#RichardNixon ने #IndiraGandhi को #US_Navy का Seventh Fleet भेजने की धमकी दी थी, लेकिन वे नहीं डरीं. उन्होंने निक्सन को स्पष्ट कह दिया कि #भारत वही करेगा जो उसे सही लगता है. #इंदिरा_गांधी ने निक्सन के दबाव में नहीं आईं और अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम रहीं.
लेकिन नरेंद्र मोदी ट्रंप के सामने पूरी तरह झुक गए हैं. Rahul Gandhi इस मामले में जो तर्क दे रहे हैं, वे बिल्कुल सही हैं.
"इंदिरा गांधी ने निक्सन के सामने जो साहस दिखाया, वह भारतीय नेतृत्व की एक सशक्त मिसाल है.
:·– राम पुनियानी
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन द्वारा बंगाल की खाड़ी में 'सातवां बेड़ा' भेजने की धमकी के पीछे कई रणनीतिक और कूटनीतिक कारण थे.
अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के आधार पर निक्सन को यह डर था कि इंदिरा गांधी का इरादा केवल बांग्लादेश बनाना ही नहीं है, बल्कि वह पश्चिमी पाकिस्तान (आज का पाकिस्तान) की सेना को भी पूरी तरह खत्म कर देना चाहती हैं.
उन्हें डर था कि अगर पाकिस्तान एक देश के रूप में बिखर गया, Middle East तक जाने वाला अमेरिकी रास्ता बंद हो जाएगा.
उस समय शीत युद्ध चरम पर था. अमेरिका, पाकिस्तान को दक्षिण एशिया में अपना एक महत्वपूर्ण सहयोगी मानता था.निक्सन और उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हेनरी किसिंजर को डर था कि अगर भारत पाकिस्तान को पूरी तरह हरा देता है, तो इस क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव खत्म हो जाएगा और सोवियत संघ का दबदबा बढ़ जाएगा.
निक्सन उस समय चीन के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे थे, और इस काम में पाकिस्तान एक 'बिचौलिए' की भूमिका निभा रहा था.
निक्सन को लगा कि अगर उन्होंने पाकिस्तान की मदद नहीं की, तो चीन को लगेगा कि अमेरिका अपने दोस्तों का साथ नहीं देता, जिससे उनकी चीन के साथ होने वाली डील खतरे में पड़ सकती थी.
अमेरिका का मुख्य उद्देश्य युद्ध में सीधे शामिल होना नहीं, बल्कि भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना था.
सातवें बेड़े के परमाणु संचालित विमानवाहक पोत USS Enterprise को बंगाल की खाड़ी की ओर भेजकर निक्सन यह संदेश देना चाहते थे कि भारत ढाका यानी पूर्वी पाकिस्तान पर कब्जा न करे.
और भारत पश्चिमी पाकिस्तान पर हमला करके उसे पूरी तरह नष्ट न कर दे.
निक्सन का सबसे बड़ा डर यह था कि अगर भारत इस युद्ध में पूरी तरह जीत जाता है, तो दक्षिण एशिया में USSR का वर्चस्व स्थापित हो जाएगा .
भारत और सोवियत संघ के बीच 1971 की मित्रता संधि ने अमेरिका को बेचैन कर दिया था. निक्सन को लगा कि पाकिस्तान की हार का मतलब है अमेरिकी प्रभाव की हार और रूसी साम्यवाद की जीत.
उस दौर के रिकॉर्ड्स बताते हैं कि निक्सन और किसिंजर की निजी बातचीत में इंदिरा गांधी के प्रति काफी कड़वाहट थी, क्योंकि उन्होंने अमेरिकी कूटनीति को पूरी तरह विफल कर दिया था.





