Ruby Arun

Saturday, 18 July 2026

यूक्रेन में राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं...

 


यूक्रेन की राजधानी #Kyiv सहित कई बड़े शहरों में हजारों की संख्या में लोग, विशेष रूप से युवा और छात्र, सड़कों पर उतर आए हैं.

दरअसल #Volodymyr_Zelenskyy ने हाल ही में यूक्रेन के बेहद लोकप्रिय और युवा रक्षा मंत्री #Mykhailo_Fedorov को उनके पद से बर्खास्त कर दिया.

मिखाइलो फेडोरोव को यूक्रेन के 'ड्रोन युद्ध' और सैन्य आधुनिकीकरण का जनक माना जाता है.उनके हटाए जाने से लोग नाराज हैं और Shame! तथा "फेडोरोव को वापस लाओ" जैसे नारे लगा रहे हैं.

बताया जा रहा है कि पूर्व रक्षा मंत्री फेडोरोव और यूक्रेन के  Commander-in-Chief जनरल ओलेक्सांद्र सिर्सकी के बीच काफी समय से तनाव चल रहा था, जिसके बाद जेलेंस्की ने फेडोरोव को हटाने का फैसला किया.

लोगों में यूक्रेन सरकार के भीतर फैले कथित भ्रष्टाचार को लेकर भी भारी नाराजगी है। इसके अलावा, हाल ही में #Lviv जैसे शहरों में सेना में जबरन भर्ती करने के तरीकों को लेकर भी आम जनता और अधिकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं.

जेलेंस्की की अपनी ही पार्टी के कुछ सांसदों और वायु सेना के उप कमांडर जैसे बड़े अधिकारियों ने भी इस फैसले के विरोध में इस्तीफे दे दिए हैं.

जेलेंस्की के सामने युद्ध की शुरुआत के बाद से यह अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट है.

Friday, 17 July 2026

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के नरवर किले से 300 किलो का ऐतिहासिक बहुमूल्य तोप चोरी


 अपने देश के चोरों और उनकी चोरी का "स्पेस टेक्नोलॉजी" लेवल देखिए!

3000 किलो का 500 साल पुराना बेशकीमती तोप ही चोरी हो गया 🫪🫪

वो भी एक ऊंचे पहाड़ी किले से.. 


यह घटना मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के ऐतिहासिक नरवर किले में 15-16 जुलाई 2026 की दरमियानी रात को हुई.

चोरी हुई तोप सिंधिया राजवंश/मुगल काल  की है और यह अष्टधातु या विशेष मिश्र धातुओं से बनी हुई है, जिस पर एक राजवंश का ऐतिहासिक राजचिह्न और फारसी/देवनागरी लिपि में शिलालेख अंकित हैं.


यह वाकई में बेहद हैरान करने वाली और अचरज की बात है. इतने भारी-भरकम तोप को,ऊंचे पहाड़ी से गायब कर देना अविश्वसनीय लगता है.


इतने बड़े तोप को उठाने के लिए निश्चित रूप से बड़ी क्रेन, चेन-पुली और बड़े ट्रक या क्रेन-ट्रैक्टर की जरूरत पड़ी होगी. चोरों ने इसके लिए पूरी रेकी की होगी.

यक़ीनन इस चोरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्कर गिरोह होगा,

फिर भी पुरातत्व विभाग और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी?

बिना स्थानीय "बहुत बड़े" लोगों के सहयोग के ये मुमकिन तो हुआ नहीं होगा?


अंतरराष्ट्रीय एंटीक ब्लैक मार्केट में इसकी अनुमानित कीमत 5 करोड़ रुपयों से ज्यादा बताई जा रही है.

पर हक़ीकत में ऐसी ऐतिहासिक धरोहरें "अमूल्य" होती हैं क्योंकि इनके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को पैसों में नहीं आंका जा सकता.


पहले भी मध्य प्रदेश से चोरी हुई कई दुर्लभ ऐतिहासिक मूर्तियां और एंटीक चीजें अंतरराष्ट्रीय तस्करों के जरिए अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के बड़े शहरों के सीक्रेट गैलरी और प्राइवेट कलेक्टर्स तक करोड़ों रुपये में बेची जा चुकी हैं.

