भारत के #Central_Armed_Police_Forces के अधिकारी और जवान #मोदी_सरकार की वर्षों की मनमानी के खिलाफ सड़क पर उतर आए हैं. कैडर और पदोन्नति के मसले पर
मोदी सरकार की लापरवाही और तानाशाही तौर तरीकों की वजह से #CRPF #BSF #ITBP #CISF #SSB कैडर के अधिकारियों और जवानों में जबरदस्त और असंतोष है.
#West_Bengal और #Assam के विधानसभा चुनावों पर इसका गहरा नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा.
#CAPF देश की सुरक्षा की पहली दीवार हैं. इनका सरकारी अनियमितता का खुल कर विरोध. देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के लिए ये एक बहुत बड़ी चुनौती बन सकता है.
कानून-व्यवस्था का संकट पैदा हो सकता है. दंगों या चुनाव के दौरान इन बलों की तैनाती भरोसे का प्रतीक होती है. इनके मनोबल में कमी आती है, तो नागरिक प्रशासन के लिए स्थिति संभालना बेहद ही मुश्किल हो जाएगा.
#CAPF के अपने कैडर अधिकारियों और सरकार के बीच सबसे बड़ा टकराव #IPS लॉबी को लेकर है.
वर्तमान में CAPF जैसे #BSF या #CRPF के शीर्ष पदों #IG #ADG #DG पर अक्सर IPS अधिकारियों को तैनात किया जाता है.
CAPF अधिकारियों का तर्क है कि इससे उनके अपने करियर की ग्रोथ रुक जाती है.
#SupremeCourt ने भी सुझाव दिया था कि इन बलों में IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को "धीरे-धीरे कम" किया जाए, लेकिन सरकार इसे पूरी तरह खत्म करने के पक्ष में नहीं दिख रही है.
सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में CAPF को #OGAS का दर्जा दिया था.
नियम के अनुसार, किसी भी 'Organized Service' जैसे Indian Revenue Service या Indian Audit & Accounts Service के शीर्ष पदों पर केवल उसी सेवा के अधिकारी होने चाहिए.
CAPF अधिकारियों का कहना है कि OGAS का दर्जा मिलने के बाद अब IPS अधिकारियों का "डेपुटेशन" कानूनी रूप से गलत है और इसे खत्म किया जाना चाहिए ताकि कैडर के अपने अधिकारियों को पदोन्नति मिल सके.
#CAPF के अधिकारियों की मुख्य मांग नॉन-फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन यानी #NFFU की रही है. छठा वेतन आयोग लागू होने के बाद, 2006 से IAS और अन्य 'Organized Group A Services' को यह लाभ दिया गया, लेकिन अर्धसैनिक बलों को इससे बाहर रखा गया था.
2025 में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए CAPF अधिकारियों को 'Organized Group A Service' (OGAS) का दर्जा देने का आदेश दिया था. इसका मतलब है कि उन्हें समयबद्ध पदोन्नति और बेहतर भत्ते मिलने चाहिए.
CAPF अधिकारियों का आरोप है कि सरकार इस आदेश को पूरी तरह लागू करने में देरी कर रही है. इससे कई अधिकारी 15-20 सालों तक एक ही पद जैसे असिस्टेंट कमांडेंट पर अटके रह जाते हैं.
एक CAPF अधिकारी 20-25 साल की कठिन सेवा के बाद भी उस शीर्ष पद पर नहीं पहुँच पाता, जिसका वह हकदार है, क्योंकि वहां बाहर से आए IPS अधिकारी बैठ जाते हैं। इससे कैडर में भारी निराशा और "प्रमोशन ब्लॉक" पैदा होता है.
कई CAPF अधिकारियों ने सरकार के खिलाफ़ #Contempt_Petition भी दायर की है, क्योंकि कोर्ट के आदेश के बावजूद पदोन्नति के नियम स्पष्ट नहीं किए गए.
निराश, हताश, क्षोभ और नाराज़गी से भरे #CAPF के अधिकारी अब सरकार से "आर पार" " का संघर्ष करने पर उतारू हैं.
@Ranbir_Crpf




