"अजगर के बाल"
डर इंसानी दिमाग पर कितना गहरा असर डाल सकता है और इंसान अपनी ही मान्यताओं का कैसे कैदी बन जाता है—
यह घटना इसका जीवंत उदाहरण है.
VIETNAM की रहने वाली 87 वर्षीय एक महिला, जिनका नाम नगुयेन थी दिन्ह है,
"अजगर के बाल"
डर इंसानी दिमाग पर कितना गहरा असर डाल सकता है और इंसान अपनी ही मान्यताओं का कैसे कैदी बन जाता है—
यह घटना इसका जीवंत उदाहरण है.
VIETNAM की रहने वाली 87 वर्षीय एक महिला, जिनका नाम नगुयेन थी दिन्ह है,
During the trial run for the Home Guard recruitment drive held at Ramgarh’s Sido-Khu Ground, Kavita participated barefoot while wearing a saree. While the set time limit for women to cover 1600 meters was 10 minutes, Kavita completed it in roughly 6 minutes.
At the global track and field level, the official world record in the women's category for 1609 meters (1 mile) is held by Kenya’s Faith Kipyegon.
Set on July 21, 2023, at the Monaco Diamond League:
World record time: 4 minutes 07.64 seconds.
Now imagine—Faith Kipyegon achieved this record backed by world-class professional training, synthetic tracks, high-performance shoes, and optimal nutrition...
Nonetheless, the final race for the Jharkhand Home Guard recruitment exam is still ahead. But looking at Kavita’s determination, the destination certainly doesn't seem far out of reach.
Drug के प्रभाव में युवाओं और बेटियों की ऐसी स्थिति देखना अत्यंत पीड़ादायक है.
बठिंडा की दाना मंडी से ये एक तस्वीर आई है. ऐसी सैकड़ों बेटियां और हजारों बेटे हैं Punjab में जो नशे की लत में जिंदा लाश बन चुके हैं.
ये युवती फरीदकोट जिले के जैतो क्षेत्र की रहने वाली है. बठिंडा की दानामंडी से ये वीडियो सामने आने के बाद बठिंडा पुलिस ने युवती को वहां से रेस्क्यू किया और उसे इलाज के लिए बठिंडा के Civil Hospital De-addiction Centre में भर्ती कराया.
पंजाब की AAP सरकार ने नशा मुक्ति अभियान के तहत 'युद्ध नशेयां विरुद्ध' की शुरुआत की थी. लेकिन घोषणा "कागजी" ही रह गई.
अब चुनाव आने वाले हैं तो गृह मंत्री अमित शाह पंजाब जाकर ताल ठोक रहे हैं कि BJP की सरकार बनेगी तो पंजाब को नशा मुक्त कर दिया जाएगा.
केंद्र में तो है ना सरकार आपकी पिछले 12± सालों से. क्या केंद्र सरकार पर ,राज्यों की जिम्मेदारी नहीं होती?
और जिन राज्यों में आपके मुख्यमंत्री हैं, वहां आपने क्या किया?
MANIPUR तो ड्रग आर्म्स कार्टेलस की लड़ाई में ही सालों से जल रहा है. सरकार तो वहां लगातार आपकी ही है ना?
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय तथा अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों जैसे UNODC की रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में अवैध नशीले पदार्थों का कारोबार सालाना ₹1 लाख करोड़ से ₹1.5 लाख करोड़ यानी 10-15 अरब डॉलर से अधिक का अनुमानित बाजार बना चुका है.
–पिछले 10 से 12 वर्षों में जब्त हुई ड्रग्स की कीमत ₹70,000 करोड़ से ₹75,000 करोड़ है.यह Narcotics Control Bureau के आधिकारिक आंकड़ा है.
25 से 30 लाख किलोग्राम से अधिक विभिन्न प्रकार के नशीले पदार्थ –हेरोइन, गांजा, अफीम, सिंथेटिक ड्रग्स आदि जब्त किए गए हैं.