मोनाको में अरबपति पर बम ब्लास्ट, शूटर महिला का मर्डर और पीछे Ukrain की टॉप सीक्रेट एजेंसियों के बीच छिड़ी 'गैंगवार'!


#Europe से लेकर यूक्रेन तक हड़कंप मचा देने वाली एक ऐसी रियल-लाइफ थ्रिलर कहानी सामने आई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। पूरी क्रोनोलॉजी समझिए:–


#Monaco की एक आलीशान बिल्डिंग के एंट्रेंस पर एक बैग में छिपाकर रखा गया रिमोट-कंट्रोल बम फटा. इस धमाके का निशाना यूक्रेन के अरबपति कारोबारी #Vadym_Yermolaiev थे, जिन पर यूक्रेन ने पहले #Russia के साथ कथित व्यापारिक संबंधों को लेकर प्रतिबंध लगाए थे. 

यह घटना इसी साल 29 जून को हुई थी. 

इस हमले में वादिम येरमोलाएव और उनका 13 साल का बेटा बाल-बाल बच गए, लेकिन उनकी पार्टनर को बेहद गंभीर चोटें आईं और डॉक्टरों को उनके दोनों पैर काटने पड़े.

यूक्रेन की सुरक्षा एजेंसी #SSU ने उस खुफिया कैमरे से डिलीट किया गया वीडियो फुटेज बरामद कर लिया है, जिसे हमलावरों ने खुद लगाया था.

यह वीडियो सबूत के तौर पर रिकॉर्ड किया गया था ताकि वे अपने आकाओं को दिखा सकें कि "काम पूरा हो गया है".... 

जांच में सामने आया कि बम रखने वाली मुख्य संदिग्ध #Anastasiia_Berezovska नाम की एक 39 वर्षीय यूक्रेनी महिला थी, जिसने पुरुष के कपड़े पहनकर भेष बदला हुआ था. 

इंटरपोल ने उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया, लेकिन 7 जुलाई को #Kyiv के पास उसका शव मिला, जिसके सिर में गोली मारी गई थी. 

इस केस में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब बेरेज़ोव्स्का की हत्या के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया. इनमें से एक यूक्रेन की मिलिट्री इंटेलिजेंस #DIU का अधिकारी है और दूसरा यूक्रेन की सुरक्षा सेवा SSU का पूर्व अधिकारी है. 

इन दोनों ने ही बेरेज़ोव्स्का को क्रिप्टो और बैंक अकाउंट्स के ज़रिए पैसे ट्रांसफर किए थे, जिससे यह शक गहरा गया है कि मोनाको ब्लास्ट के पीछे भी यही मास्टरमाइंड थे. 

खुद पीड़ित वादिम येरमोलाएव ने सार्वजनिक रूप से यूक्रेन की मिलिट्री इंटेलिजेंस DIU के अधिकारियों पर इस हत्या के प्रयास की साजिश रचने का सीधा आरोप लगाया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा की मांग की है. 

यह मामला अब केवल एक बिजनेसमैन पर हमले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने यूरोपीय धरती पर यूक्रेन की खुफिया एजेंसियों की भूमिका और उनके आपस के टकराव को लेकर एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय विवाद खड़ा कर दिया है.

क्या मोदी सरकार, बुलेट ट्रेन के नाम पर केवल एक महंगी 'मेट्रो' खड़ी कर रही है जिसका आधा ढांचा जापानी और आधा घरेलू होगा?

 क्या मोदी सरकार, बुलेट ट्रेन के नाम पर केवल एक महंगी 'मेट्रो' खड़ी कर रही है जिसका आधा ढांचा #जापानी और आधा घरेलू होगा?



#Japan� की प्रधानमंत्री को मोदी जी ने भले ही अपनी "बहन" बना लिया हो, फिर भी जापान के साथ रिश्ते कड़वाहट भरे हो चुके हैं. वजह है भारतीय शिनकानसेन यानी #बुलेट_ट्रेन . जो मुंबई–अहमदाबाद रूट पर चलने वाली थी.

