कैसे एक #तानाशाह अपने #Modus_Operandi से एक देश की #लोकतांत्रिक प्रणाली को #तानाशाही व्यवस्था में तब्दील कर देता है.यह समझने के लिए यह किताब एक बेहतरीन जरिया है.
#Turkey की मशहूर लेखिका और पत्रकार #Ece_Temelkuran ने अपनी किताब "How to Lose a Country: The 7 Steps from #Democracy to #Dictatorship" और #Turkey: The Insane and the Melancholy" में राष्ट्रपति #Recep_Tayyip_Erdoğan की राजनीति और उनके शासन के तरीकों की तीखी आलोचना की है.
उन्होंने #एर्दोआन की राजनीति के बारे में कुछ मुख्य बातें इस प्रकार लिखी हैं:
लोकतंत्र से तानाशाही का सफर
#टेमल्कुरन ने अपनी किताब में बताया है कि कैसे एर्दोआन ने धीरे-धीरे लोकतंत्र को खत्म कर तानाशाही स्थापित की.उन्होंने इसके 7 मुख्य चरण बताए हैं:–
1:– 'आंदोलन' बनाना:–
खुद को जनता का मसीहा और पुरानी व्यवस्था का शिकार #Underdog बताना.
2:–भाषा का पतन:–
तर्कपूर्ण बहस के बजाय बचकानी और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना.
3:– सच का अंत :–
तथ्यों को झुठलाना और अपनी सुविधानुसार नई 'सच्चाई' पेश करना.
संस्थाओं को कमजोर करना:–
न्यायपालिका, मीडिया और शिक्षा संस्थानों पर कब्जा करना या उन्हें डराना.
4:– "असली जनता" का कार्ड खेलना
लेखिका के अनुसार, एर्दोआन ने तुर्की को दो हिस्सों में बांट दिया—"असली जनता" जो उनके #समर्थक हैं और "गद्दार" जो उनके #विरोधी या शिक्षित वर्ग हैं.
वह अक्सर खुद को आम जनता के साथ जोड़ते हैं और विरोधियों को 'एलीट' या पश्चिमी देशों का एजेंट बताकर उनकी आवाज दबाते हैं.
5:– भय और शर्म का खात्मा
टेमल्कुरन लिखती हैं कि एर्दोआन के शासन में समाज से 'नैतिक शर्म' खत्म हो गई है. जब नेता खुलेआम #झूठ बोलता है या #क्रूरता करता है और समर्थक उसका जश्न मनाते हैं.
तो वह समाज को अंदर से खोखला कर देता है.उन्होंने इसे "बेशर्मी की राजनीति" कहा है.
6:–विरोधियों का दमन
उनकी किताब "Turkey: The Insane and the Melancholy" में जिक्र है कि कैसे 2013 के 'गेजी पार्क' प्रदर्शनों के बाद एर्दोआन ने अधिक #आक्रामक रुख अपनाया. उन्होंने #मीडिया को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया, जिसके कारण एसे टेमल्कुरन सहित कई पत्रकारों को अपनी नौकरियां गंवानी पड़ीं और देश छोड़ना पड़ा.
7:–धार्मिक ध्रुवीकरण
उन्होंने बताया कि कैसे एर्दोआन ने #धर्म (इस्लाम) का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक शक्ति बढ़ाने और तुर्की के #Secular ढांचे को बदलने के लिए किया है.
आप इस किताब में हमारी स्थितियों की 100 फीसदी झलक पाएंगे.
@RTErdogan
@ETemelkuran


यह पोस्ट पढ़ते हुए लगता है कि यह सिर्फ तुर्की की कहानी नहीं है। एसे टेमल्कुरन जिस तरह लोकतंत्र के टूटने के स्टेप गिनाती हैं, वह डराने वाला सच सामने रखता है। भाषा का गिरना, सच को मोड़ना और संस्थाओं को कमजोर करना अचानक नहीं होता, यह धीरे-धीरे सामान्य बना दिया जाता है।
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