Ruby Arun

Sunday, 22 March 2026

सैनिक स्कूलों का 'पार्टनरशिप मॉडल': राष्ट्र निर्माण या शिक्षा का बाजारीकरण !


 सरकार का यह फैसला "Last nail in the coffin" की तरह है.

#मोदी_सरकार ने 100 नए सैनिक स्कूल #PPP मॉडल पर खोलने का निर्णय लिया है.

#सैनिक_स्कूल केवल स्कूल नहीं, बल्कि #Indian_Army की 'नर्सरी' रहे हैं. इनका मूल आधार समानता, कठोर अनुशासन और #अराजनीतिक चरित्र रहा है. जब इनकी शिक्षा का प्रबंधन निजी हाथों में जायेगा तो क्या वे "लाभ की मानसिकता" से ऊपर उठकर सेना के उन उच्च आदर्शों को बनाए रख पाएंगे?

रिपोर्ट्स बताती हैं कि इन नए स्कूलों का आवंटन कई ऐसी संस्थाओं को हुआ है जिनकी अपनी राजनीतिक या धार्मिक विचारधाराएँ हैं.

** सेना की सबसे बड़ी ताकत उसका #Apolitical होना है. यदि बचपन से ही भावी सैनिकों की शिक्षा किसी विशेष विचारधारा के साये में होगी, तो क्या यह भविष्य में सेना के निष्पक्ष ढांचे के लिए चुनौती बन जाएगा.

** पुराने सैनिक स्कूलों में एक गरीब किसान का बेटा भी अधिकारी बनने का सपना देख सकता था. निजी भागीदारी के साथ 'फीस' का ढांचा बदल सकता है. हालांकि सरकार छात्रवृत्ति की बात करती है, लेकिन क्या निजी प्रबंधन वाले स्कूलों में वह Inclusive संस्कृति बच पाएगी जो सरकारी संस्थानों की पहचान है?

** शिक्षा और सुरक्षा राज्य के प्राथमिक कर्तव्य हैं. 100 नए स्कूल खुद न बनाकर निजी क्षेत्रों को सौंपना, सरकार का अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटना नहीं है? 

क्या सरकार "कम लागत" के चक्कर में भविष्य के नेतृत्व की "गुणवत्ता" से समझौता नहीं कर रही?

–– अनुशासन और सैन्य मूल्यों का विस्तार स्वागत योग्य है, लेकिन यह 'कॉर्पोरेट मॉडल' पर आधारित तो बिल्कुल नहीं होना चाहिए. शिक्षा का उद्देश्य 'नागरिक' बनाना है,#Product नहीं.

यदि इन स्कूलों पर कड़ा सरकारी नियंत्रण और पारदर्शी चयन प्रक्रिया नहीं रही, तो यह #राष्ट्रसेवा के नाम पर #पूंजीपतियों के स्वार्थ को साधने वाला गुलाम बन कर रह जाएगा.

** सेना में प्रवेश के लिए प्राथमिक शिक्षा का निजीकरण करना,भविष्य में #Merit की बजाय #Influence और #Privilege  को जगह देगा.

 यह #राष्ट्रीय_सुरक्षा के उस मजबूत ढांचे के लिए घातक होगा जिसे बनाने में #देश को दशकों लगे हैं.


#SainikSchool #EducationPolicy #Defense #NationalSecurity #Privatization #IndiaDebates

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