प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्यों चुप हैं भगवान #श्रीराम के मंदिर के दान
पात्र से हुई चोरी पर ? सबसे बड़ी जवाबदेही तो मोदी जी की ही बनती है ना !
2024 के आम चुनाव और उससे पहले, राम मंदिर निर्माण को प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा की एक बहुत बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में पेश किया गया. तो इससे जुड़े विवाद की जिम्मेदारी भी मोदी जी की ही बनती है.
जब किसी बड़े राष्ट्रीय या धार्मिक कार्य का राजनीतिक और चुनावी श्रेय किसी नेता या दल को मिलता है, तो वहां होने वाली कमियों या विवादों की जिम्मेदारी किस पर तय होनी चाहिए?
लोकतांत्रिक और नैतिक व्यवस्था में यह नियम लागू होता है कि जिस परियोजना या विज़न का नेतृत्व देश का शीर्ष नेता कर रहा हो, वहां की व्यवस्था को साफ-सुथरा रखने की नैतिक जिम्मेदारी भी कहीं न कहीं नेतृत्व पर आती है. हालांकि, तकनीकी और कानूनी रूप से ट्रस्ट एक स्वतंत्र निकाय है, लेकिन जनता की नजरों में सरकार और ट्रस्ट की छवि आपस में जुड़ी हुई है.
हिंदू बचाने आए हैं, सनातन बचाने आए हैं– का डंका, बेतहाशा पीटा गया.
ये किस तरह जगाया गया हिन्दुओं को कि वो अपने आराध्य की पूजन सामग्री पर ही डाका डालने लगा ? अपने भगवान को ही छलने लगा ?
सनातन को ये कैसे बचाया गया कि वो नारे लगाने वालों की ही लूट और डकैती का शिकार हो गया ?
मंदिर हों या सत्ता – देश को सिर्फ मूर्ख बनाया गया. जिन्होंने धर्म के नाम पर सत्ता पाई, उन्होंने ही धर्म/हिंदू को सबसे ज्यादा क्षति पहुँचा
ई...
ना राम की मर्यादा का पालन किया ना सीता का सम्मान रखा..
बस लालची, भ्रष्ट, अनैतिक कृत्य करने वाले चोर लुटेरों असुरों का झुंड तैयार कर दिया..
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