Ruby Arun

Thursday, 5 March 2026

क्या अमेरिका, ईरान के साथ अपने जंग में भारत को भी घसीटना चाहता है!

 #अमेरिका का पिट्ठू बने रहने का घातक परिणाम देखिए कि #America अब मनमाने तरीके से भारत की सुरक्षा संवेदनशीलता को दरकिनार करके, अपनी जरूरत के हिसाब से भारत के समुद्री विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र का इस्तेमाल कर रहा है और भारत की संप्रभुता को चुनौती दे रहा है.

एक अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत #IRISDena को श्रीलंका के तट के पास जो भारतीय जलक्षेत्र के काफी करीब है, 1 मार्च को टारपीडो से हमला कर डुबो दिया.जबकि यह ईरानी जहाज भारत द्वारा ही विशाखापत्तनम में आयोजित नौसैनिक अभ्यास #MILAN 2026,जो 19 से 27 फरवरी तक चला था, के समापन के बाद वापस लौट रहा था.इस हमले में जहाज पूरी तरह डूब गया और कथित तौर पर 87 ईरानी नौसैनिकों की जान चली गई.

यह जहाज श्रीलंका के तट के पास, #Galle से लगभग 40 समुद्री मील की दूरी पर था. यह घटना भारतीय तटों और सुरक्षा घेरे के इतने करीब हुई कि इसने भारत की #Net_Security_Provider की छवि पर सवालिया निशान लगा दिया है.

ईरान का यह जहाज भारत का आधिकारिक मेहमान था. अभ्यास खत्म होने के तुरंत बाद उसे मार गिराना भारत के कूटनीतिक सम्मान को गहरा ठेस पहुँचाने जैसा है.

भारत ने इस घटना पर क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर अपनी गहरी चिंता तो व्यक्त की है और इसे "मेजबानी और कूटनीतिक प्रोटोकॉल" का उल्लंघन भी माना है.

लेकिन भारत सरकार ने अमेरिका को कोई औपचारिक 'चेतावनी' नहीं दी है.


अमेरिकी नौसेना,अपनी परमाणु पनडुब्बियों #usswestvirginia #LosAngelesclass #Virginiaclass आदि को हिंद महासागर और भारत के रणनीतिक जलक्षेत्र में भारत को जानकारी दिए बिना उसके विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र के आसपास या भीतर संचालित कर रही है.

यह समुद्री क्षेत्र भारत का #EEZ है जहां से भारत का अधिकांश तेल आयात और समुद्री व्यापार होता है.

#IRAN और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के दरम्यान यह स्थिति और भी विस्फोटक हो जाती है क्योंकि ऐसे में भारत दो देशों के युद्ध के बीच में फंस सकता है. 

हिंद महासागर के तटों पर सैन्य टकराव होने से भारत अनचाहे ही सही युद्ध में घसीटा जा सकता है. जिससे अरब सागर और बंगाल की खाड़ी का शांतिपूर्ण क्षेत्र भी युद्ध क्षेत्र में बदल सकता है. 

और यह कोई अपवाद जैसी बात नहीं है. 

याद कीजिए दिसंबर 2023 में, #MVKemPluto नाम का एक मालवाहक जहाज, जो कच्चा तेल लेकर भारत के मंगलौर आ रहा था, तब उस पर अरब सागर में ड्रोन हमला हुआ था.

यह हमला भारतीय तट वेरावल, गुजरात से मात्र 200 से 300 समुद्री मील की दूरी पर हुआ था.

अमेरिका ने दावा किया कि यह #Drone ईरान से लॉन्च किया गया था. हालांकि ईरान ने इससे इनकार कर दिया था. 

उस समय भी हिंद महासागर और भारत के रणनीतिक जलक्षेत्र के आसपास सक्रिय थीं.

लेकिन तब भी भारत सरकार ने "चुप्पी" साध रखी थी. अमेरिका की इस गैर रणनीतिक हरकत के खिलाफ सरकार ने अपनी नाराजगी भी नहीं जताई थी. 

#India_First की जगह #America_First को ही तरजीह दी गई थी.






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