Ruby Arun

Monday, 16 February 2026

Allowing American Ambassador #SergioGor entry into the #Western_Command is a shocking compromise with our #Strategic_Autonomy and a highly dangerous threat to India's sovereignty

 Are India's operational military commands tourist spots for foreign diplomats?

Allowing American Ambassador #SergioGor entry into the #Western_Command is a shocking compromise with our #Strategic_Autonomy and a highly dangerous threat to India's sovereignty. Why is the Government of India respectfully escorting a foreign diplomat to a place where national security plans are formulated with extreme secrecy? What is the pressure? What is the conspiracy? What is the temptation?

#America is not only tightening its grip on #India's market and economic front but also on India's energy and defense...

First, #America pressured India to reduce the purchase of #Russian oil in exchange for some concessions in a #TradeDeal. Now, by attempting to show dominance over the Indian military and weaponry, America is trying to distance India from Russia. America has unofficially instructed the Indian government to stop buying weapons from #Russia and instead enter into arms deals with America.

The arrival of America’s new ambassador to India, #SergioGor, at the Indian Army’s #Western_Command headquarters in #Chandigarh and his visit to the AH-64E #Apache attack helicopter center is part of the process of America building pressure on India for new arms deals.

America wants India’s military power, 60-70% of which is dependent on Russia, to shift toward America, France, and Israel. Under the guise of maritime and border security, India is in the process of purchasing 31 'hunter-killer' MQ-9B Predator drones from America. This will ultimately benefit America because it wants to monitor #China from the #Indo_Pacific region. This is part of the Defense Authorization Act of America’s 2026 National Defense Strategy.

America has handed India a list for the purchase of MQ-9B Predator drones, jet engine technology, and even advanced aircraft like the F-35. America’s irritation also stems from the S-400 missile defense system deal between India and Russia.

When Turkey bought the S-400 from #Russia, America imposed sanctions on it and expelled it from the F-35 program. This is because America has a law called #CAATSA (Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act). Under this, America can impose sanctions on any country that buys major weapons like the S-400 missile system from Russia.

Russian weapons have been and still are the backbone of the Indian military for years. The Indian Army is 70% dependent on Russian weaponry—whether it is #AK-203 assault rifles, the #S_400_Triumf missile system, the Indian Navy’s #Talwar_class_Frigates (#IN_Tushil, #INS_Tamal), the #Sukhoi_Su_30_MKI, #BrahMos, or drones, jet engines, tanks, rifles, anti-aircraft missiles, or #DRDO. All of these have flourished for decades with Russia’s cooperation, and these defense ties have stood the test of time.

But it wouldn't be surprising if America, just as it blackmailed India by imposing heavy #Tariffs in the #Trade_Deal regarding Russian oil, does the same in arms deals under the pretext of #CAATSA.

If this happens, it will be a major gamble with India's security and the strength of the Indian military. But the point remains:

If there is #Surrender, then it is



#Possible..

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर को Western Command में प्रवेश की अनुमति देना हमारी Strategic Autonomy और भारत की संप्रभुता से बेहद खतरनाक समझौता

 भारत के Operational Military Commands विदेशी राजनयिकों के लिए पर्यटन स्थल हैं क्या?

अमेरिकी राजदूत #सर्जियो_गोर को #Western_Command में प्रवेश की अनुमति देना हमारी #Strategic_Autonomy के साथ एक हैरान कर देने वाला और भारत की संप्रभुता से बेहद खतरनाक समझौता



है.

जहां बेहद गोपनीय तरीके से राष्ट्रीय सुरक्षा की योजना बनती है वहां एक विदेशी राजनयिक को अभूतपूर्व तरीके से भारत सरकार आदर सहित पहुंचा रही है. क्यों? क्या दबाव है? क्या साजिश है? किस बात का प्रलोभन है?

यह बात बेहद चिंताजनक इसलिए भी है कि भारत में अमेरिका के राजदूत #Sergio_Gor के पास न केवल भारत,बल्कि #पाकिस्तान और पूरे दक्षिण और मध्य एशिया की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है.

