वो गाना है ना–हर सवाल का जवाब नहीं मिल सकता. प्यार (काम) का हिसाब नहीं मिल सकता..
और इस सरकार में एक भी सवाल का जवाब नहीं मिल सकता..!
उल्टे सवाल के बदले सवाल,लानत मलामत ही मिलता है.
गृहमंत्री अमित शाह ने देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की उपस्थिति में 'सेवा संकल्प अभियान' की शुरुआत और घोषणा के सिलसिले में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी. गृहमंत्री से सवाल किये गए
गृहमंत्री ने हर एक सवाल को "खारिज" कर दिया.
मसलन—
जब मोदी सरकार के 2014 से अब तक के प्रमुख फैसलों पर राय मांगी गई, तो सवाल का जवाब देने के बजाय उसे यह कहकर टाल दिया गया कि "सार्वजनिक रूप से ऐसे प्रश्न नहीं होते"...
–राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता के लिहाज से गलवान मुद्दे पर सेना और देश की जनता की चिंताओं पर चर्चा करने के बजाय इसे "संवेदनशील" बताकर पारदर्शी जवाब देने से पूरी तरह इनकार कर दिया गया.
–सुरक्षा व्यवस्था पर अस्पष्टता दिखाई गई.अवैध रूप से वापस लौटने वाले लोगों को लोकेट करने की नीतियों पर पूछे गए व्यावहारिक सवाल को हास्य और तंज में उड़ा दिया गया.
–जब स्टेट पुलिस द्वारा दी गई क्लीन चिट और ED के आरोपों के विरोधाभास पर सहकारिता मंत्रालय के रुख के बारे में पूछा गया, तो उत्तरदायित्व लेने के बजाय पल्ला झाड़ लिया गया..
जनता द्वारा चुनी गई सरकार से उम्मीद की जाती है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा,कानूनी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक नीतियों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे.
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में गोपनीयता आवश्यक हो सकती है, लेकिन एक सीमा तक जनता को आश्वस्त करने वाली आधिकारिक जानकारी देना भी शासन का हिस्सा माना जाता है.
पर इस सरकार का रवैया तो शुरू से यही है–
बोलो मत, सिर्फ सुनो.
पूछो मत, चुप रहो...