भारत में हाल के दिनों में Flying Training Organisations के छोटे विमानों के हादसों में लगातार
बढ़ोतरी हुई है.
आज भी कानपुर के नत्थापुरवा गंगा बैराज के पास हुए दर्दनाक हादसे में विमान के इंस्ट्रक्टर सचिन भाटिया और ट्रेनी अभिषेक पुजारी की दुखद मृत्यु हो गई.
और ये पूरी तरह DGCA की लापरवाही और भ्रष्टाचार का ही भयानक नतीजा है.
नियम है कि —DGCA को सभी मान्यता प्राप्त फ्लाइंग स्कूलों का सालाना और Surprise Inspection करना है.
हर विमान को हवा में उड़ने योग्य होने का प्रमाण पत्र लेना और समय-समय पर Renew कराना अनिवार्य होता है.
एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरर के दिशानिर्देशों के अनुसार तय घंटों जैसे 50 घंटे, 100 घंटे की उड़ान के बाद विमान का मेंटेनेंस अनिवार्य है...
तो क्या DGCA ये सभी ऑडिट्स सिर्फ कागज पर कर रहा है?
ऐसा नहीं है कि DGCA के पास इंस्पेक्टर्स की कमी है, और उसके लिए जिससे हर ट्रेनिंग सेंटर निगरानी रखना मुश्किल है.
पर होता क्या है कि फ्लाइंग एकेडमीज कई बार ज्यादा से ज्यादा Flying Hours निकालने के चक्कर में छोटी-मोटी खराबी को नजरअंदाज करके विमान उड़ाने की अनुमति दे देती हैं.
ज्यादातर फ्लाइंग स्कूलों में इस्तेमाल होने वाले सिंगल या डुअल इंजन विमान –जैसे Cessna, Tecnam आदि काफी पुराने हैं. भले ही वे उड़ने योग्य घोषित हों, लेकिन पुराने एयरक्राफ्ट्स में कंपोनेंट फेलियर का जोखिम नए विमानों से ज्यादा होता है.
इसीलिए केवल रैंडम या रूटीन जांच काफी नहीं है, बल्कि FTOs के पूरे बेड़े का Special Zero-Tolerance Audit करना और मेंटेनेंस स्टैंडर्ड्स को पूरी कड़ाई से लागू करना अनिवार्य है—
"क्योंकि हर एक ज़िंदगी बेशकीमती है"
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