Ruby Arun

Friday, 4 September 2026

नीदरलैंड ने अमेरिका में रखा अपना 86 टन सोना ब्रिटेन ट्रांसफर किया!

 Netherlands ने America के न्यूयॉर्क

और ओटावा में रखे अपने कुल सोने में से 

11 अरब डॉलर का 86 टन सोना निकाल कर

London में Relocate कर दिया है.

डच सेंट्रल बैंक के गवर्नर ओलाफ स्लीपेन के अनुसार, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अस्थिरता को देखते हुए यह कदम 'क्राइसिस रेडीनेस' के तहत उठाया गया है.


बैंक ऑफ इंग्लैंड को दुनिया का सबसे बड़ा और पारदर्शी फिजिकल गोल्ड ट्रेडिंग हब माना जाता है. संकट के समय न्यूयोर्क के मुकाबले लंदन में मौजूद सोने को बहुत तेजी से ट्रेड या नकदी में बदला जा सकता है.


ऐसा नहीं है नीदरलैंड्स की अर्थव्यवस्था, किसी मुश्किल में है. देश की अर्थव्यवस्था अत्यंत मजबूत, विकसित और स्थिर है.

 यह केवल Precautionary Measure है. ताकि अगर भविष्य में मध्य पूर्व तनाव की वजह से कोई बड़ा वैश्विक वित्तीय संकट पैदा होता है, तो लंदन के बाजार से उस सोने को मिनटों में Cash में बदला जा सकता है.


यह घटना अमेरिका के लिए एक Warning Signal है कि पश्चिमी देश अब वैश्विक संकट की स्थिति में अमेरिकी वित्तीय प्रणाली पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अपने विकल्प चुन रहे हैं.

86 टन सोना अमेरिकी अर्थव्यवस्था के आकार के मुकाबले छोटा आंकड़ा है.


लेकिन जब केंद्रीय बैंक अपने Assets का कंट्रोल अमेरिका से हटाकर फिजिकल गोल्ड या यूरोप केंद्रित संपत्तियों में बदलते हैं, तो इससे लंबे समय में अमेरिकी डॉलर की वैश्विक मांग पर दबाव बनता है.

यह De-dollarization की प्रक्रिया को बढ़ावा देता है.


सोना,जब न्यूयॉर्क के बजाय लंदन बुलियन मार्केट में ट्रेड होता है, तब ट्रेडिंग वॉल्यूम और लिक्विडिटी का फायदा अमेरिकी बाजारों के बजाय ब्रिटेन के बाजारों को मिलता है.

इसे डोमिनो इफेक्ट भी कहते हैं–जब एक बड़ा देश अपना सोना स्थानांतरित करता है, तो अन्य देश भी ऐसा करने के लिए प्रेरित होते हैं. इससे न्यूयॉर्क्स फेडरल रिजर्व की दुनिया की 'सेफ कस्टडी' वाली छवि कमजोर होती है. वॉल स्ट्रीट और न्यूयॉर्क्स का भी व्यापारिक नुकसान होता है.


No comments:

Post a Comment