पाकिस्तान के लिए उत्तरी कमान भारतीय सेना की वह "फौलादी दीवार" है जो उसके कश्मीर एजेंडे को सफल नहीं होने देती है.

#Sergio_Gor के पास पाकिस्तान के अलावा अफगानिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और मध्य एशियाई देशों के साथ अमेरिका के संबंधों की देखरेख और समन्वय करते हैं. ऐसे व्यक्ति को देश के सबसे अहम और सबसे गोपनीय रक्षा कमांड की सैर कराना, महज मनोरंजन और आतिथ्य तो हो नहीं सकता?

भारतीय सेना की उधमपुर स्थित #Northern_Command पाकिस्तान के साथ भारत के सुरक्षा समीकरणों में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. यह कमान न केवल रक्षा करती है, बल्कि रणनीतिक रूप से पाकिस्तान की हर चाल का जवाब देने वाला मुख्य केंद्र है.

उत्तरी कमान के पास लगभग 740 किलोमीटर लंबी #LoC की सुरक्षा की जिम्मेदारी है. यह वह क्षेत्र है जहाँ #पाकिस्तान के साथ सबसे अधिक संघर्ष होता है.

आतंकवादियों की सीमा पार से घुसपैठ को रोकना,पाकिस्तान द्वारा किए जाने वाले किसी भी युद्धविराम उल्लंघन का मुंहतोड़ जवाब उत्तरी कमान की ही जिम्मेदारी है.

रणनीतिक रूप से #उत्तरी_कमान ही #Siachen को नियंत्रित करती है, जो पाकिस्तान और चीन के बीच एक "दीवार" की तरह काम करता है.

यदि भारत यहां से हटता है या जरा सी भी चूक होती है तो पाकिस्तान और #चीन की सेनाएं Point NJ9842 के पार सीधे जुड़ सकती हैं. जो #लद्दाख और #कश्मीर के लिए बहुत बड़ा खतरा हो सकता है.

पाकिस्तान की सीमाओं के भीतर किए गए बड़े ऑपरेशन्स इसी कमान के तहत नियोजित हुए थे:

2016 का #Surgical_Strike.

#उरी हमले के बाद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर #PoK में आतंकी लॉन्च पैड्स को नष्ट करना.

#बालाकोट_एयरस्ट्राइक के समय वायुसेना के ऑपरेशन के दौरान जमीनी स्तर पर सुरक्षा और तैयारी को बनाए रखने का काम भी इसी Northern Command ने किया था.

पाकिस्तान के #Proxy_War को विफल करने में इसी कमान की राष्ट्रीय राइफल्स #RR की सबसे बड़ी भूमिका थी.

सोचिए कि एक ऐसी जगह जो भारत की सुरक्षा, संप्रभुता, अखंडता और एकता को बनाए रखने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है, वहां उस अमेरिकी देश के राजनयिक को तफरीह करने भेज दिया जाता है, जिसका राष्ट्रपति व्यापार के नाम पर भारत को ब्लैकमेल करता है. जो भारत के दुश्मन देश पाकिस्तान को अपने पाले में लिए घूमता है और भारत में ऐसे व्यक्ति को राजदूत बनाता है जिसको पाकिस्तान की भी जिम्मेदारी दिए हुए होता है...


मोदी जी ये आपका वाला #संयोग नहीं है #DonaldTrump का अपने देश के खिलाफ #प्रयोग है....







#अमेरिका सिर्फ #भारत के बाजार और आर्थिक मोर्चे पर ही नहीं बल्कि भारत की ऊर्जा और रक्षा पर भी शिकंजा कस रहा है ...

पहले तो #America ने #TradeDeal में कुछ रियायतों के बदले भारत पर #रूसी तेल की खरीद कम करने का दबाव बनाया.

अब अमेरिका, भारतीय सेना और हथियारों पर अपना प्रभुत्व दिखाने की कोशिश करते हुए भारत को रूस से दूर करने की कोशिश कर रहा है. अमेरिका ने अनऑफिशियली भारत सरकार को निर्देश दे दिया है कि भारत #Russia से हथियार ना खरीद कर अमेरिका के साथ हथियारों का सौदा करे.

