यह बेहद डरावनी खबर है.
अगले 3 दिनों में 26 अगस्त के विनाशकारी बाढ़ से ज्यादा प्रलयकारी बाढ़ के आने का अंदेशा है.
एक और प्राकृतिक बांध के टूट सकने की चेतावनी नेपाल और चीन के सीमावर्ती पहाड़ी इलाकों में चीनी जल संसाधन मंत्रालय द्वारा जारी की गई है. इस बार चीन ने समय रहते, नेपाल की चेतावनी दे दी है.
26 अगस्त के भीषण बाढ़ और लैंडस्लाइड के बाद तिब्बत-नेपाल बॉर्डर पर एक खतरनाक बैरियर लेक बन गया है.
जिसमें इस समय 20 लाख यानी 2 Million क्यूबिक मीटर पानी भर चुका है. आने वाले 3 दिनों में इसमें 30 लाख क्यूबिक मीटर और पानी जमा होने का अनुमान है.
सोचिए कि जब 50 लाख क्यूबिक मीटर का यह विशाल जलभराव अचानक एक साथ बहेगा, तो यह नदी के निचले इलाकों में कैसा क़यामत वाला सैलाब ला देगा.
ओवरफ्लो का खतरा मंडरा रहा है.
छोचेन खोला और पुरेपु सांगपो नदियों के संगम पर बना यह प्राकृतिक बांध कभी भी टूट सकता है. अगर ऐसा हुआ तो नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के निचले इलाकों में भयानक सैलाब आ सकता है और इसका असर केवल सीमावर्ती Rasuwa जिले तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि त्रिशूली और नारायणी/गंडक नदियों के निचले मैदानी इलाकों नुवाकोट, धादिंग, चितवन में भी भीषण बाढ़ आ जाएगी.
पहली बाढ़ का मलबा, पत्थर और मिट्टी पहले से ही नदियों के संकरे रास्तों में फंसे हुए हैं.नया सैलाब इस मलबे को अपने साथ बहाकर ले जाएगा, जिससे पानी का बहाव एक ठोस 'कीचड़ और Debris Flow बन जाएगा, जो रास्ते में आने वाली हर चीज़ को तबाह कर देगा.
चीनी विशेषज्ञ और बचाव दल झील के पानी को नियंत्रित तरीके से Spillway बनाकर धीरे-धीरे बाहर निकालने के रास्तों पर काम कर रहे हैं, ताकि बांध अचानक न टूटे.
चीनी इंजीनियर ड्रोन और सिमुलेशन के जरिए लगातार झील पर नजर बनाए हुए हैं.
पर आफ़त ये है कि बुधवार को आई पहली बाढ़ से सड़कें, पुल और नदी किनारे के सुरक्षा बांध पहले ही ध्वस्त या बेहद कमजोर हो चुके हैं.अब यदि दोबारा बाढ़ आती है,तो रक्षा का कोई भी प्राकृतिक या कृत्रिम ढांचा अब शेष नहीं बचा है.
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