मध्य प्रदेश की अति-सुरक्षित विधानसभा परिसर के अंदर से सामने आए एक वीडियो ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दी हैं, बल्कि साल 2021 से चल रहे एक हाई-प्रोफाइल फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ भी कर दिया है.
नीली बत्ती लगी 'भारत सरकार' लिखी इनोवा, फर्जी CBI कार्ड, फर्जी लेटरहेड और लाखों की ठगी के दम पर फर्जी IAS अफसर बनी घूम रही तृप्ति राजपूत अब सलाखों के पीछे है, लेकिन विधानसभा के भीतर अपनी दो सहेलियों के साथ ठहाके लगाते हुए "हम तीनों IAS हैं" का राग अलापने वाला यह वीडियो सुरक्षा एजेंसियों और सरकार के मुंह पर एक करारा तमाचा है!
जिस विधानसभा परिसर में विधायकों और पत्रकारों तक को सख्त चेकिंग के बाद एंट्री मिलती है, वहां एक शातिर जालसाज बिना रोक-टोक कैसे घूम रही थी?
किसकी शह पर मिली एंट्री?
क्या किसी बड़े नेता या अधिकारी के पास पर यह फर्जी गिरोह विधानसभा के अंदर तक पहुंचा?
फर्जी IAS अफसर बनकर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाली तृप्ति सिंह राजपूत और उसका भाई सुधांशु तब गिरफ्तार हुआ जब तृप्ति राजपूत का मध्य प्रदेश विधानसभा परिसर के अंदर का एक रील सोशल मीडिया पर वायरल हुआ.
लाल रंग की साड़ी पहने तृप्ति राजपूत अपनी दो अन्य महिला मित्रों के साथ मध्य प्रदेश विधानसभा के परिसर में बेफिक्र होकर ब्लॉग बनाती दिख रही है.
वीडियो में लड़कियां कहती हैं, "हम विधानसभा अटेंड करने आए थे, तो सोचा व्लॉग बना लें... हमारी हरकतों को देखकर कोई सोच भी नहीं सकता कि हम तीनों IAS ऑफिसर्स हैं."
तृप्ति और उसके साथी साल 2021 के आसपास से फर्जी अफसर बनकर लोगों को झांसा देने का काम कर रहे थे.
तृप्ति खुद को मध्य प्रदेश टूरिज्म डिपार्टमेंट की एडिशनल डायरेक्टर या मानव संसाधन मंत्रालय की हेड बताती थी.रौब जमाने के लिए वह 'भारत सरकार' लिखी इनोवा कार, फर्जी CBI कार्ड, फर्जी लेटरहेड और मसूरी ट्रेनिंग अकादमी की तस्वीरें और मोमेंटो का इस्तेमाल करती थी.
अशोकनगर के चंदेरी में सरकारी नौकरी का झांसा देकर पीड़ितों से लगभग 9.80 लाख रुपये की ठगी करने के मामले में FIR भी दर्ज की गई थी,
प्रशासनिक तंत्र की नाक के नीचे 3 साल तक यह खेल चलता रहा और किसी को कानो-कान खबर नहीं हुई!
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