भारत में अमेरिका के नए राजदूत #SergioGor का #चंडीगढ़ स्थित भारतीय थलसेना के #Western_Command मुख्यालय पहुंचना और AH-64E #Apache लड़ाकू हेलीकॉप्टर केंद्र का दौरा करना, अमेरिका द्वारा भारत पर नए हथियार सौदों के लिए दबाव बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है.

अमेरिका चाहता है कि भारत की सैन्य शक्ति का 60-70% हिस्सा जो रूस पर निर्भर है,अमेरिका, फ्रांस, इजरायल की ओर शिफ्ट हो जाए.

भारत,समुद्री और सीमा सुरक्षा के नाम पर अमेरिका से 31 'हंटर-किलर' ड्रोन MQ-9B प्रीडेटर, खरीदने की प्रक्रिया में है. जिसका फायदा अंततः अमेरिका की ही होगा क्योंकि #Indo_Pacific क्षेत्र से अमरीका #China की निगरानी करना चाहता है. यह अमेरिका की 2026 की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति के डिफेंस ऑथोराइजेशन एक्ट का हिस्सा है.

अमेरिका ने भारत को MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन, जेट इंजन की तकनीक, और यहाँ तक कि F-35 जैसे एडवांस विमानों की खरीद करने की लिस्ट पकड़ा दी है.

अमेरिका की तिलमिलाहट, भारत और रूस के बीच S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली का सौदे से भी है.

जब तुर्की ने #रूस से S-400 खरीदा था तो अमेरिका ने उस पर प्रतिबंध लगा दिए और उसे F-35 कार्यक्रम से बाहर कर दिया. क्योंकि अमेरिका के पास #CAATSA यानी Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act नाम का एक कानून है. इसके तहत जो भी देश रूस से बड़े हथियार जैसे S-400 मिसाइल सिस्टम खरीदता है, उस पर अमेरिका प्रतिबंध लगा सकता है.

रूसी हथियार वर्षों से और आज भी भारतीय सेना की रीढ़ हैं. भारतीय सेना 70 फीसदी रशियन हथियारों पर ही निर्भर है. चाहे वो #AK-203 असॉल्ट राइफलें हों.#S_400_Triumf मिसाइल सिस्टम हो, भारतीय नौसेना का #Talwar_class_Frigates #IN_Tushil #INS_Tamal हो,

#Sukhoi_Su_30_MKI हो, #BrahMos हो या की ड्रोन और जेट इंजन, टैंक, राइफल,एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल हों या फिर #DRDO.

सभी दशकों से रूस के सहयोग से ही पनपे हैं और ये रक्षा संबंध समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं.


लेकिन कोई बड़ी बात नहीं कि जिस तरह से रूसी तेल के मसले पर #ट्रेड_डील में अमेरिका ने भारत पर पहले भारी भरकम #Tarrif लगा कर ब्लैकमेल किया, वैसा ही #CAATSA की आड़ में हथियारों के सौदे में भी,ना कर बैठे.

अगर ऐसा हुआ तो यह भारत की सुरक्षा और भारतीय सेना की मजबूती के साथ बहुत ही बड़ा खिलवाड़ होगा. 

पर बात वही है ना कि

#Surrender है तो #मुमकिन है..

Thursday, 12 February 2026

भारतीय मीडिया द्वारा जेफरी ऐप्सटीन को बचाने का खेल

 इशारे समझिए! 

ये थेथरई वाली भूमिका तैयार की जा रही है उन भारतीय नेताओं को बचाने की, जिनके संबंध #JeffreyEpstein से रहे हैं और जिनके नामों का खुलासा #EpsteinFiles के जरिए होनेवाला है.

