Ruby Arun

Tuesday, 3 March 2026

खुद को #EpsteinFiles के खुलासे से बचाने के लिए पूरा देश संकट में!:– स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज


 चूंकि मोदी सरकार विदेश नीति और कूटनीति के मसले पर असफल साबित हुई है. 

चूंकि मोदी सरकार ने #IRAN के सर्वोच्च नेता #Khamenei की अमेरिका इजराइल द्वारा की गई नृशंस हत्या पर शोक संवेदना या निंदा का एक शब्द भी ज़बान से नहीं निकाला है. जबकि ईरान हमारे देश का दशकों पुराना शुभचिंतक और साथी रहा है.

लेकिन मौजूदा सरकार की कमजोरी और खामियों की वजह से आने वाले कुछ ही दिनों में हमारा देश गैस, ऊर्जा, तेल आदि के संकट से गुजरने वाला है. 

इस संकट का सीधा गहरा असर हमारी आपकी जेब और भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला है.

क्योंकि #ईरान ने #StraitOfHormuz बंद कर दिया है. वहां से सिर्फ #China और #Russia के जहाजों को ही गुजरने की छूट मिल रही है. भारतीय टैंकर वहां तट पर ही फंसे पड़े हैं.

भारत के लिए एक #Emergency_Scenario है. भारत सरकार इस स्थिति से कैसे निपटेगी, इसकी योजना तक तैयार नहीं.


स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद कर दिए जाने से जो संकट सामने है उसका सीधा गणित आप इस तरह से समझिए:–

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में हर $1 की बढ़ोतरी होने पर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में औसतन 50 से 60 पैसे प्रति लीटर का इजाफा हो सकता है.

यदि तेल $100 के पार बना रहता है, तो भारत में तेल की कीमतें ₹10-15 प्रति लीटर तक बढ़ सकती हैं, बशर्ते सरकार #Excise_Duty में कटौती न करे.


और आप जानते हैं कि जब डीजल महंगा होता है, तो उसका असर हर चीज पर पड़ता है. ट्रकों का किराया बढ़ने से फल, सब्जियां, अनाज और दूध जैसी बुनियादी चीजों की कीमतें बढ़ जाती हैं.


सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाले पंपों और ट्रैक्टरों का खर्च बढ़ने से किसानों पर भी आर्थिक बोझ बढ़ सकता है.


भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल आयात करता है.

भारत अपनी कुल LPG –रसोई गैस का लगभग 50-60% इसी क्षेत्र खासकर #Qatar और #UAE से मंगवाता है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने का मतलब है रसोई गैस की किल्लत और सिलेंडर की कीमतों में भारी वृद्धि.

इसके अलावा, प्राकृतिक गैस यानी #LNG की कमी से बिजली संयंत्रों और #Fertilizer फैक्ट्रियों का उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है.


तेल खरीदने के लिए भारत को डॉलर की जरूरत होगी. तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ेगी जिससे रुपया और कमजोर होगा.

तेल आयात बिल बढ़ने से देश का व्यापार घटा बढ़ेगा. जिससे देश की अर्थव्यवस्था दबाव में आ जाती है.


चूंकि मोदी जी ने #Trump की फिराक में #Putin से रिश्ते कड़वे कर लिए हैं, तो भारत अगर रूस से वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर पाइप लाइन या समुद्री रास्ते से इस कमी को पुरा करने के लिए तेल मंगवाने की बात करता है, तो वो बात सुनी भी जाएगी, इसमें संदेह है.


सऊदी अरब और यूएई के पास ऐसी लाइनें हैं जो लाल सागर तक जाती हैं और हॉर्मूज की बायपास कर सकती हैं. पर इनकी क्षमता बेहद सीमित है.


हालांकि अपने देश में विशाखापत्तनम, मैंगलोर और पादुर में स्थित अपने भूमिगत तेल भंडार हैं. लेकिन ये भंडार युद्ध जैसी आपातकालीन स्थिति के लिए बनाए गए हैं. और यह कोई स्थाई समाधान भी नहीं है.

इराक और यूएई के बजाय नाइजीरिया, अंगोला और अमेरिका से कच्चे तेल का आयात बढ़ने के भी विकल्प हैं. लेकिन खर्च बहुत ज्यादा है.

सबसे बड़ी चुनौती रसोई गैस की है, क्योंकि भारत का 85% LPG इसी रास्ते से आता है और इसे रूस या अमेरिका से तुरंत बदलना आसान नहीं है.


तो कुल मिलाकर "मरना" आम जनता को ही है. जिसकी #EpsteinFiles में कोई भागीदारी ही नहीं.

पर जो "भागीदार" हैं वो इसी में राहत की सांस ले रहे हैं कि देश मुश्किलों से गुजरता है तो गुजरने दो, हमारी करतूतें तो छुपी रहेंगी. हमारी गद्दी बची रहेगी चाहे देश की जनता को भरपेट भोजन ना मिले....

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