–सामाजिक न्याय मंत्रालय के सर्वेक्षण 'Magnitude of Substance Use in India' के अनुसार, देश में 3 करोड़ से अधिक लोग नशे विशेषकर अल्कोहल के अलावा कैनबिस, ओपियोइड्स और सिंथेटिक ड्रग्स के गंभीर प्रभाव या लत में हैं.
–पंजाब,हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर,राजस्थान, उत्तर प्रदेश,
मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड और असम,
महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा—कोकीन, एमडीएमए,अफीम,गांजा,यबा सिंथेटिक व हाई-एंड ड्रग्स की गिरफ्त में हैं.
सितंबर 2021 में DRI ने मुंद्रा पोर्ट पर दो कंटेनरों से लगभग 3,000 किलोग्राम हेरोइन जब्त की थी जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत ₹21,000 करोड़ बताई गई थी.
यह खेप अफगानिस्तान से ईरान के रास्ते भारत लाई गई थी और इसे "टैलकम पाउडर" के नाम से आयात किया गया था.
मुद्रा पोर्ट पर आकर्षण गाहे बगाहे ड्रग्स की बड़ी खेपों पकड़ी जाती हैं.
संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, भारतीय बंदरगाहों पर पिछले वर्षों में हुई प्रमुख ड्रग जब्तियों में मूल्य और मात्रा के हिसाब से मुंद्रा पोर्ट देश के सबसे बड़े जब्ती केंद्रों में से एक रहा है.
पिछले एक दशक में देश भर में नशे के कारोबार को खूब फलने फूलने दिया गया.
अब जबकि चुनाव सामने है तो फिर वही पुराने "वादे" दोहराए जा रहे हैं.
क्या ही अच्छा होता कि दूसरे राज्यों में जहां बीजेपी की सरकार है वहां से ड्रग कार्टेल का सफाया कर दिया गया होता और फिट तब PUNJAB में ये घोषणा की जाती की देखो हमने फलां जगह पर कितना कारगर काम किया है और अब तुम्हारे राज्य में भी वही मिसाल पेश करेंगे....
ईरान के अंतिम शाह के बेटे और निर्वासित क्राउन प्रिंस Reza Pahlavi ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख का समर्थन करते हुए यह बयान दिया है कि —
मध्य पूर्व में स्थायी शांति तब तक संभव नहीं है जब तक ईरान की सत्ता से इस्लामिक रिपब्लिक को पूरी तरह उखाड़
पहलवी ने अमेरिका से कहा है कि वर्तमान ईरानी शासन के साथ बातचीत करने से शांति नहीं आएगी, क्योंकि यह शासन केवल ताकत की भाषा समझता है.
रज़ा पहलवी, Pahlavi Dynasty के वंशज हैं और दशकों से विदेश से Islamic Republic का विरोध कर रहे हैं.
वह खुद को ईरानी विपक्ष का एक प्रमुख चेहरा और विकल्प के रूप में पेश करना चाहते हैं.
1979 की क्रांति में उनके परिवार को ईरान छोड़ना पड़ा था. पहलवी का मुख्य उद्देश्य ईरान में इस्लामिक शासन को खत्म करके अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को फिर से स्थापित करना है. भले ही वे सीधे राजा न बनें, लेकिन वे ईरान के भविष्य को तय करने वाले मुख्य नेता बनना चाहते हैं.
रज़ा पहलवी के पिता मोहम्मद रज़ा शाह पहलवी के शासनकाल में जनता के बीच भारी असंतोष फैल गया था.
1953 में अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA ने ईरान की चुनी हुई सरकार को गिराकर शाह को पूर्ण शक्तियां दिलाई थीं. इस वजह से जनता में यह संदेश गया कि शाह स्वतंत्र राजा नहीं, बल्कि अमेरिकी हितों के लिए काम करने वाले 'कठपुतली' हैं.