इसीलिए पूरी बेशर्मी और अमानवीयता के साथ #जेफरी_एपस्टीन के पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ का फर्क समझाया जा रहा है. उसे महज एक #Power_Broker का जामा पहनाया जा रहा है. ताकि भारत की जनता के दिमाग में ये घुसेड़ा जा सके कि अगर साहब, बड़े साहब, महा साहब अगर मिले भी होंगे Jeffrey Epstein से तो पावर या फाइनेंस #Liaisoning के लिए ना कि #Pimping के लिए.. 


पर एक बात ये सत्ता के दलाल नहीं बता रहे कि जिस व्यक्ति का धंधा ही #Rape #Prostitution #Pedophilia और #Blackmailing की मार्फत ही #पावर_ब्रोकिंग करना हो– तो उसका प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ अलग कैसे हो सकता है? 

और जो भी भारतीय नेता, जेफरी से 2008 के बाद मिले हैं, जब जेफरी को नाबालिग बच्चियों से वेश्यावृत्ति कराने के आरोप में सजा हो चुकी थी– उनकी पर्सनल लाइफ, जेफरी के प्रोफेशनल–पर्सनल लाइफ से अलग कैसे ?


ट्रेड डील में भारत का अमेरिका के सामने सरेंडर, रूस और चीन की दोस्ती भारत के लिए घातक


 #अमेरिका के साथ जो #TradeDeal हुई है, उसका खाका दरअसल 2023 जून– जुलाई में ही तैयार हो चुका था. 

तब से अब तक बस "घुड़की" देने का खेल चल रहा था.और भारत के प्रधानमंत्री ने अपनी ज़बान सिल रखी थी/रखी है.…


#DonaldTrump ने यहां हमारे देश को #मोहरा बनाया.

वे भारत के जरिए #Russia के तेल व्यापार को झटका देना चाहते थे और "भारत" को ही #प्यादा बना कर भारत की सरकार पर अपनी "गिरफ्त" का दम खम #Putin को दिखाना चाहते थे.

इस 2023 के इस वीडियो में U.S. State Department में Assistant Secretary #S_Paul_Kapur का दावा सुनिए....

#भारत वही कर रहा है,जो हम चाहते थे.. 


और उन्होंने ये दावा यूएस हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी की एक सुनवाई में अमेरिकन राजनीतिज्ञ Keith Self के सवाल "भारत ने कथित तौर पर रूसी तेल के आयात को बंद करने का वादा किया है, लेकिन अमेरिका इसे कैसे enforce करेगा?" के जवाब में ये बात कही थी.


S. Paul Kapur बता रहे हैं कि किस तरह भारत, रूसी तेल की अपनी खरीद को धीरे धीरे कम करेगा और अमेरिकी ऊर्जा अधिक खरीदेगा...


#Chronology पर गौर कीजिए..

की कैसे भारत ने पहले #रूस से तेल आयात का अनुबंध किया. फिर अमेरिका के सामने "सरेंडर" कर के अमेरिकी शर्तों पर ही #ट्रेड_डील कर लिया और रूस से तेल मंगाने की प्रक्रिया बिल्कुल ही धीमी कर दी...


अब भारत, अमेरिका की मर्जी पर निर्भर है. रूस से सम्बन्धों में कड़वाहट आ चुकी है.

#China को रूस से तेल ग्लोबल मार्केट रेट से काफी कम कीमत पर मिल रहा है. इससे चीन का "इम्पोर्ट बिल" कम हो रहा है और उसकी अर्थव्यवस्था को राहत मिल रही है. रूस और चीन के बीच तेल का ज्यादातर व्यापार अब युआन #Yuan और #Ruble में हो रहा है.

इससे चीन को अमेरिकी $ की जरूरत कम पड़ रही है.यह चीन की करेंसी 'युआन' को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने में मदद कर रहा है. 

चीन सिर्फ #Crude_Oil ही नहीं खरीद रहा बल्कि उसे रिफाइन करके दूसरे देशों को ऊंचे दामों पर बेचकर मुनाफा भी कमा रहा है.

रूस से तेल खरीदकर चीन एक तरह से रूस की अर्थव्यवस्था को भी सहारा दे रहा है.इससे दोनों देशों के बीच दोस्ती और मजबूत हुई है.

