Ruby Arun

Monday, 10 August 2026

North Korea के तानाशाह किम जोंग उन की ‘ग़ुलाम ब्रिगेड’:–रूस की फ़ैक्टरियों में उत्तर कोरियाई महिलाओं का ख़ौफ़नाक सौदा...


रूस में यूक्रेन युद्ध और प्रतिबंधों के कारण पैदा हुई मजदूरों की किल्लत को पूरा करने के लिए रूस की असेंबली लाइनों, कपड़ा फ़ैक्टरियों,खेतों, कारखानों,निर्माण स्थलों और किचनों में इन दिनों उत्तर कोरियाई महिलाओं की ब्रिगेड चुपचाप तैनात की जा रही है.उत्तर कोरिया से हजारों महिलाओं और पुरुषों को रूस के गारमेंट  में काम करने भेजा जा रहा है.

रूस पहुंचते ही उत्तर कोरियाई अधिकारी इन श्रमिकों के पासपोर्ट और दस्तावेज जब्त कर लेते हैं, ताकि वे भाग न सकें.

उत्तर कोरियाई महिलाओं को प्रति घंटे महज 480 रूबल मतलब भारतीय रुपए के हिसाब 550 रुपए ही दिये जाते हैं. और 24 घंटे इनकी निगरानी की जाति है. इनसे 12 से 16 घंटे मजदूरी कराई जाती है. काम के बाद इन्हें बंद कमरों में कड़े पहरे के बीच रखा जाता है.

उत्तर कोरिया पर सख्त अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हैं.इसलिए वह अपने नागरिकों को विदेश में काम पर भेजकर उनका अधिकांश वेतन लगभग 70% से 80% खुद रख लेता है, जिससे किम जोंग उन सरकार को विदेशी मुद्रा  मिलती है. इस तरह से नॉर्थ कोरियाई बंधुआ मज़दूरों को प्रति घंटे महज 120 रूपये से 144 रुपए ही मिल पाते हैं.

उत्तर कोरियाई सरकार 'लोयल्टी टैक्स' और सरकारी कोटे के नाम पर ये पैसे,प्योंगयांग का ख़जाना भरने के लिए, मजदूरों से ऐंठ लेती है.

इस ख़ौफ़नाक गठजोड़ को यूक्रेन युद्ध के कारण रूस में पैदा हुई मजदूरों की किल्लत और किम जोंग उन की विदेशी मुद्रा की भूख ने जन्म दिया है.

बंद कारखानों की दीवारों के पीछे हज़ारों जिंदगियां बिना पहचान और बिना आज़ादी के किम शासन के लिए अपना खून पसीना बहाने पर मजबूर हैं.

UN सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के तहत उत्तर कोरियाई श्रमिकों को विदेश में रोजगार देने पर प्रतिबंध है, लेकिन रूस और उत्तर कोरिया के बीच मजबूत होते सैन्य व आर्थिक संबंधों के तहत यह व्यवस्था चल रही है.

दो तानाशाही व्यवस्थाएं हज़ारों बेबस महिलाओं के श्रम को बेचकर अपना राजनीतिक और आर्थिक एजेंडा साध रही हैं.

Kim Jong Un’s ‘Slave Brigade’: The Chilling Trade of North Korean Women in Russian Factories

 


To cover the severe labor shortage caused by the Ukraine war and international sanctions, brigades of North Korean women are quietly being deployed across Russia’s assembly lines, garment factories, farms, construction sites, and kitchens. Thousands of men and women are being dispatched from North Korea to work in Russia’s manufacturing sector.

​Upon arrival in Russia, North Korean officials confiscate these workers' passports and documents to prevent them from fleeing.

​While these women are nominally promised a meager 480 rubles per hour (approx. ₹550 INR), they remain under 24-hour surveillance and are forced to labor for 12 to 16 hours a day. After work, they are confined to locked rooms under heavy guard.

​Faced with stringent international sanctions, North Korea uses overseas labor as a primary revenue stream. The regime siphons off roughly 70% to 80% of their earnings to secure foreign currency for the government. Consequently, these North Korean forced laborers are left with a mere 120 to 144 rubles per hour. The government extorts these funds under the guise of "Loyalty Taxes" and state quotas to fill Pyongyang's coffers.

​This horrific alliance was forged by Russia's war-driven labor shortage and Kim Jong Un's appetite for foreign currency. Behind the closed doors of these factories, thousands of lives are forced to shed blood and sweat for the Kim regime, stripped of both their identity and freedom.

​Although UN Security Council resolutions strictly ban the employment of North Korean workers abroad, this arrangement thrives under the growing military and economic ties between Russia and North Korea. Two autocratic regimes are advancing their political and economic agendas by trading the labor of thousands of defenseless women.

Thursday, 6 August 2026

सोनम वांगचुक और गीतांजलि वांगचुक–this husband-wife duo is the quintessential Trojan Horse."


