Ruby Arun

Saturday, 20 June 2026

डोनाल्ड ट्रंप और जॉर्जिया मेलोनी की निजी लड़ाई, कूटनीतिक कड़वाहट में बदली!

 राष्ट्रपति #DonaldTrump और इटली की प्रधानमंत्री #Georgia_Meloni के बीच विवाद एक फोटो खिंचाने के दावे से शुरू हुआ,यह अब केवल एक तस्वीर खिंचाने की बात नहीं रह गई है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय संधियों, सैन्य बेस के इस्तेमाल और दो देशों की संप्रभुता के सम्मान की एक बड़ी कूटनीतिक लड़ाई में बदल गई है .

#ट्रंप ने इटली के टीवी चैनल #La7 को दिए इंटरव्यू में दावा किया कि मेलोनी ने G7 समिट के दौरान उनके साथ फोटो खिंचाने के लिए बहुत मिन्नतें की थीं. मुझे उन पर तरस आ गया और मैं मान गया.

मेलोनी ने इस पर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए एक वीडियो बयान जारी किया और ट्रंप के दावों को पूरी तरह से झूठा और मनगढ़ंत बताया.

आज ट्रंप ने फिर कहा कि मेलोनी ने उनके साथ तस्वीर खिंचाने के लिए बार-बार भीख मांगी. ऐसा मेलोनी ने इसलिए किया क्योंकि उनकी लोकप्रियता इटली में लगातार गिर रही है. ट्रंप ने आरोप लगाया कि जब #अमेरिका, #IRAN को परमाणु हथियार बनाने या हासिल करने से रोक रहा था, तब #Italy ने #America का साथ नहीं दिया.अपने लैंडिंग स्ट्रिप्स या रनवे का इस्तेमाल भी अमेरिकी सेना को नहीं करने दिया, जिससे भारी सैन्य और साजो-सामान की असुविधा हुई. अब जब अमेरिका ने सैन्य रूप से #ईरान को हरा दिया है, तो मेलोनी अपनी राजनीतिक रेटिंग सुधारने के लिए फिर से अमेरिका से दोस्ती करना चाहती हैं, लेकिन मेरी तरफ से उन्हें साफ़ ना है—"No thanks!!!"

मेलोनी ने ट्रंप के इन आरोपों को बिना किसी हिचकिचाहट के सीधे खारिज किया और बेहद कड़े शब्दों में लिखा:–

"राष्ट्रपति ट्रंप, ये लगातार हो रहे बिना किसी उकसावे के हमले पूरी तरह से senseless हैं. आपका दोस्त होने से मेरी लोकप्रियता में कोई मदद नहीं मिली है और न ही मेरी लोकप्रियता आपके साथ मेरे संबंधों पर निर्भर करती है. मेरी लोकप्रियता इटली के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने की मेरी क्षमता पर निर्भर करती है.

वैसे भी,मेरी लोकप्रियता आपकी चिंता का विषय नहीं है.मेरा सुझाव है कि आप अपनी लोकप्रियता पर ध्यान दें.

इटली एक संप्रभु राष्ट्र sovereign nation है और वह उन्हीं नियमों के साथ काम करेगा जो अमेरिकी सैन्य ठिकानों का उपयोग करने के लिए किए गए समझौतों हैं"

इटली के विदेश मंत्री #Antonio_Tajani ने ट्रंप के बयानों को मेलोनी और पूरे इटली का अपमान बताते हुए अपना निर्धारित अमेरिका दौरा तुरंत रद्द कर दिया है. उन्हें 21–22 जून को मियामी में इटली-यूएस बिजनेस फोरम' में हिस्सा लेना था और अमेरिकी विदेश मंत्री #Marco_Rubio से मुलाकात होनी थी. इटली के राष्ट्रपति #Sergio_Mattarella सहित सरकार के तमाम मंत्रियों ने मेलोनी का समर्थन किया है और ट्रंप के इस रवैये को एक पुराने सहयोगी देश के साथ 'धोखा' करार दिया है.



Again closure strait of hormuz to all vessels

 

Iran’s Revolutionary Guard Corps (#IRGC) has announced the closure of the #StraitOfHormuz to all vessels. The Navy has cited alleged ceasefire violations by the United States and Israel as the reason for


this move.

