ईरान के अंतिम शाह के बेटे और निर्वासित क्राउन प्रिंस Reza Pahlavi ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख का समर्थन करते हुए यह बयान दिया है कि —
मध्य पूर्व में स्थायी शांति तब तक संभव नहीं है जब तक ईरान की सत्ता से इस्लामिक रिपब्लिक को पूरी तरह उखाड़
नहीं फेंका जाता.
पहलवी ने अमेरिका से कहा है कि वर्तमान ईरानी शासन के साथ बातचीत करने से शांति नहीं आएगी, क्योंकि यह शासन केवल ताकत की भाषा समझता है.
रज़ा पहलवी, Pahlavi Dynasty के वंशज हैं और दशकों से विदेश से Islamic Republic का विरोध कर रहे हैं.
वह खुद को ईरानी विपक्ष का एक प्रमुख चेहरा और विकल्प के रूप में पेश करना चाहते हैं.
1979 की क्रांति में उनके परिवार को ईरान छोड़ना पड़ा था. पहलवी का मुख्य उद्देश्य ईरान में इस्लामिक शासन को खत्म करके अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को फिर से स्थापित करना है. भले ही वे सीधे राजा न बनें, लेकिन वे ईरान के भविष्य को तय करने वाले मुख्य नेता बनना चाहते हैं.
रज़ा पहलवी के पिता मोहम्मद रज़ा शाह पहलवी के शासनकाल में जनता के बीच भारी असंतोष फैल गया था.
1953 में अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA ने ईरान की चुनी हुई सरकार को गिराकर शाह को पूर्ण शक्तियां दिलाई थीं. इस वजह से जनता में यह संदेश गया कि शाह स्वतंत्र राजा नहीं, बल्कि अमेरिकी हितों के लिए काम करने वाले 'कठपुतली' हैं.
हालांकि शाह ने ईरान को आधुनिक बनाने के लिए White Revolution शुरू किया था. उन्होंने महिलाओं को अधिकार दिए और पश्चिमी जीवन शैली को बढ़ावा दिया.
लेक8न राजनीतिक आजादी पूरी तरह खत्म कर दी गई थी.
रज़ा पहलवी के पिता मोहम्मद रज़ा शाह के पास SAVAK नाम की एक खूंखार Secret Police थी, जो सरकार का विरोध करने वाले नेताओं, छात्रों और नागरिकों को गिरफ्तार करती थी, प्रताड़ित करती थी और मार देती थी.
तेल की बिक्री से देश में बहुत पैसा आया, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा शाह के करीबियों, शाही परिवार और अमीर वर्ग तक ही सीमित रहा.
इस दरम्यान धार्मिक नेता अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी ने विदेशों में निर्वासन में रहते हुए भी ऑडियो कैसेटों और बयानों के जरिए शाह के खिलाफ जनता को लामबंद करते रहे.
1978 तक पूरे ईरान में करोड़ों लोग सड़कों पर उतर आए, हड़तालें हुईं और सरकार का नियंत्रण खत्म होने लगा.
हिंसक प्रदर्शनों को देखते हुए शाह मोहम्मद रज़ा शाह पहलवी अपने परिवार –जिसमें उनके बेटे रज़ा पहलवी भी शामिल थे– के साथ ईरान छोड़कर हमेशा के लिए चले गए.
1 फरवरी 1979 को अयातुल्ला खुमैनी फ्रांस से वापस ईरान लौटे.
1 अप्रैल 1979 को ईरान को आधिकारिक तौर पर एक धार्मिक गणतंत्र घोषित कर दिया गया और राजशाही हमेशा के लिए खत्म हो गई.
अब रज़ा पहलवी भी,अयातुल्ला खुमैनी की लीक पर ही आगे बढ़ना चाहते हैं.
ईरान में महंगाई, मानवाधिकार उल्लंघन और कड़े धार्मिक नियमों के खिलाफ आम जनता में जो गुस्सा है, पहलवी उसे अपने पक्ष में मोड़ना चाहते हैं। खुद को जनता के Liberator की तरह पेश करके वे ईरान के भीतर अपने समर्थकों का आधार बढ़ाना चाहते हैं.
ट्रंप और अमेरिकी प्रशासन का खुलकर समर्थन करके पहलवी पश्चिमी देशों को यह संदेश देना चाहते हैं कि वर्तमान शासन के गिरने के बाद ईरान का नेतृत्व करने के लिए वे ही सबसे मजबूत और भरोसेमंद विकल्प हैं.
वे पश्चिमी देशों को यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि वे ईरान में Pro-Western Secular सरकार बना सकते हैं, जिससे मध्य पूर्व में अमेरिका और उसके सहयोगियों जैसे इज़राइल वगैरह के हित सुरक्षित रहेंगे.
No comments:
Post a Comment