हालांकि शाह ने ईरान को आधुनिक बनाने के लिए White Revolution शुरू किया था. उन्होंने महिलाओं को अधिकार दिए और पश्चिमी जीवन शैली को बढ़ावा दिया.
लेक8न राजनीतिक आजादी पूरी तरह खत्म कर दी गई थी.
रज़ा पहलवी के पिता मोहम्मद रज़ा शाह के पास SAVAK नाम की एक खूंखार Secret Police थी, जो सरकार का विरोध करने वाले नेताओं, छात्रों और नागरिकों को गिरफ्तार करती थी, प्रताड़ित करती थी और मार देती थी.
तेल की बिक्री से देश में बहुत पैसा आया, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा शाह के करीबियों, शाही परिवार और अमीर वर्ग तक ही सीमित रहा.
इस दरम्यान धार्मिक नेता अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी ने विदेशों में निर्वासन में रहते हुए भी ऑडियो कैसेटों और बयानों के जरिए शाह के खिलाफ जनता को लामबंद करते रहे.
1978 तक पूरे ईरान में करोड़ों लोग सड़कों पर उतर आए, हड़तालें हुईं और सरकार का नियंत्रण खत्म होने लगा.
हिंसक प्रदर्शनों को देखते हुए शाह मोहम्मद रज़ा शाह पहलवी अपने परिवार –जिसमें उनके बेटे रज़ा पहलवी भी शामिल थे– के साथ ईरान छोड़कर हमेशा के लिए चले गए.
1 फरवरी 1979 को अयातुल्ला खुमैनी फ्रांस से वापस ईरान लौटे.
1 अप्रैल 1979 को ईरान को आधिकारिक तौर पर एक धार्मिक गणतंत्र घोषित कर दिया गया और राजशाही हमेशा के लिए खत्म हो गई.
अब रज़ा पहलवी भी,अयातुल्ला खुमैनी की लीक पर ही आगे बढ़ना चाहते हैं.
ईरान में महंगाई, मानवाधिकार उल्लंघन और कड़े धार्मिक नियमों के खिलाफ आम जनता में जो गुस्सा है, पहलवी उसे अपने पक्ष में मोड़ना चाहते हैं। खुद को जनता के Liberator की तरह पेश करके वे ईरान के भीतर अपने समर्थकों का आधार बढ़ाना चाहते हैं.
ट्रंप और अमेरिकी प्रशासन का खुलकर समर्थन करके पहलवी पश्चिमी देशों को यह संदेश देना चाहते हैं कि वर्तमान शासन के गिरने के बाद ईरान का नेतृत्व करने के लिए वे ही सबसे मजबूत और भरोसेमंद विकल्प हैं.
वे पश्चिमी देशों को यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि वे ईरान में Pro-Western Secular सरकार बना सकते हैं, जिससे मध्य पूर्व में अमेरिका और उसके सहयोगियों जैसे इज़राइल वगैरह के हित सुरक्षित रहेंगे.
अरबपति बिजनेसमैन ने Male Genitalia Enlargement के लिए कराई Cosmetic Surgery – मिली मौत!
सोने के ताबूत में दफनाए गए...
यह दुखद और सबक देने वाली कहानी है–अरबपति ब्रिटिश-नाइजीरियन बिजनेसमैन और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर
43 वर्षीय Igho "Tiny" Ubiribo की.
इनकी पिछले दिनों ही मृत्यु हुई है.
इगो उबीरिबो अपनी आलीशान और लग्जरी लाइफस्टाइल, महंगे ट्रेवल, और सेलिब्रिटीज वगैरह के साथ संबंधों के लिए सोशल जाने जाते थे.
साल 2022 में उन्होंने जिम्बाब्वे में फैशन डिजाइनर और सोशलाइट डेनिएल सिम्बा एलन से एक बेहद भव्य शादी की थी.
उनके पास लॉस एंजिल्स और लंदन जैसे शहरों में कई कीमती प्रॉपर्टीज थीं.