अमेरिका और पश्चिमी देशों के खिलाफ चीन को एक मजबूत और परमाणु संपन्न साथी का साथ मिल रहा है.

पहली बात तो ये कि 

भारत के लिए यह बेहद चिंता का विषय है क्योंकि चीन हमारा प्रतिद्वंदी है.

रूस का पूरी तरह चीन के खेमे में जाना भारत के पुराने और भरोसेमंद रक्षा संबंधों के लिए बिल्कुल ही अच्छा नहीं है.

दूसरी बात 

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% तेल आयात करता है. अगर भारत रूसी तेल का कम आयात करेगा तो भारत को फिर से #Middle_East या अमेरिका पर निर्भर होना पड़ेगा. दूसरे देशों से तेल खरीदना रूसी तेल के मुकाबले ज्यादा महंगा है. इस वजह से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें और महंगाई बढ़ेगी.


पर मोदी जी को इससे क्या ही फर्क पड़ना है. महंगाई बढ़ेगी तो आपकी हमारी जेब कटेगी. मोदी जो को तो बाद अमेरिका को खुश रखने जरूरत है, वरना जाने कौन सी फाइल खुल जाएगी...

इसलिये

#जनहित से बेहतर #स्वहित 🤐

Thursday, 5 February 2026

#EpsteinFiles:- क्या #Digital_India की आड़ में दुनिया के क्रूरतम सेक्स अपराधी को मिल रही थी भारत में वीआईपी एक्सेस?

 

#EpsteinFiles:- क्या #Digital_India की आड़ में दुनिया के क्रूरतम सेक्स अपराधी को मिल रही थी भारत में वीआईपी एक्सेस?






केंद्रीय मंत्री #HardeepSinghPuri की इसमें क्या भूमिका थी?
हाल ही में सामने आए #EpsteinFiles के दस्तावेज बताते हैं कि किस तरह एक सजायाफ्ता अंतरराष्ट्रीय अपराधी को भारतीय कूटनीतिक तंत्र तक का रास्ता दिया गया.
24 अक्टूबर 2014 को #Jeffry_Epstein –जिसे 2008 में ही नाबालिगों की सेक्स ट्रैफिकिंग का दोषी ठहराया जा चुका था—उसने तत्कालीन भाजपा सदस्य और पूर्व राजनयिक हरदीप पुरी को ईमेल किया– "मेरी असिस्टेंट को भारत के लिए तुरंत वीजा चाहिए"
एक रिटायर हो चुके अधिकारी और तत्कालीन भाजपा नेता ने अपनी पूरी राजनीतिक और कूटनीतिक ताकत झोंक दी. #हरदीप_सिंह_पूरी ने रिटायर्ड राजदूत प्रमोद कुमार बजाज और न्यूयॉर्क के संपर्कों को ईमेल कर निर्देश दिए कि एपस्टीन का काम "प्रायोरिटी" पर हो.
2013 में हरदीप पुरी IFS से रिटायर होते हैं,जनवरी 2014 में वह #BJP में शामिल होते हैं और अक्टूबर 2014 में एक सजायाफ्ता अपराधी के लिए 'वीजा सर्विस' का जरिया बनते हैं.
2008 में ही एपस्टीन के 'पीडोफाइल' और 'यौन तस्कर' होने की खबर पूरी दुनिया को थी. क्या हरदीप पुरी जैसे अनुभवी पूर्व राजनयिक और भाजपा नेता के तौर पर वे नहीं जानते थे कि एपस्टीन कौन है?
राजनीति में कुछ भी मुफ्त नहीं होता. हरदीप पुरी ने एपस्टीन के लिए अपनी सारी हदें पार कीं, तो सवाल उठता है कि इसके बदले में उन्हें क्या हासिल हुआ? एपस्टीन का ऐसा कौन सा 'एहसान' था जिसे चुकाने की उन्हें इतनी बेताबी थी?
हरदीप सिंह पुरी ने बाद में सफाई दी थी कि Epstein से उनकी बातचीत 'डिजिटल इंडिया' को लेकर थी.
सवाल यह है कि एक यौन अपराधी भारत के इतने महत्वपूर्ण मिशन में किस हैसियत से सलाह दे रहा था? क्या डिजिटल इंडिया को एक अपराधी के इनपुट की जरूरत थी?
13 नवंबर 2014 को भेजे गए ईमेल में हरदीप सिंह पुरी ने #जेफरी_एपस्टीन और #Reed_Hoffman को भारत में इंटरनेट आधारित आर्थिक गतिविधियों, 'डिजिटल इंडिया' और सॉफ्टबैंक जैसे बड़े निवेशों के बारे में विस्तार से बताया था.
3 अक्टूबर 2014 को उनकी रीड हॉफमैन के साथ सिलिकॉन वैली में बातचीत हुई थी, जिसके बारे में उन्होंने एपस्टीन को जानकारी दी थी.