 राहुल गांधी आपका अनशन क्यों तुड़वाएंगे जब आप मोदी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं?

सोनम वांगचुक एक बार फिर राहुल गांधी को निशाना बना रहे हैं कि उनकी पत्नी जंतर-मंतर पर विपक्ष के नेता के हाथों अनशन तुड़वाने की कोशिश कर रही थीं.


आम तौर पर जब आप किसी के खिलाफ अनशन करते हैं, तो आप उसी व्यक्ति से अनशन तुड़वाने की उम्मीद करते हैं। समझ नहीं आता कि आप किसी ऐसे व्यक्ति से अनशन तुड़वाने की उम्मीद क्यों कर रहे थे जो आपके ही मुद्दे के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहा था?

कांग्रेस और राहुल गांधी महीनों पहले से ही यह मुद्दा उठा रहे थे, और NSUI धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही थी. राहुल गांधी का "छात्रों की गूंज" कार्यक्रम तो बहुत पहले से ही शुरू हो चुका था. आपने,अपना अलग विरोध प्रदर्शन शुरू किया और फिर उम्मीद की कि राहुल गांधी आकर उन्हें पानी पिलाकर अनशन खत्म करवाएंगे?

क्या सरकार के इशारे पर ही आप ये चाहते थे कि राहुल गांधी आपका अनशन तुड़वाए और सरकार जंतर मंतर पर हुए छात्रों के आंदोलन और CJP को कांग्रेस का "भी" प्लान घोषित कर दे?


शर्मनाक है कि आप और आपकी पत्नी के पास,पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह के संसद में न आने पर और छात्रों पर चलाई गई पेलेट गन और गोलियों के बारे में कहने के लिए कुछ नहीं है.

Sunday, 19 July 2026

राम मंदिर चंदा चोरी के मसले पर राहुल गांधी का, नरेंद्र मोदी को पत्र


 नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राम मंदिर के चंदे में हुई कथित चोरी को लेकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक संयुक्त पत्र लिखा है.

इस पत्र में उन्होंने इस मामले पर पीएम मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं और मांग रखी है कि SIT जांच के नतीजे और ट्रस्ट के पूरे खातों को सार्वजनिक किया जाए, ताकि हर राम भक्त को यह पता चल सके कि उनके द्वारा दिए गए दान का इस्तेमाल कैसे हुआ है.

पत्र में लिखा गया है कि –

"यह सार्वजनिक रूप से सभी को पता है कि ट्रस्ट के सदस्य RSS, VHP और उनसे जुड़े संगठनों से जुड़े हैं। इसके कलंकित पूर्व महासचिव चंपत राय भी आपके करीबी सहयोगी रहे हैं. इतने बड़े अपराध के सामने आपकी मौजूदा चुप्पी बर्दाश्त से बाहर है. जवाबदेही तय करना और नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करना आपका कर्तव्य है.

देश के लाखों श्रद्धालुओं की गाढ़ी कमाई के दान किए गए हजारों करोड़ रुपये चोरी हो गए. 

आपकी सरकार और इस ट्रस्ट की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करती है कि आप कितनी पारदर्शिता और तेजी से कार्रवाई करते हैं.

देश की जनता इस सब पर नजर रखे हुए है.

वैश्विक तेल राजनीति और मिडिल ईस्ट के नक्शेबपर बड़ा बदलाव–अमेरिका–इराक एक साथ.

 🚨वैश्विक तेल राजनीति और #Middle_East के नक्शे पर एक बहुत बड़ा #Geopolitical बदलाव होने जा रहा है. 

#IRAQ अब #IRAN के प्रभाव और दबाव से बाहर निकल रहा है.#इराक ने अमेरिकी कंपनियों के साथ $60 बिलियन यानी लगभग 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के 48 समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं.

#America की दिग्गज तेल कंपनी #Chevron इराक के साथ मिलकर एक ऐसी पाइपलाइन पर निवेश कर रही है जो इराकी तेल को सीधे सीरिया के रास्ते #Mediterranean_Coast तक पहुंचाएगी. इस डील के जरिए #Syria को भी एक बड़ा आर्थिक जरिया ट्रांजिट फीस के रूप में मिलेगा.

#इराक को अपना तेल बेचने के लिए इरान के प्रभाव वाले #StraitOfHormuz वाले समुद्री रास्ते पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. इस डील में ExxonMobil, Shell, ConocoPhillips और Halliburton जैसी दिग्गज अमेरिकी और वैश्विक कंपनियां भी शामिल हैं जो इराक के पुराने तेल क्षेत्रों को आधुनिक बनाने और प्रोडक्शन बढ़ाने का काम करेंगी.

अगर इराक और अन्य खाड़ी देश Strait of Hormuz को छोड़कर दूसरे रास्तों से तेल भेजने लगेंगे,तो वैश्विक तेल बाजार पर #इरान की पकड़ या दुनिया को 'धमकाने' की क्षमता कमजोर पड़ जाएगी.