​The IRGC's announcement to close the #StraitOfHormuz just ahead of the US-Iran talks scheduled for June 21 in Switzerland is no coincidence. This is a calculated strategy by Iran to dictate its terms at the negotiation table and exert maximum pressure on the United States.

​This blockade is not the beginning of a war, but rather a "bargaining chip." If Iran does not secure tangible diplomatic or economic concessions during the Switzerland talks, this "choke point" could remain closed for an extended period, pushing the world into a new and catastrophic recession. It will be interesting to see whether the United States bows to this blackmail or puts on a display of military might. Washington currently cannot afford another major global war, and Iran is well aware of this vulnerability.

​Through this narrative, Iran is attempting to project itself on the global stage as "defensive" rather than the aggressor. Iran is also signaling its Middle Eastern proxy networks, the Houthis and Hezbollah, that it is playing on the front foot.

​#IRAN has made it clear that if it is cornered economically or militarily, it will not hesitate to choke the jugular vein of the global economy.

​The IRGC's allegations of ceasefire violations against #America and #Israel demonstrate that the regional conflict has now escalated into a phase that directly impacts global trade.

Friday, 19 June 2026

खी खी खी खी– सरकार और सरकार से जुड़े लोगों की "आधिकारिक" भाषा बन गई है.


 खी खी खी खी– सरकार और सरकार से जुड़े लोगों की "आधिकारिक" भाषा बन गई है.

सवाल का जवाब ना पता हो तो–

खी खी..

सवाल का जवाब नहीं देना हो तो–

खी खी..

और खी खी के साथ कुछ भी उल जुलूल फिजूल की बात कह कर जिम्मेदारियों, जवाबदेहियों से बच निकलना...


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव रहे,देश के सबसे शक्तिशाली नौकरशाहों में गिने जाने वाले और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा का ही जवाब सुन लीजिए भगवान #श्रीराम के मंदिर के दान पात्र से हुई 

सैकड़ों करोड़ रुपयों और गहनों की चोरी के सवाल पर... 😌

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्यों चुप हैं भगवान श्रीराम के मंदिर में हुई लूट पर!

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्यों चुप हैं भगवान #श्रीराम के मंदिर के दान


पात्र से हुई चोरी पर ? सबसे बड़ी जवाबदेही तो मोदी जी की ही बनती है ना ! 

2024 के आम चुनाव और उससे पहले, राम मंदिर निर्माण को प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा की एक बहुत बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में पेश किया गया. तो इससे जुड़े विवाद की जिम्मेदारी भी मोदी जी की ही बनती है.

जब किसी बड़े राष्ट्रीय या धार्मिक कार्य का राजनीतिक और चुनावी श्रेय किसी नेता या दल को मिलता है, तो वहां होने वाली कमियों या विवादों की जिम्मेदारी किस पर तय होनी चाहिए?

लोकतांत्रिक और नैतिक व्यवस्था में यह नियम लागू होता है कि जिस परियोजना या विज़न का नेतृत्व देश का शीर्ष नेता कर रहा हो, वहां की व्यवस्था को साफ-सुथरा रखने की नैतिक जिम्मेदारी भी कहीं न कहीं नेतृत्व पर आती है. हालांकि, तकनीकी और कानूनी रूप से ट्रस्ट एक स्वतंत्र निकाय है, लेकिन जनता की नजरों में सरकार और ट्रस्ट की छवि आपस में जुड़ी हुई है.

हिंदू बचाने आए हैं, सनातन बचाने आए हैं– का डंका, बेतहाशा पीटा गया.

ये किस तरह जगाया गया हिन्दुओं को कि वो अपने आराध्य की पूजन सामग्री पर ही डाका डालने लगा ? अपने भगवान को ही छलने लगा ?

सनातन को ये कैसे बचाया गया कि वो नारे लगाने वालों की ही लूट और डकैती का शिकार हो गया ?

मंदिर हों या सत्ता – देश को सिर्फ मूर्ख बनाया गया. जिन्होंने धर्म के नाम पर सत्ता पाई, उन्होंने ही धर्म/हिंदू को सबसे ज्यादा क्षति पहुँचा

ई...

ना राम की मर्यादा का पालन किया ना सीता का सम्मान रखा..

बस लालची, भ्रष्ट, अनैतिक कृत्य करने वाले चोर लुटेरों असुरों का झुंड तैयार कर दिया..

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Thursday, 18 June 2026

भारत में बेरोज़गारी अमेरिका में निवेश !

