Ruby Arun

Wednesday, 19 August 2026

Mount Everest की चोटियों से शवों के निकलने का सिलसिला जारी


 Global Warming और बर्फ पिघलने के कारण Mount Everest पर दशकों पुराने शव और अवशेष लगातार सतह पर आ रहे हैं.

बेस कैंप और खुंबू आइसफॉल के पास लगभग 5,300 मीटर की ऊंचाई पर दशकों पुराने मानव अवशेष और हड्डियां सतह पर उभर रही हैं.

नेपाल सेना हर साल Mountain Cleanup Campaign चलाती है.इस अभियान के तहत सेना की विशेष टीमें और अनुभवी शेरपा न सिर्फ पहाड़ों से टन-बाय-टन कचरा नीचे लाते हैं, बल्कि बर्फ पिघलने से बाहर आए पर्वतारोहियों के शवों और कंकालों को भी सुरक्षित नीचे लाते हैं. हाल के अभियानों में एवरेस्ट और आसपास की चोटियों से कई शवों को निकालकर डीएनए/फॉरेंसिक जांच के लिए काठमांडू भेजा गया है.

माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की शुरुआत से लेकर अब तक 300 से अधिक पर्वतारोहियों की जान जा चुकी है.

इनमें से 200 से ज्यादा शव अभी भी पहाड़ पर ही जमे हुए हैं.

-30°C से नीचे और सूखी हवा के कारण ये शव खराब नहीं होते, बल्कि Mummified स्थिति में बिल्कुल सुरक्षित रहते हैं.

जमे हुए शरीर का वजन बर्फ जमा होने के कारण 100-120 किलो तक हो जाता है. एक शव को नीचे लाने में 8 से 10 शेरपाओं की जान जोखिम में पड़ती है और लाखों रुपये का खर्च आता है.

पहाड़ पर उच्च ऊंचाई डेथ ज़ोन डेथ ज़ोन जो 8,000 मीटर की ऊंचाई पर है, वहां ऑक्सीजन बहुत कम होता है.

वहां से किसी शव को खींच कर जानलेवा हो सकता है. इसलिए कुछ शव Green Boots दशकों से वहीं जमे हुए हैं.

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