एक केंद्रीय मंत्री का नाम अंतरराष्ट्रीय सेक्स स्कैंडल से जुड़े व्यक्ति के साथ जुड़ना केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि का मामला है या नहीं.फिर भी मोदी सरकार ने इस पर मुंह में दही जमा रखा है? भारत के मान,सम्मान,स्वाभिमान की प्रधानमंत्री को कोई परवाह ही नहीं?

ब्रिटिश राजनीति के 'किंगमेकर' का पतन–पीटर मण्डलसन–एप्स्टीन फाइल्स

 #British राजनीति के 'किंगमेकर' का पतन–

ब्रिटिश राजनीति के दिग्गज लॉर्ड #Peter_Mandelson ने हाउस ऑफ लॉर्ड्स और लेबर पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. वजह है #Jeffrey_Epstein के साथ उनके गहरे और संदिग्ध रिश्तों का खुलासा.

"जेफरी एपस्टीन के पेरिस स्थित फ्लैट में एक महिला के साथ पीटर मैंडेलसन की अंडरवियर में एक तस्वीर भी सामने आई है.

अमेरिकी न्याय विभाग ने जो #EpsteinFiles सार्वजनिक कीं,इनमें चौंकाने वाले ईमेल और बैंक ट्रांजेक्शन सामने आए हैं, जो बताते हैं कि मैंडेलसन और एपस्टीन के रिश्ते सिर्फ सामाजिक नहीं, बल्कि व्यावसायिक भी थे.

सबसे गंभीर आरोप यह है कि 2009 में, जब मैंडेलसन ब्रिटेन के बिजनेस सेक्रेटरी थे, उन्होंने एपस्टीन को संवेदनशील सरकारी ब्रीफिंग और बैंकिंग संकट से जुड़ी गुप्त जानकारी भेजी थी.

पुलिस अब इसकी जांच "Misconduct in Public Office" के तहत कर रही है.

दस्तावेजों के अनुसार 2003-04 में एपस्टीन ने मैंडेलसन को $75,000 भेजे.

मैंडेलसन के पार्टनर को भी वित्तीय मदद मिलने के सबूत मिले हैं.

मैंडेलसन ने एपस्टीन को अपना "बेस्ट पाल" बताया था और उसकी कानूनी सजा के दौरान भी सलाह दी थी.

प्रधानमंत्री #KeirStarmer ने मैंडेलसन को अमेरिका में राजदूत नियुक्त किया था, लेकिन इस खुलासे के बाद उन्हें बर्खास्त करना पड़ा.

अब सरकार पर दबाव है कि वह मैंडेलसन के #Lord के खिताब को भी वापस ले.

मैंडेलसन को "Comeback King" कहा जाता था क्योंकि वे दो बार कैबिनेट से इस्तीफा देने के बाद भी वापस आए थे. लेकिन इस बार, एपस्टीन फाइल्स के दस्तावेजी सबूतों ने उनकी राजनीतिक पारी पर लगभग पूर्णविराम लगा दिया है.