जापान का कहना है कि भारत, बुलेट ट्रेन के नाम पर अपने यात्रियों की सुरक्षा से समझौता कर रहा है. 

#जापान के प्रतिष्ठित बिजनेस पब्लिकेशन #Toyo_Keizai_Online ने इस पर एक रिपोर्ट छापी है जिसमें भारत पर वादाखिलाफी और बेईमानी का आरोप लगाया है. लिखता है " प्रधानमंत्री ताकाइची की यात्रा के बाद भी कोई परिणाम नहीं: 'भारतीय शिनकानसेन की विफलता. 

जापान को सुरक्षा के सिग्नलिंग सिस्टम से भारत ने बाहर किया"...

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद, जापान के पूर्व राज्य मंत्री Hideki Makihara - @hmakihara ने भी ट्वीट कर अपना गुस्सा जाहिर किया है. ये लिखते हैं कि– सन 2017 में वे भारत-जापान के बीच बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की शुरुआती वार्ताओं और बैठकों में जापानी प्रतिनिधिमंडल के तौर पर व्यक्तिगत रूप से शामिल थे. भारतीय पक्ष का रवैया बेहद "लापरवाह" था और भारत वादे करके तुरंत उनसे पलट जाता था. उन्होंने सीधे तौर पर तत्कालीन भारतीय रेल मंत्री पीयूष गोयल के व्यवहार और बातचीत के तरीके को "Awful" बताया.

हिदेकी माकिहारा जापान की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी #LDP के कद्दावर नेता और पूर्व राज्य मंत्री आर्थिक, व्यापार और उद्योग विभाग–रह चुके हैं.

जापान की इस नाराजगी के पीछे मुख्य रूप से व्यावसायिक और तकनीकी मतभेद हैं.

मूल योजना के अनुसार, बुलेट ट्रेन में जापान का प्रसिद्ध DS-ATC सिग्नलिंग सिस्टम और जापानी कोच E5 शिनकानसेन लगने थे. जो दुनिया में अपनी 100% शून्य-दुर्घटना सुरक्षा के लिए जानी जाती है.

लेकिन भारत ने लागत बचाने के लिए यूरोपीय मानकों की तरफ रुख किया.

जापान का सवाल है कि क्या भारत दुनिया की सबसे परिष्कृत तकनीक खरीद रहा है, या उसमें अपनी शर्तों पर ऐसी मिलावट कर रहे हैं जिससे उसकी सुरक्षा ही खतरे में पड़ जाए?

जबकि इस प्रोजेक्ट के लिए भारत ने 80% से अधिक की फंडिंग जापान के बेहद सस्ते कर्ज 0.1% ब्याज पर से ले रहा है, तो फिर सुरक्षित तकनीकी ट्रांसफर के मामलों में धोखा क्यों कर रहा है? 

भारत,अपने ही देश के लोगों की सुरक्षा से खिलवाड़ क्यों कर रहा है?

यही वजह है कि जिस प्रोजेक्ट को 2022 में पूरा होना था, वह 2026 के अंत तक भी केवल ट्रायल रन के लिए संघर्ष कर रहा है. राजनीतिक रैलियों में बुलेट ट्रेन के चुनावी वादे बेचना तो बहुत आसान है मोदी जी के लिए. पर यात्रियों की सुरक्षा जरूरी नहीं है.

राष्ट्रभक्ति का 'कानूनी' सर्टिफिकेट बनाम सुलगते बुनियादी सवाल.... डायवर्जन कूटनीति' की क्रोनोलॉजी...

राष्ट्रभक्ति का 'कानूनी' सर्टिफिकेट बनाम सुलगते बुनियादी सवाल....

डायवर्जन कूटनीति' की क्रोनोलॉजी...