 

मोदी जी देश को बताएं कि अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों के पीछे का सच क्या है?
देश की जनता को ये जानने का पूरा हक है कि देश की गाढ़ी कमाई और कॉर्पोरेट संसाधन किस दिशा में जा रहे हैं....
एक तरफ नरेंद्र  मोदी देश के भीतर 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' का गा गा कर कसीदा पढ़ते रहते हैं. पूरी दुनिया घूम टहल कर विदेशी निवेशकों को भारत बुलाने की हवाई बातें करते हैं .
दूसरी तरफ,अमेरिकी राष्ट्रपति सरेआम मंच से कहते हैं कि "भारत के प्रधानमंत्री अमेरिका में बहुत पैसा खर्च कर रहे हैं और वहां नौकरियां पैदा कर रहे हैं.
यह इस सदी का सबसे बड़ा आर्थिक विरोधाभास है कि भारत का युवा आज दशकों की सबसे ऊंची बेरोज़गारी दर झेलने को मजबूर है,और मोदी राज में भारतीय कॉर्पोरेट्स को भारत के बजाय अमेरिका में निवेश करना और वहां रोजगार सृजित करना ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद लग रहा है.
आखिर जो सरकार खुद निवेश के लिए दुनिया का मुंह ताकती है, उसके राज में ऐसा क्या हो रहा है कि देश का पैसा बाहर जा रहा है?
क्या नरेंद्र मोदी को, देश के प्रधानमंत्री के तौर पर इतनी समझ भी नहीं है कि हेडलाइंस मैनेजमेंट और कूटनीतिक बयानों से देश का पेट नहीं भरता.
देश को प्रधानमंत्री के खोखले वादों की नहीं, बल्कि ठोस और पारदर्शी आर्थिक नीतियों की ज़रूरत है.
चूंकि यह मामला सीधे तौर पर देश के करोड़ों लोगों की रोजी रोटी, देश  की आर्थिक नीतियों और वैश्विक छवि से जुड़ा है, इसलिए सरकार की तरफ से आधिकारिक डेटा या स्पष्टीकरण आना बेहद जरूरी है कि भारत का जो पैसा अमेरिका को समृद्ध और विकसित बनाने में जा रहा है तो
* क्या यह निवेश आम आदमी के टैक्स के पैसे यानी सरकारी खजाने से हो रहा है या निजी क्षेत्र द्वारा?

* इससे भारत के घरेलू उद्योगों और विदेशी मुद्रा भंडार पर क्या असर पड़ रहा है?

* भारतीय बाजारों से कितनी भारी मात्रा में पोर्टफोलियो निवेश बाहर गया है ?
और भारतीय शेयर बाजार से कितने विदेशी निवेशकों ने पैसा निकाला है कि जिससे रुपये पर दबाव बना है और रुपया बेहद कमजोर हुआ है?

* जिन बड़ी विदेशी कंपनियों के भारत आने की उम्मीद थी वो कंपनियां वियतनाम,थाईलैंड या बांग्लादेश क्यों चली गईं ?

* भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशों में किए जा रहे निवेश से भारत के नागरिकों को क्या हासिल हो रहा है?

* देश से बाहर जा रहे धन यानी #CapitalOutflow और घरेलू बेरोज़गारी के बीच के इस चक्रव्यूह को सरकार कैसे तोड़ेगी?

#FDI #EconomicCrisis #MakeInIndia #Unemployment #IndianEconomy #Transparency

Wednesday, 17 June 2026

अब इंडो पैसिफिक ओशियन पर कब्जा करेगा अमेरिका ?

 


#मोदी-ट्रंप मीटिंग से पहले #अमेरिका ने भारत को झटका दे दिया है.अमेरिका ने सैन्‍य कमांड से 'भारत' को बाहर कर दिया है.

#America के रक्षा विभाग ने घोषणा की है कि उसके सबसे बड़े सैन्य कमांड #Indo_Pacific_Command से वह #Indo शब्द हटा रहा है. उसने अपना पुराना नाम #US पैसिफिक कमांड' फिर से अपनाने का फैसला किया है और इसमें से #हिंदमहासागर' का जिक्र हटा दिया गया है.

#DonaldTrump के पहले कार्यकाल के दौरान 'पैसिफिक कमांड' को 'इंडो-पैसिफिक' नाम दिया गया था और ऐसा #China को रोकने के लिए #भारत के रणनीतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए किया गया था.


