डोनाल्ड ट्रंप ने अपने रक्षा मंत्री Pete Hegseth को आदेश दिया है कि साउथ कोरिया के साथ होने वाले आगामी संयुक्त सैन्य अभ्यासों को तुरंत और काफी हद तक कम किया जाए.
ट्रंप ने कहा कि उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ उनके संबंध बहुत अच्छे हैं. उनका मानना है कि इस तरह के बड़े सैन्य अभ्यास न केवल बहुत महंगे हैं, बल्कि उत्तर कोरिया के लिए एक अनावश्यक और hostile संदेश भेजते हैं.
दरअसल,रूस और उत्तर कोरिया का मजबूत होता गठबंधन डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ी रणनीतिक और कूटनीतिक सिरदर्दी बन चुका है.
उत्तर कोरिया और रूस के करीब आने और चीन के बैकअप से पूर्वी एशिया में एक नया विरोधी मोर्चा बन गया है. इससे अमेरिका की स्थिति ,एशिया में कमजोर पड़ रही है.
ट्रंप दक्षिण कोरिया के साथ तनाव दिखाकर और किम जोंग उन को सार्वजनिक तारीफ भेजकर इस समीकरण बदलने का प्रयास कर रहे हैं.लेकिन वास्तविकता यह है कि रूस के समर्थन के कारण उत्तर कोरिया पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक और बातचीत के मामले में सख्त हो चुका है.
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ट्रंप के पहले कार्यकाल का मुख्य लक्ष्य उत्तर कोरिया को अपने परमाणु हथियार छोड़ने पर सहमत करना था.लेकिन अब जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, उत्तर कोरिया को आर्थिक मदद, तेल, और उन्नत सैन्य तकनीक मुहैया करा रहा है, तो किम जोंग उन को अमेरिका से पाबंदियां हटाने की गुहार लगाने या बातचीत की मेज पर झुकने की कोई जरूरत नहीं बची है.
ट्रंप अक्सर दावा करते हैं कि वे व्यक्तिगत संबंधों के दम पर किम के साथ सौदा कर सकते हैं.लेकिन रूस के साथ हुए Comprehensive Strategic Partnership के बाद उत्तर कोरिया की स्थिति काफी मजबूत हो चुकी है. किम अब ट्रंप को कोई आसान कूटनीतिक जीत नहीं देना चाहते.
ट्रंप को लगता है कि अगर अमेरिका दक्षिण कोरिया में अपनी आक्रामक सैन्य उपस्थिति को थोड़ा कम करता है, तो उत्तर कोरिया को रूस के पाले में पूरी तरह जाने से रोका जा सकता है या किम को वापस अमेरिका अपने टेबल पर ला सकता है.
लेकिन ट्रंप का यह "नरम दांव" या सैन्य दबाव कम करने का निर्णय किम जोंग उन को रूस के पाले से वापस नहीं खींच पाएगा. यह अमेरिका की कमजोरी के रूप में देखा जा सकता है, जिससे उत्तर कोरिया आने वाले समय में कूटनीतिक जीत हासिल करने के लिए और ज्यादा आक्रामक शर्तें रखेगा.
क्योंकि किम के लिए अब व्लादिमीर पुतिन एक बहुत बेहतर साझेदार बन चुके हैं.

