर होती है. वॉल स्ट्रीट और न्यूयॉर्क्स का भी व्यापारिक नुकसान होता है.


Wednesday, 2 September 2026

Paper 7.8% vs. Ground Reality 2.6%: The Harsh Truth of India's Economic Growth!

 


​Statements by prime minister Modi’s former Finance Secretary Subhash Chandra Garg have exposed the government's glossy GDP figures. The gap between the glowing 7.8% growth rate on paper and the fading 2.6% reality on the ground raises severe questions about the country's economy.

​This is the statistical wizardry of a flawed deflator. The inflation rate subtracted during GDP calculations is far disconnected from real market prices. By underreporting inflation, the headline GDP has been inflated like a balloon—completely ignoring the informal sector.

​80% of the country's unorganized sector—small traders, MSMEs, and daily wage earners—is struggling in distress. The government is estimating national growth solely by looking at the profits of big corporate firms.

​While sales of premium cars and luxury apartments break records, the common citizen is struggling to afford basic daily essentials. The benefits of growth remain confined to just 5-10% of the population.

​If the economy is expanding at 7.8%, why are jobs missing on the ground?

​Headline numbers might win praise on the global stage, but this data manipulation can neither fill the empty pockets of the common man nor generate jobs for the youth. Claiming that all of India's problems are solved based on a 7.8% headline figure is turning a blind eye to ground reality. Until purchasing power, the rural economy, and employment figures grow at a real 7% rate, a 7.8% GDP will remain nothing more than a technical and political data point.

​The reality is that since demonetization, complex GST regulations, and COVID-19, large corporate sectors have expanded while small traders and unorganized sectors have fallen severely behind. The 7.8% visible on paper represents corporate growth, not the nation's overall economic reality.

​#IndianEconomy #GDPReality #SubhashChandraGarg #JoblessGrowth #InformalSector #GDPDeflator #InflationReality #KShapedRecovery