#UKPolitics #EpsteinScandal 

#PeterMandelson #LabourParty #EpsteinFilesNo



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Tuesday, 3 February 2026

ये "फादर ऑफ ऑल डील्स" नहीं बल्कि #Father Of #Kneel है ...

 ये "फादर ऑफ ऑल डील्स" नहीं बल्कि #Father Of #Kneel है ...

यह भारत के #किसानों पर प्रहार है.

हमारी सरकार ने #Donald_Trump के आगे घुटने टेक दिए हैं. 

आखिर कौन से ऐसे दबाव या ब्लैकमेलिंग का इस्तेमाल ट्रंप ने किया कि देश का नुकसान करके भी जश्न मनाया जा रहा है. मोदी जी को जीत की फूल मालाएं पहनाई जा रही हैं . 

प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका से $500 अरब के ऊर्जा, तकनीक और रक्षा उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है.

इतनी बड़ी मात्रा में आयात करने से भारत का व्यापार संतुलन #Balance_of_Trade अमेरिका के पक्ष में झुक जाएगा. देश का व्यापार घाटा बढ़ जाएगा. 

इस डील से हमारे किसानों,भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र में बड़े नुकसान होंगे.

अमेरिका ने अपने कृषि उत्पादों जैसे बादाम, फल और डेयरी उत्पाद के लिए भारत के बाजार तक #जीरो_टैरिफ या बहुत कम टैरिफ पर पहुंच मांगी है. जबकि भारत पर 18 फीसदी टैरिफ लगेगा.

इससे क्या होगा कि अमेरिकी सब्सिडी वाले सस्ते कृषि उत्पाद भारतीय बाजारों में भर जायेंगे. ऐसे में स्थानीय किसानों और दूध उत्पादकों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा.

भारत का डेयरी मॉडल #Co_operatives पर आधारित है, भारत का डेयरी क्षेत्र लाखों छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका का आधार है, जबकि अमेरिकी डेयरी उद्योग 'इंडस्ट्रियल फार्मिंग' यानी #Mega_Farm पर आधारित है.

अमेरिका से सस्ते मिल्क पाउडर, चीज और अन्य डेयरी उत्पादों के आयात से 'अमूल' जैसे सहकारी मॉडल्स,ग्रामीण पशुपालकों और ग्रामीण रोजगार पर बहुत बुरा असर होगा .

 

अमेरिका दुनिया के उन देशों में से है जो अपने किसानों को सबसे अधिक सब्सिडी लगभग $1.5 ट्रिलियन देता है.

सब्सिडी के कारण अमेरिकी कृषि उत्पाद जैसे मक्का, सोयाबीन और फल बहुत सस्ते होते हैं.

यदि भारत इन पर टैरिफ को 'जीरो' करता है, तो भारतीय बाजार इन सस्ते उत्पादों से भर जाएगा, जिससे भारतीय किसानों की फसल या तो पड़ी पड़ी सड़ जाएगी या उन्हें अपनी फसल की सही कीमत नहीं मिल पाएगी.

हिमाचल के सेब उत्पादकों से लेकर महाराष्ट्र के दाल उत्पादकों तक का बाजार प्रभावित होगा.


अमेरिकी ऊर्जा जैसे LNG, कोयला और अमेरिकी तकनीक पर भारत की अत्यधिक निर्भरता भविष्य में भारत के लिए जोखिम भरी हो जाएगी.

"चीन के विकल्प" के रूप में अमेरिका के लिए भारत के पेश होने के परिणामस्वरूप भारत-चीन सीमा और व्यापारिक रिश्तों में कड़वाहट बढ़ेगी. 


अमेरिका के दबाव में रूस से व्यापार बंद करने से रूस के साथ कूटनीतिक संबंधों में भी नकारात्मक बदलाव होगा.

रूस से सस्ता तेल मिलना बंद होने से भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ेगा.

भारत के लिए रूस से पूरी तरह नाता तोड़ना और टैरिफ को शून्य करना चुनौतीपूर्ण होगा, इसलिए आने वाले हफ्तों में इस डील की बारीकि


याँ और स्पष्ट होंगी.