तो क्या अब अमेरिका की नजर में भारत के पास कोई रणनीतिक भूमिका नहीं बची है? क्या #Asia-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका के लिए भारत का कोई भू-राजनीतिक महत्व नहीं रह गया है?

अमेरिका ने ये फैसला तब किया जब आज फ्रांस में प्रधानमंत्री #नरेन्द्र_मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति #डोनाल्ड_ट्रंप की मुलाकात होने वाली है.

अमेरिका के इस कदम के बाद भारत के तथाकथित 'बैकयार्ड' दक्षिण एशिया में अब चीन और #Pakistan का भू-राजनीतिक, भू-आर्थिक और सैन्य दबदबा होगा.

अमेरिका का यह सैन्य कमांड अमेरिका के पश्चिमी तट के पास के पानी से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला हुआ है.

तो सवाल ये है कि ट्रंप की #चीन और #पाकिस्तान को लेकर क्या रणनीति है?

क्योंकि #हिंद_महासागर में चीन की घेराबंदी के लिए भारत के बिना अमेरिका की कोई भी रणनीति अधूरी है. फिर भी अमेरिका ने ये फैसला किया है?

यहां याद रखने वाली बात ये है कि अमेरिका ने पाकिस्तान को #IRAN से संबंधित अपने सबसे बेहद जरूरी मसलों में भी साझीदार बनाये रखा है.


जब भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कोई बड़ा Symbolism बदलता है, तो उसके पीछे गहरे कूटनीतिक संदेश छिपे होते हैं. 'इंडो-पैसिफिक' से दोबारा 'पैसिफिक' कमांड पर लौटना निश्चित रूप से एक बड़ा नीतिगत बदलाव संकेत करता है.

तो क्या इसका मतलब यह है कि अमेरिका की नजर में भारत का महत्व खत्म हो गया है?


ये संशय और सवाल इसलिए क्योंकि जियो पॉलिटिक्स सिर्फ उतना नहीं होता जितना दिखाई देता है. यहां नेताओं के मुंह से निकले एक एक शब्द के कई मायने होते हैं.

इसीलिए 'इंडो-पैसिफिक कमांड' से 'इंडो' शब्द हटाने के भी कई मतलब हैं.


तो क्या भारत ये उम्मीद करे अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की जब वो आज ट्रंप से मिलेंगे तो यह स्पष्ट करेंगे ट्रंप के साथ कि यदि अमेरिका 'इंडो-पैसिफिक' के विचार से पीछे हटता है, तो भारत भी अमेरिकी प्राथमिकताओं जैसे दक्षिण चीन सागर में अपनी दिलचस्पी कम कर सकता है??


क्योंकि यह ट्रंप का यह कदम  'अमेरिका फर्स्ट' और सौदेबाजी वाली विदेश नीति का हिस्सा है, जहां वह हर रिश्ते की री-पैकेजिंग करना चाहते हैं. तो क्या मोदी जी भी भारत की अखंडता और संप्रभुता की ध्यान में रख कर अमेरिका के साथ अपने "निजी" रिश्तों  की री पैकेजिंग करने की दृढ़ता दिखा पाएंगे ?

Has Modi Ji been stunned by Trump–G7 summit

 

Has Modi Ji b


een stunned by Trump, just like someone gets paralyzed by fear (like a snake's gaze)?

Modi Ji has become completely silent and passive.

Trump isn't just speaking; he is commanding.

Modi Ji’s laughter, banter, voice, smiles, giggles, and "Instagram" presence have all vanished.

​Listen to Trump's controlling tone—

​"We have over $19.2 trillion coming in, and we're building factories, we're building everything. Prime Minister Modi is building a lot in the United States, he is spending a lot of money in the United States, so we appreciate that—jobs... But, I just want to say that he has been a friend of mine for a long time, and we've always had a great relationship, and 'it's great to be with you'."


​(Obviously, America's treasury is being filled with the money from Indians' pockets).

Thank you very much...

​$19.2 trillion in numbers means: ₹1,593,600,000,000,000, which is approximately ₹1,593.6 lakh crore...

Although this is in the context of total global investment or revenue, and not just India's investment.

But within this $19.2 trillion, there is a massive amount invested by Modi Ji from India. The investments made by India are creating millions of jobs in America.

​And here in our own country, students and the unemployed are being beaten with police batons and sticks, and are being sent to jail for jobs...