इराक के नए प्रधानमंत्री #Ali_al_Zaidi के नेतृत्व में अमेरिका के साथ यह डील साफ दिखाती है कि इराक अब ईरान के प्रभाव चक्र से बाहर निकलकर अपनी स्वतंत्र आर्थिक और विदेश नीति बना रहा है .

सद्दाम हुसैन के पतन के बाद से इराक की राजनीति और वहां के कई सशस्त्र गुटों पर ईरान का बहुत मजबूत नियंत्रण रहा है.


#अमेरिका ने इराक के बैंकिंग सिस्टम को डॉलर में लेनदेन की छूट देकर और #Starlink जैसी तकनीक देकर इराक को अपने पाले में मजबूत कर लिया है.


Saturday, 18 July 2026

यूक्रेन में राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं...

 


यूक्रेन की राजधानी #Kyiv सहित कई बड़े शहरों में हजारों की संख्या में लोग, विशेष रूप से युवा और छात्र, सड़कों पर उतर आए हैं.

दरअसल #Volodymyr_Zelenskyy ने हाल ही में यूक्रेन के बेहद लोकप्रिय और युवा रक्षा मंत्री #Mykhailo_Fedorov को उनके पद से बर्खास्त कर दिया.

मिखाइलो फेडोरोव को यूक्रेन के 'ड्रोन युद्ध' और सैन्य आधुनिकीकरण का जनक माना जाता है.उनके हटाए जाने से लोग नाराज हैं और Shame! तथा "फेडोरोव को वापस लाओ" जैसे नारे लगा रहे हैं.

बताया जा रहा है कि पूर्व रक्षा मंत्री फेडोरोव और यूक्रेन के  Commander-in-Chief जनरल ओलेक्सांद्र सिर्सकी के बीच काफी समय से तनाव चल रहा था, जिसके बाद जेलेंस्की ने फेडोरोव को हटाने का फैसला किया.

लोगों में यूक्रेन सरकार के भीतर फैले कथित भ्रष्टाचार को लेकर भी भारी नाराजगी है। इसके अलावा, हाल ही में #Lviv जैसे शहरों में सेना में जबरन भर्ती करने के तरीकों को लेकर भी आम जनता और अधिकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं.

जेलेंस्की की अपनी ही पार्टी के कुछ सांसदों और वायु सेना के उप कमांडर जैसे बड़े अधिकारियों ने भी इस फैसले के विरोध में इस्तीफे दे दिए हैं.

जेलेंस्की के सामने युद्ध की शुरुआत के बाद से यह अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट है.

Friday, 17 July 2026

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के नरवर किले से 300 किलो का ऐतिहासिक बहुमूल्य तोप चोरी


 अपने देश के चोरों और उनकी चोरी का "स्पेस टेक्नोलॉजी" लेवल देखिए!

3000 किलो का 500 साल पुराना बेशकीमती तोप ही चोरी हो गया 🫪🫪

वो भी एक ऊंचे पहाड़ी किले से.. 


यह घटना मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के ऐतिहासिक नरवर किले में 15-16 जुलाई 2026 की दरमियानी रात को हुई.

चोरी हुई तोप सिंधिया राजवंश/मुगल काल  की है और यह अष्टधातु या विशेष मिश्र धातुओं से बनी हुई है, जिस पर एक राजवंश का ऐतिहासिक राजचिह्न और फारसी/देवनागरी लिपि में शिलालेख अंकित हैं.


यह वाकई में बेहद हैरान करने वाली और अचरज की बात है. इतने भारी-भरकम तोप को,ऊंचे पहाड़ी से गायब कर देना अविश्वसनीय लगता है.


इतने बड़े तोप को उठाने के लिए निश्चित रूप से बड़ी क्रेन, चेन-पुली और बड़े ट्रक या क्रेन-ट्रैक्टर की जरूरत पड़ी होगी. चोरों ने इसके लिए पूरी रेकी की होगी.

यक़ीनन इस चोरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्कर गिरोह होगा,

फिर भी पुरातत्व विभाग और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी?

बिना स्थानीय "बहुत बड़े" लोगों के सहयोग के ये मुमकिन तो हुआ नहीं होगा?


अंतरराष्ट्रीय एंटीक ब्लैक मार्केट में इसकी अनुमानित कीमत 5 करोड़ रुपयों से ज्यादा बताई जा रही है.

पर हक़ीकत में ऐसी ऐतिहासिक धरोहरें "अमूल्य" होती हैं क्योंकि इनके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को पैसों में नहीं आंका जा सकता.


पहले भी मध्य प्रदेश से चोरी हुई कई दुर्लभ ऐतिहासिक मूर्तियां और एंटीक चीजें अंतरराष्ट्रीय तस्करों के जरिए अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के बड़े शहरों के सीक्रेट गैलरी और प्राइवेट कलेक्टर्स तक करोड़ों रुपये में बेची जा चुकी हैं.