संसद के मानसून सत्र में मोदी सरकार 'वंदे मातरम' को कानूनी संरक्षण देने के लिए 'द प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर अमेंडमेंट बिल, 2026' लाने की तैयारी में है. दलील दी जा रही है कि राष्ट्रगीत का अपमान करने वालों को कड़ी सजा दी जाएगी.
लेकिन क्या वाकई 'वंदे मातरम' जैसी महान और रूहानी अवधारणा को किसी सरकारी मुहर या कानूनी डंडे की जरूरत है?
वंदे मातरम' केवल शब्दों का समूह नहीं है. यह आज़ादी की लड़ाई से लेकर आज तक हर भारतीय के खून, समर्पण और देश के प्रति अगाध प्रेम का प्रतीक है.
जिस गीत को देशवासी अपनी आत्मा से गाते हैं, जो हमारी रग रग में बसा है, उसे जबरन डंडे के दम पर गवाने की कोशिश असल में उस भावना का अनादर है. देशभक्ति दिलों से उपजती है, संसद के किसी कानून की मोहताज नहीं होती.....
मुझे तो डर है कि अगर यह कानून पास होता है, तो सबसे ज्यादा डर इस बात का है कि इसकी जद में सत्ताधारी दल के नेता ही न आ जाएं.
आए दिन ऐसे वीडियो सामने आते हैं जहां राष्ट्रवाद का ढोल पीटने वाले बड़े-बड़े नेताओं को वंदे मातरम की दो लाइनें तक याद नहीं होतीं, और अगर याद भी हों तो वे उसका शुद्ध और स्पष्ट उच्चारण नहीं कर पाते...
झंडा फहराने या राष्ट्रगीत बजने के दौरान अक्सर नेता कैमरे के सामने अपनी जगह पर हिलते-डुलते, बातचीत करते या आधे वंदे मातरम के बीच में ही वीआईपी गेट से बाहर निकलते हुए कैमरे में कैद होते हैं.
क्या नया कानून ऐसे सत्ताधारी नेताओं पर भी उतनी ही कड़ाई से लागू होगा?

जब-जब देश में युवा, छात्र और आम जनता बुनियादी मुद्दों पर सरकार को घेरती है, तब-तब राष्ट्रवाद का कोई नया शिगूफा मेज पर रख दिया जाता है.
इस समय देश जिन वास्तविक संकटों से जूझ रहा है, यह बिल सीधे तौर पर उनसे ध्यान भटकाने की कोशिश नजर आता है.
––देश का युवा सड़कों पर है। पेपर लीक और घोटालों के कारण लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है, लेकिन चर्चा रोजगार पर नहीं, राष्ट्रभक्ति की कानूनी परिभाषा पर हो रही है.
––डीजल-पेट्रोल की बेतहाशा बढ़ती कीमतें और उसमें होने वाली मिलावट से आम आदमी की कमर टूट चुकी है. इन आर्थिक मुद्दों पर जवाबदेही तय करने के बजाय ध्यान राष्ट्रगीत के 'अपमान और सम्मान' के बहस रूपी जाल में उलझाया जा रहा है.
––क्या तीन साल की जेल का डर दिखाकर एक और ऐसा नैरेटिव खड़ा करने की कोशिश है, जिसमें सरकार के सामने बुनियादी सवाल उठाने वाले हर नागरिक को 'राष्ट्रविरोधी' साबित करना और आसान हो जाए?

–– मोदी जी,सच्ची देशभक्ति युवाओं को रोजगार देने, भ्रष्टाचार खत्म करने और नागरिकों को सुरक्षित जीवन देने में है, न कि देशभक्ति को अदालती मुकदमों का विषय बनाने में...

#VandeMataramBill #MonsoonSession2026 #PaperLeak #Inflation #YouthDemands #PoliticalChronology #MockeryOfNationalSymbols




Monday, 13 July 2026

MIDDLE EAST ON THE BRINK OF TOTAL WAR

🚨 MIDDLE EAST ON THE BRINK OF TOTAL WAR


.

The 4-year Yemen-Saudi ceasefire has gone up in smoke! Get ready, because the coming days are about to rewrite global #GeoPolitics.

​The Middle East's powder keg has been ignited once again. The #De_Escalation_Phase that had been in place between Yemen and Saudi Arabia since 2022 was completely shattered on July 13, 2026.

​While the runway at #Sanaa_Airport was rocked by explosions on one side, Saudi Arabia’s #AbhaAirport was targeted by ballistic missiles and drones on the other.

​Just when it seemed the Middle East's geopolitical temperature had cooled, a single spark flipped the entire board. The four-year Saudi-Houthi ceasefire is now history—and the trigger was Saudi Arabia’s strike on the Sanaa Airport runway!