मार्च 2026 में उबीरिबो अपनी पत्नी के साथ थाईलैंड के बैंकॉक की छुट्टियों पर गए हुए थे.वहाँ उन्होंने एक प्राइवेट क्लिनिक में अपने Phallus का आकार बढ़ाने के लिए एक कॉस्मेटिक प्रोसीजर करवाया, जिसमें उनके अंग में लगभग 40 मिलीलीटर Hyaluronic Acid और लिडोकेन Lidocaine के इंजेक्शन लगाए गए.
प्रोसीजर के कुछ ही देर बाद, जब वे अपने होटल में मसाज ले रहे थे, तो उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द हुआ और वे बेहोश हो गए. उन्हें तुरंत Bangkok के Sukhumvit Hospital ले जाया गया.
अस्पताल में डॉक्टरों ने 100 मिनट से अधिक समय तक उन्हें बचाने की कोशिश की , लेकिन 6 मार्च की सुबह उनकी मौत हो गई.
लंदन में हुई पोस्टमार्टम जाँच में यह सामने आया कि जो हायलुरोनिक एसिड उनके पेनिस में इंजेक्ट किया गया था, उसका कुछ हिस्सा उनकी रक्त वाहिकाओं के जरिए फेफड़ों तक पहुँच गया.
इससे फेफड़ों में खून के थक्के जम गए.
कोर्ट की कोरोनर जीन हार्किन ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की कि उनकी मौत इसी कॉस्मेटिक प्रोसीजर के कारण हुए Pulmonary E
Donald Trump's statement is not merely a political speech, but a prime example of his 'Madman Theory' and 'Maximum Pressure' foreign policy.
By presenting two extreme options in a single statement, Trump has attempted to put immense pressure on Iran.
On one hand, he speaks of reaching an agreement on US terms, dangling the carrot of economic prosperity and the potential to become a major regional power—while on the other hand, he warns of complete destruction to instill fear in the Iranian leadership.
Trump stated:
"I have a big decision to make. Will a deal be made with Iran that lets them rebuild and create a far greater country than it ever was before — maybe one of the greatest in the Middle East or even the world? Or do I annihilate the Islamic Republic, and do it quickly, never giving them a chance to kill and destroy again? Do I drive them into hell with no chance of survival and no hope of future greatness?"
This statement is a blend of strategy, warning, and diplomacy, aimed primarily at forcing Iran to the negotiating table.
China Coast Guard के जहाज ने Philippine के एक सरकारी जहाज को टक्कर मार दी.
यह कोई सामान्य घटना नहीं है.
समुद्रों पर नियंत्रण और संसाधनों पर अधिकार जमाने की होड़ पूरी दुनिया में तेज़ी से बढ़ रही है
विशेषज्ञ इसे "Blue Rush" यानी समुद्री संसाधनों पर कब्जा करने वाली जियोपॉलिटिकल औरा कहते हैं.
फिलीपींस तटरक्षक बल के अनुसार चीनी जहाज ने उनके शांत और तय मार्ग पर चल रहे नागरिक पोत को जानबूझकर और खतरनाक तरीके से टक्कर मारी.
टक्कर से फिलीपींस के जहाज के starboard side की रेलिंग टूट गई और डेक पर लगे उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए.
फिलीपींस ने इसे अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों का सीधा उल्लंघन बताया है.
चीनी तटरक्षक बल और विदेश मंत्रालय ने फिलीपींस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि फिलीपींस का जहाज बार-बार चेतावनी देने के बावजूद अचानक अपनी दिशा बदलकर उनके पोत के सामने आ गया, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई.
चीन ने इसके लिए फिलीपींस को जिम्मेदार ठहराया.
दरअसल West Philippine Sea ka यह इलाका फिलीपींस के विशेष आर्थिक क्षेत्र के अंतर्गत आता है, लेकिन चीन पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा पेश करता है, जिसके कारण दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से तनाव लगातार बढ़ रहा है.