Ruby Arun

Thursday, 27 August 2026

भीषण प्राकृतिक आपदाएँ–ईश्वर की मर्जी से ज्यादा, सिस्टम का धोखा है..



नेपाल की हालिया तबाही इस बात का साफ संकेत है कि हमारा देश भारत भी भयंकर पर्यावरणीय खतरे में है. भारत भौगोलिक, पर्यावरण और सुरक्षा—तीनों मोर्चों पर सीधे तौर पर Danger Zone में है.
भारत और नेपाल में बुनियादी ढांचे के नाम पर हो रही अनियोजित प्राकृतिक तबाही भारत के लिए पर्यावरणीय, आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से एक गंभीर और प्रत्यक्ष चेतावनी है.

नेपाल की नदियाँ–कोसी, गण्डक, कर्णाली,घाघरा– सीधे भारत के मैदानी इलाकों में आती हैं.
जब नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में असंतुलित निर्माण के कारण भूस्खलन और नदियाँ अवरुद्ध होती हैं, तो बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में भीषण बाढ़ का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
Geologists सालों से चेतावनी दे रहे हैं कि उत्तराखंड, हिमाचल और नेपाल जैसे हिमालयी क्षेत्र Geologically fragile हैं.
Hydropower projects, पहाड़ों को ब्लास्ट करके सड़कें बनाना और जंगलों की अंधाधुंध कटाई ही नेपाल और भारत के पहाड़ी इलाकों में आ रही लगातार तबाही का सबसे बड़ा कारण है.
भरी बारिश या मानसून तो केवल एक trigger है. अगर पहाड़ों के ढलानों को कमजोर न किया गया होता, तो नेपाल में नुकसान इतना भीषण नहीं होता.

नदियों के प्राकृतिक बहाव को रोककर जलविद्युत परियोजनाएं बनाना. पहाड़ों के कमजोर ढलानों को काटकर सड़कें और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना.जंगलों की कटाई– जिससे पहाड़ अपनी पकड़ खो बैठे हैं. जिसकी वजह से थोड़ा सा पानी आते ही भूस्खलन की घटनाएं होती हैं.
नदियों, जंगलों और पहाड़ों को ईश्वर प्रदत्त प्राकृतिक संसाधन, सुरक्षा और जीवन देने का जरिया समझने की बजाय केवल मुनाफे की वस्तु समझ ली गई.

भारत हो या नेपाल, सरकारों ने पर्यावरण चेतावनियों को दरकिनार कर केवल कॉर्पोरेट मुनाफे और निर्माण ठेकों को प्राथमिकता दी है. नदियों का प्राकृतिक रास्ता रोककर Hydropower परियोजनाएँ थोपना, पहाड़ों की नाजुक संरचना को समझे बिना उन्हें डायनामाइट से ब्लास्ट करना और अंधाधुंध सड़कें बनाना—इन सबने पहाड़ों और ढलानों की नींव हिला दी है.

इन सबके बीच का सबसे घिनौना सच—
"आपदा में अवसर"
वही कंपनियां जिनके प्रोजेक्ट्स,पर्यावरण को नुकसान पहुँचाते हैं–आपदा के बाद "पुनर्निर्माण" के नाम पर फिर से करोड़ों–अरबों का बजट फिर ऐंठ लेती हैं. 

नेपाल का आज, भारत का कल बन सकता है. अगर हमने अब भी प्रकृति को मुनाफ़े की तराज़ू में तोलना बंद नहीं किया, तो यह विनाश किसी कुदरती आफ़त का मोहताज़ नहीं रहेगा—हमारा अपना बनाया सिस्टम ही हमें निगल जाएगा.

(—पहला वीडियो–हिमाचल प्रदेश के चंबा में भरमौर के कोडला-उराई रोड पर भीषण लैंडस्लाइड का है.

—दूसरा वीडियो उत्तराखंड के धारचूला लैंड स्लाइड का है जिसमें पूरी की पूरी पहाड़ी दरक गई थी.)

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