  • The Trigger: Saudi-backed forces blew up the Sanaa Airport runway to block an Iranian plane carrying a Houthi delegation returning from the funeral of Iran's Supreme Leader, Khamenei. The allegation? "Arms smuggling."
  • The Retaliation: Infuriated, the Houthis viewed this as a direct declaration of war by Saudi Arabia and threw the peace agreement straight into the trash.
  • The Fallout: Within hours, the Houthis launched a barrage of ballistic missiles and drones directly at Saudi's Abha Airport and key military bases.

​The informal truce that had been holding since 2022—which had shielded Saudi Arabia from Houthi attacks—is now officially over. The Houthis have made it clear: Saudi Arabia should no longer consider itself safe.

​Whether this Saudi move was an act of self-defense or a disastrous strategic blunder is something even Saudi Arabia itself is struggling to figure out right now.

​If this war escalates further, who will pay the price for the impending devastation—from the Red Sea shipping lanes to global crude oil prices? Will it just be the Middle East, or the entire world?

​Because this is not just a war between two nations. This is the next, and most dangerous, chapter of the proxy war playing out between Iran and the US-Saudi bloc.

अब महायुद्ध के मुहाने पर मिडिल ईस्ट. यमन-सऊदी 4 साल का सीज़फायर खाक!

 🚨अब महायुद्ध के मुहाने पर मिडिल ईस्ट.

यमन-सऊदी 4 साल का सीज़फायर खाक!


तैयार रहिए, क्योंकि आने वाले दिन पूरी दुनिया की #GeoPolitics को बदलने वाले हैं.

मिडिल ईस्ट का बारूद एक बार फिर सुलग उठा है. यमन और सऊदी अरब के बीच 2022 से चली आ रहा #De_Escalation_Phase 13 जुलाई 2026 को पूरी तरह जमींदोज हो गया.

एक तरफ #Sanaa_Airport 

 का रनवे धमाकों से दहल उठा, तो दूसरी तरफ सऊदी अरब का #AbhaAirport 

बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों के निशाने पर आ गया.

जब लगा कि मिडिल ईस्ट का बारूद थोड़ा शांत है, तभी एक चिंगारी ने पूरे खेल को पलट दिया. 4 साल से चला आ रहा सऊदी-हुथी सीज़फायर अब इतिहास बन चुका है, और इसकी वजह बना है सना एयरपोर्ट के रनवे पर सऊदी अरब द्वारा किया गया हमला!

–ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के जनाजे से लौट रहे हुथी डेलिगेशन के ईरानी विमान को रोकने के लिए सऊदी समर्थित ताकतों ने सना एयरपोर्ट का रनवे ही उड़ा दिया.

आरोप लगा- 'हथियारों की तस्करी'.

–भड़के हुथियो ने इसे सीधे सऊदी की जंग का एलान माना और शांति समझौते को कूड़ेदान में फेंक दिया.

नतीजा? कुछ ही घंटों में सऊदी अरब के अभा एयरपोर्ट और मिलिट्री बेस पर हुथियो ने बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार कर दी.


–2022 के बाद से जो एक अनौपचारिक शांति बनी हुई थी, जिसके तहत सऊदी अरब को हुथी हमलों से राहत मिली हुई थी, वह अब आधिकारिक रूप से खत्म हो चुकी है. हुथियों ने साफ कर दिया है कि सऊदी अरब अब खुद को सुरक्षित न समझे.

सऊदी का यह कदम सेल्फ-डिफेंस था या विनाशकारी रणनीतिक भूल, अब खुद सऊदी अरब ही नहीं समझ पा रहा है.


–अगर यह जंग आगे बढ़ी, तो लाल सागर से लेकर क्रूड ऑयल की कीमतों तक, जो तबाही मचेगी उसकी कीमत क्या सिर्फ मिडिल ईस्ट चुकाएगा या पूरी दुनिया?

क्योंकि यह सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं है, यह उस प्रॉक्सी वॉर का अगला और सबसे खतरनाक चैप्टर है जो ईरान और अमेरिका-सऊदी ब्लॉक के बीच चल रहा है.